Delhi Metro Updates: जंतर-मंतर के पास कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जारी विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा कारणों की वजह से सेंट्रल दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशन शनिवार को भी पूरी तरह बंद रहेंगे। यह लगातार चौथा दिन है जब जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में जारी बड़े प्रदर्शन और सुरक्षा इंतजामों की वजह से मेट्रो सर्विस डिस्टर्ब हुई है। DMRC ने बताया कि शनिवार सुबह 7:30 बजे से अगले आदेश तक ये 17 स्टेशन बंद रहेंगे।
बंद रहने वाले 17 मेट्रो स्टेशनों की पूरी लिस्ट
शनिवार सुबह 7:30 बजे से जिन 17 स्टेशनों के गेट यात्रियों के लिए बंद रहेंगे, उनके नाम यहां नीचे दिए गए हैं-
3 स्टेशनों पर जारी रहेगी इंटरचेंज सुविधा
DMRC ने बताया है कि भले ही इन 17 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट गेट बंद रहेंगे लेकिन यात्रियों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए तीन प्रमुख स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहेगी। लोगों को राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी।
सोनम वांगचुक को सता रही थी लद्दाख जैसी घटना होने की आशंका
आपको बता दें कि इस प्रदर्शन के साथ 26 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार देर रात जारी एक यूट्यूब वीडियो में साफ किया कि उन्होंने किसी डील के तहत नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों पर संभावित कार्रवाई और हिंसा रोकने के लिए अपना अनशन खत्म किया है। वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में युवाओं पर हुई पुलिस व सीआरपीएफ की गोलीबारी का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में बड़े क्रैकडाउन की आशंका थी। वे नहीं चाहते थे कि छात्र हिंसा या कानूनी कार्रवाई का शिकार बनें। इसलिए उन्होंने शांति की अपील करते हुए अनशन खत्म किया।
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वांगचुक ने खुद के साथ कैदियों जैसा बर्ताव किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना फोन, लैपटॉप के रखा गया और किसी से मिलने नहीं दिया गया। उनके मुताबिक मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के दौरान वांगचुक ने तब तक अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया जब तक सरकार ने यह लिखित आश्वासन नहीं दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और छात्रों पर कोई एफआईआर या कानूनी केस दर्ज नहीं किया जाएगा।
वांगचुक ने कहा कि उनकी प्राथमिकता छात्रों को कानूनी कार्रवाई से बचाना था। उन्हें भरोसा है कि आंदोलन जारी रहेगा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अंततः इस्तीफा देना ही पड़ेगा। वांगचुक ने दुख जताया कि देर रात अनशन खत्म करते समय उनके समर्थक छात्र, सीजेपी सदस्य और लद्दाख के प्रतिनिधि उनके साथ मौजूद नहीं रह सके क्योंकि उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी।
आपको बता दें कि सोनम वांगचुक ने 28 जून से प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, शिक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के आंदोलन के साथ अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था। इसे उन्होंने केंद्र सरकार के लिखित आश्वासन के बाद गुरुवार देर रात समाप्त किया।