कांग्रेस नेतृत्व ने मंगलवार को दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद कर्नाटक में नेतृत्व बदलने की अटकलों पर रोक लगा दी। पार्टी ने साफ कहा कि इस बैठक में सिर्फ आने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर चर्चा हुई थी। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं लगातार चल रही थीं। इसी बीच कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुई इस बड़ी बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और वरिष्ठ सांसद केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे।
बैठक के बाद सामने आई ये बड़ी जानकारी
बैठक खत्म होने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मौजूदगी में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि बैठक में सिर्फ 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव और कर्नाटक विधान परिषद चुनावों पर चर्चा हुई। वेणुगोपाल ने कहा, “हमने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ विस्तार से बैठक की। इस चर्चा में सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और मैं भी शामिल था। पूरी बातचीत सिर्फ राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर हुई। नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही थीं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है।” उनके इस बयान से साफ संकेत मिला कि कर्नाटक में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है। कांग्रेस का पूरा ध्यान अभी राज्यसभा चुनाव जीतने पर है।
कर्नाटक में चल रहा सियासी खींचतान
कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है। दोनों नेता सोमवार शाम पार्टी नेतृत्व के साथ अहम बैठक के लिए अलग-अलग दिल्ली पहुंचे थे। दरअसल, विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली थी। उस समय ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि दोनों नेताओं के बीच एक समझौता हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया पहले ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे, जबकि उसके बाद अगले ढाई साल के लिए डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
दोनों नेताओं के समर्थक लगातार पार्टी नेतृत्व पर फैसला लेने और स्थिति साफ करने का दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस ने अब तक इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी कहने से बचाव किया है। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन की बड़ी वजहों में से एक माना जा रहा है। कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस सिर्फ 9 सीटें ही जीत पाई थी। दिल्ली में हुई हालिया बैठक के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं। हालांकि, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने गुटबाजी की खबरों को ज्यादा महत्व नहीं देने की कोशिश की। अब 2028 के विधानसभा चुनाव करीब आने के साथ पार्टी नेतृत्व पर ऐसा रास्ता निकालने का दबाव बढ़ रहा है, जिससे दोनों गुट साथ बने रहें और कर्नाटक में राजनीतिक अस्थिरता भी न बढ़े।