पूर्वी दिल्ली की संजय झील लंबे समय से लोगों के लिए घूमने-फिरने की खास जगह रही है। अब इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी योजना के तहत झील पर बने सस्पेंशन ब्रिज को भी बेहतर करने की तैयारी है। इसके लिए पहले यह समझा जाएगा कि पुल की कंडीशन कैसी है और आगे इसे किस तरह सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सकता है।
पुल की जांच में क्या देखा जाएगा?
DDA को पुल की पूरी जांच के लिए करीब तीन महीने का समय लग सकता है। शुरुआत साइट सर्वे और मौके पर पुल के निरीक्षण से होगी। इसमें पुल के अलग-अलग हिस्सों की पहचान, उनकी माप और कंडीशन को देखा जाएगा। पुराने नक्शे, फोटो, वीडियो और पहले की रिपोर्ट भी जांची जाएंगी, ताकि पुल में हुए बदलाव और मौजूदा कमियों का बेहतर अंदाजा लगाया जा सके।
पुल के अलग-अलग स्ट्रक्चरल हिस्सों की मजबूती जांचने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाएंगे। इनमें स्टील के हिस्सों की मोटाई देखना, धातु की हार्डनेस टेस्टिंग और जरूरत पड़ने पर लिक्विड पेनिट्रेंट टेस्टिंग करना शामिल है। साथ ही जमीन और मिट्टी से जुड़ी कंडीशन को समझने के लिए जियोटेक्निकल जांच भी की जाएगी। सारी जांच पूरी होने के बाद पुल का स्ट्रक्चरल एनालिसिस किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि पुल अभी कितना भार सह सकता है और किन हिस्सों में सुधार की जरूरत है। इससे यह पता चलेगा कि कहां मरम्मत करनी है, कहां मजबूती बढ़ानी है और किन हिस्सों को बदलना जरूरी हो सकता है।
DDA पुल की कंडीशन को दिखाने वाली नई स्ट्रक्चरल ड्रॉइंग, CAD ड्रॉइंग और 3D ड्रॉइंग भी तैयार करवाएगा। इसके साथ ही मरम्मत और मजबूती से जुड़े कामों की मात्रा और अनुमानित लागत का हिसाब लगाया जाएगा। इससे आगे होने वाले काम को सही तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
तीन चरणों में आगे बढ़ेगा काम
पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले साइट सर्वे और पुल की हालत की जांच होगी। इसके बाद टेस्टिंग रिपोर्ट, स्ट्रक्चरल एनालिसिस और जरूरी डिजाइन तैयार किए जाएंगे। आखिरी चरण में सभी जरूरी ड्रॉइंग और डॉक्यूमेंट जमा करने के साथ कंसल्टेंसी से जुड़े काम का वेरिफिकेशन किया जाएगा।
संजय झील के पूरे इलाके को बेहतर करने की है तैयारी
सस्पेंशन ब्रिज का काम झील को बेहतर बनाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। संजय झील और इसके आसपास के इलाके को ज्यादा साफ, व्यवस्थित और उपयोगी बनाने के लिए काम किया जाना है। इससे आने वाले समय में यह जगह लोगों के लिए घूमने और समय बिताने के लिए सुविधाजनक बन सकती है।
किसी पुराने स्ट्रक्चर को सीधे बदलने के बजाय पहले उसकी पूरी कंडीशन को समझना जरूरी होता है। संजय झील के मामले में भी इसी तरह कदम आगे बढ़ाया जा रहा है। जांच और योजना का काम पूरा होने के बाद ही पता चलेगा कि पुल को किस तरह नया रूप दिया जाएगा।