Delhi Housing Scheme: दिल्ली में घर खरीदने का है प्लान? 1BHK, 2BHK या 3BHK… मिडिल क्लास के बजट के हिसाब से जानें कौन सा फ्लैट पड़ेगा सही
Delhi Housing Scheme: दिल्ली में अपना घर खरीदना मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ा सपना है। लेकिन सही घर चुनना आसान नहीं है। 1BHK, 2BHK या 3BHK में से कौन सा विकल्प आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ेगा, यह सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत से तय नहीं होता। इलाके के हिसाब से घरों के दाम बदलते हैं, इसलिए डाउन पेमेंट, EMI, मासिक कमाई और भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर पूरा हिसाब लगाना जरूरी है
Delhi Housing Scheme: दिल्ली में घर खरीदने की तैयारी कर रहे मिडिल क्लास के लिए गुड न्यूज है
Delhi Housing Scheme: दिल्ली में अपना घर खरीदना हर मिडिल क्लास परिवार का बड़ा सपना होता है। लेकिन घर खरीदने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर बजट के हिसाब से 1BHK लेना सही रहेगा। 2BHK या फिर 3BHK... दिल्ली में एक ही साइज के घर की कीमत भी इलाके के हिसाब से काफी बदल जाती है। ऐसे में घर खरीदने से पहले सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत नहीं, बल्कि अपनी कमाई, EMI, डाउन पेमेंट और भविष्य के खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
इलाके के हिसाब से बदलती है घर की कीमत
इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल के अनुसार, दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतें पूरी तरह से लोकेशन पर निर्भर करती हैं। अगर आप वसंत विहार, चाणक्यपुरी या डिफेंस कॉलोनी जैसे प्रीमियम इलाकों में घर खरीदना चाहते हैं, तो कीमत काफी ज्यादा होगी। रोहिणी जैसे इलाकों में मिडिल क्लास परिवारों के बजट में अलग-अलग साइज के फ्लैट मिल सकते हैं।
उदाहरण के लिए, रोहिणी में 1BHK की कीमत लगभग ₹25-30 लाख से शुरू हो सकती है। जबकि 2BHK की कीमत ₹80 लाख से ₹1 करोड़ के बीच हो सकती है। एक अच्छे 3BHK की कीमत लगभग ₹1.5 करोड़ से ₹2.25 करोड़ तक हो सकती है। लेकिन असली कीमत प्रॉपर्टी की लोकेशन, उम्र, फ्लोर टाइप, सुविधाओं और कंस्ट्रक्शन के आधार पर अलग हो सकती है।
50 हजार, 1 लाख या 2 लाख कमाने वालों के लिए कौन सा घर
जिंदल के अनुसार, घर का साइज तय करते समय सबसे पहले परिवार की महीने की इनकम और भविष्य की जरूरतों पर विचार करना चाहिए। अगर परिवार की महीने की इनकम लगभग ₹50,000 है, तो 1BHK ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन हो सकता है। वहीं, जिन परिवारों की महीने की इनकम ₹1 लाख है, वे 2BHK के बारे में सोच सकते हैं।
अगर महीने की इनकम लगभग ₹2 लाख है और दूसरी फाइनेंशियल जिम्मेदारियां भी मैनेज की जा सकती हैं, तो 3BHK के बारे में सोचा जा सकता है। दूसरे शब्दों में सिर्फ घर के साइज के आधार पर फैसला करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि EMI आपके फाइनेंस पर कितना बोझ डालेगी।
EMI कितनी होनी चाहिए?
घर खरीदने वालों के लिए सबसे जरूरी सवाल EMI का होता है। आकाश जिंदल के अनुसार, अपनी मासिक आय के हिसाब से होम लोन की EMI ऐसी रखनी चाहिए जिसे आसानी से चुकाया जा सके। उन्होंने यह भी समझाया कि घर खरीदने के बाद सिर्फ EMI ही खर्च नहीं होती। रजिस्ट्री, डॉक्यूमेंटेशन, ट्रांसफर से जुड़े खर्च, घर की मरम्मत,फर्निशिंग और दूसरे खर्चों के लिए भी पैसा चाहिए।
पूरी बचत डाउन पेमेंट में लगाना कितना सही?
घर खरीदते समय अपनी सारी सेविंग्स डाउन पेमेंट में लगाना अच्छा आइडिया नहीं है। जिंदल के अनुसार, अपनी सेविंग्स का लगभग 70% डाउन पेमेंट में इन्वेस्ट करना और 30% इमरजेंसी के लिए अलग रखना सबसे अच्छा है। घर खरीदने में रजिस्ट्रेशन, डॉक्यूमेंटेशन, फर्निशिंग और दूसरे अचानक आने वाले खर्चे शामिल होते हैं।
घर खरीदने से पहले दस्तावेज जरूर जांचें
आकाश जिंदल कहते हैं कि घर खरीदने से पहले, आपको प्रॉपर्टी की ओनरशिप, अप्रूवल, गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन और सभी लीगल डॉक्यूमेंट्स जरूर चेक करने चाहिए। अगर जरूरी हो, तो डॉक्यूमेंट्स को किसी वकील से रिव्यू करवाएं और जल्दबाजी में कोई भी फैसले लेने से बचें।