चक्रवात अर्नब अपने साथ बड़ी तबाही लेकर आगे की ओर बढ़ रहा है अब तो समंदर में 8 फीट यानी 2.5 मीटर तक ऊंची लहरें उठने का खतरा बन गया है। बंगाल की खाड़ी में उठा ये तूफान बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराना शुरू हो गया है। IMD के मुताबिक लैंडफॉल की प्रक्रिया अगले 3 घंटे तक चलेगी और इस दौरान 150 KM प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल रही हैं।
आंध्र के काकीनाडा और विशाखापत्तनम में तेज हवा से पेड़ उखड़ गए हैं और बिजली के खंभे गिर गए हैं। वहीं तूफान के खतरे को देखते हुए ओडिशा में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित जगह भेजा गया है। सरकार ने 2000 गर्भवती महिलाओं को PEC और CEC सेंटर में शिफ्ट किया है और 313 रेस्क्यू टीमें तैनात की हैं।
आंध्र तट पर क्या है अर्नब के लैंडफॉल की मौजूदा स्थिति?
IMD ने बताया कि तूफान पिछले 3 घंटे से सिर्फ 3 KM प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। लैंडफॉल पॉइंट यानम के दक्षिण में है। जमीन से टकराते वक्त भी हवा की रफ्तार 125 से 135 KM बनी हुई है। आंध्र के कई इलाकों में एक रात में 200 MM से ज्यादा बारिश हो चुकी है।
काकीनाडा और यानम में हाई अलर्ट क्यों?
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 4 से 5 घंटे में समंदर का पानी सामान्य ज्वार से 1.5 से 2.5 मीटर ऊपर उठ सकता है। यानी करीब 8 फीट ऊंची लहरें काकीनाडा और यानम के निचले इलाकों में घुस सकती हैं। इससे तटीय गांवों में पानी भरने का खतरा है।
ओडिशा में लोगों की सुरक्षा के लिए ये किए गए हैं इंतजाम
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि हालात काबू में हैं और अब तक कोई मौत नहीं हुई है। राज्य में ODRAF, NDRF और फायर ब्रिगेड की 313 टीमें लगाई गई हैं। हजारों लोगों को पहले ही शेल्टर होम में पहुंचा दिया गया है।
इन राज्यों के लिए भी IMD ने जारी किया अलर्ट
IMD ने ओडिशा के 6 जिलों गजपति, गंजाम, रायगढ़ा, कोरापुट, नबरंगपुर, मलकानगिरी में सबसे ज्यादा बारिश का अलर्ट दिया है, यहां 90 KM तक हवा चल सकती है। 10 जिलों में ऑरेंज और 14 जिलों में येलो अलर्ट है जो 29 अक्टूबर रात तक रहेगा। पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश और तेज हवा का असर देखा जा रहा है।
IMD का कहना है कि लैंडफॉल के बाद भी अर्नब का असर अगले 12 घंटे तक बना रहेगा और यह धीरे-धीरे कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल जाएगा। लोगों से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकारी दिशा-निर्देशों का ही पालन करें और मछुआरों को अगले 2 दिन तक समंदर में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।