कैसे रची गई लाल किले के करीब हुए ब्लास्ट की साजिश, पढ़ें पूरी कहानी!

दिल्ली में सोमवार की शाम लाल किले के पास जो ब्लास्ट हुआ, उसमें अभी तक बारह लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अठाइस से अधिक घायल हैं। इस ब्लास्ट को जेहादी मानसिकता वाले एक डॉक्टर ने कैसे अंजाम दिया, और कौन है इस साजिश के पीछे, इनके तार कहां- कहां जुड़े हैं, पढ़ें इसका खुलासा करती हुई ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट!

अपडेटेड Nov 12, 2025 पर 12:51 PM
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अभी तक कहा जाता रहा है कि गरीबी और अशिक्षा के कारण मुस्लिम युवक जेहाद या आतंकवाद की तरफ बढ़ते हैं, लेकिन आतंक की इस ताजा साजिश को देखा जाए, तो इसमें शामिल सभी लोग न सिर्फ काफी पढ़े- लिखे हैं, धनी हैं, बल्कि डॉक्टर जैसे मानवीय पेशे में है

दिल्ली में कल शाम हुए कार बम ब्लास्ट ने एक बार फिर से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खतरे के प्रति देश को झकझोर दिया है। इस ब्लास्ट में अभी तक बारह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घायलों की तादाद पचीस से अधिक है। इस फिदायीन अटैक को अंजाम देने वाले आतंकवादी का कनेक्शन जैश- ए- मोहम्मद से निकल कर आ रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों की अभी तक की जांच पड़ताल में सामने आया है कि इस फिदायिन हमले को अंजाम देने का काम डॉक्टर उमर मोहम्मद ने किया है, जिसके शरीर के परखच्चे उड़ गये हैं। विस्फोट को अंजाम देने के लिए जिस हुंडई आई-20 कार का इस्तेमाल किया गया, वो डॉक्टर उमर ही चला रहा था। सोमवार की सुबह सात बजे ये फरीदाबाद से कार लेकर निकला था, जगह- जगह लगे सीसीटीवी कैमरों में ये दर्ज हुआ है।

कहां से आई थी ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई कार!


पुलिस की अभी तक की जांच में सामने आया है कि आई-20 कार, जिसे डॉक्टर उमर चला रहा था, वो सुबह आठ बजकर तेरह मिनट पर बदरपुर टोल प्लाजा के जरिये दिल्ली में दाखिल हुई थी। सुबह आठ बजकर बीस मिनट पर ये कार ओखला इंडस्ट्रियल एरिया के एक पेट्रोल पंप पर देखी गई। दोपहर बाद तीन बजकर 19 मिनट पर ये कार लाल किला परिसर के पास मौजूद पार्किंग एरिया में दाखिल हुई।

लाल किले के पास इसने शाम में विस्फोट को अंजाम दिया, इसके पीछे खास कारण था। एक तो लाल किले का ऐतिहासिक महत्व है, दूसरा यहां शाम के समय काफी भीड़भाड़ रहती है। लाल किले की प्राचीर से ही प्रधानमंत्री 15 अगस्त के मौके पर राष्ट्र के नाम संदेश भी देते हैं। इसलिए इस जगह पर विस्फोट करके आतंकी एक बड़े खतरनाक संदेश को देना चाह रहे थे।

विस्फोट के लिए अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल किया गया। इस तरह का विस्फोटक तैयार करना आसान है, जो बाजार में बिकने वाले यूरिया के साथ फ्यूल ऑयल को मिलाकर तैयार किया जाता है। अमूमन अब आरडीएक्स का इस्तेमाल आतंकी कम ही करते हैं, क्योंकि एक तो इसे हासिल करना आसान नहीं है, दूसरा इसकी कड़ियां जोड़ना आसान होता है कि आखिर ये आया कहां से है।

डॉक्टरों ने कैसे रची ये साजिश?

जहां तक डॉक्टर उमर का सवाल है, उसके बारे में जम्मू-कश्मीर पुलिस को एक और डॉक्टर मुजम्मिल से जानकारी मिली, जिससे पुलिस अधिकारियों ने गहराई से पूछताछ की तो उसने अपने साथी आतंकवादियों के साथ मिलकर गढ़े गये बड़े आतंकी प्लान के बारे में काफी सनसनीखेज जानकारी दी। दरअसल 24 फरवरी 1989 को जन्मे डॉक्टर उमर ने मेडिकल की पढ़ाई गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से की, जहां उसकी दोस्ती मुजम्मिल से हुई। वर्ष 2017 में एमबीबीएस की पढाई पूरी करने के बाद दोनों ने यहां रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर नौकरी भी की। दो साल पहले ये दोनों फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में नौकरी करने आ गये, डॉक्टर के तौर पर।

डॉक्टर उमर मोहम्मद (बायीं तरफ ऊपर), डॉक्टर आदिल और डॉक्टर मुजम्मिल (नीचे बायीं तरफ), डॉक्टर सज्जाद अहमद मल्ला और बायीं तरफ पहली फोटो डॉक्टर शाहीन सईद की हैं डॉक्टर उमर मोहम्मद (बायीं तरफ ऊपर), डॉक्टर आदिल और डॉक्टर मुजम्मिल (नीचे बायीं तरफ), डॉक्टर सज्जाद अहमद मल्ला और दायीं तरफ पहली फोटो डॉक्टर शाहीन सईद की हैं

अभी तक की जांच में पता चला है कि जैश- ए- मोहम्मद से जुड़े इन आतंकवादियों की नीयत पूरे देश में बम धमाके करने की थी, जिसके लिए इन्होंने काफी तैयारी कर रखी थी। लेकिन एक के बाद एक, इस साजिश से जुड़े डॉक्टर मुजम्मिल सहित अपने कई साथियों के पकड़े जाने के बाद डॉक्टर उमर ने हड़बड़ी में सोमवार की शाम दिल्ली में लाल किले के पास फिदायीन अटैक कर दिया, ताकि पुलिस उस तक पहुंचे, उसके पहले वो अपने खतरनाक मंसूबे में कामयाब हो सके।

कैसे खुलीं इस साजिश की परतें!

दरअसल इसी साल 18 अक्टूबर को श्रीनगर के नौगाम इलाके में हुई एक पोस्टरबाजी की घटना के कारण इस साजिश की परतें खुलनी शुरू हुईं। नौगाम इलाके में 18 तारीख की रात में तीन- चार पोस्टर लगे, जिसमें जम्मू- कश्मीर पुलिस और सेना सहित तमाम सुरक्षा बलों को धमकी दी गई थी, उन्हें मारने की बात की गई।

जम्मू-कश्मीर में इस तरह की पोस्टरबाजी 2019 में आर्टिकल 370 की समाप्ति के पहले काफी हुआ करती थी। लेकिन अगस्त 2019 के बाद से इस पर अमूमन रोक लग गई थी। कभी-कभार ही श्रीनगर के पुराने इलाके, डाउनटाउन में, पांच अगस्त के आसपास इक्का-दुक्का पोस्टरबाजी की घटना हुआ करती थी, आर्टिकल 370 की समाप्ति का विरोध करते हुए। दरअसल पांच अगस्त 2019 को ही आर्टिकल 370 की समाप्ति की गई थी, संविधान संशोधन करते हुए।

ऐसे में जब 18 अक्टूबर की रात को, बिना किसी अवसर के, इस तरह के पोस्टर लगे, तो श्रीनगर पुलिस के कान खड़े हो गये। जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा से पुलिस अधिकारियों की चर्चा हुई, क्योंकि उमर अब्दुल्ला की अगुआई में निर्वाचित सरकार होने के बाद भी, रुल्स और बिजनेस के तहत कानून- व्यवस्था की सीधी जिम्मेदारी अब भी लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास ही है। मनोज सिन्हा ने इस घटना की तह में जाने का निर्देश जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों को दिया।

सिन्हा के इस निर्देश के मुताबिक ही श्रीनगर के एसएसपी संदीप चक्रवर्ती की अगुआई में जम्मू- कश्मीर पुलिस ने इस मामले में अपनी जांच- पड़ताल तेज कर दी। 19 अक्टूबर को इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने नौगाम इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली। इनकी जांच- पड़ताल से ये पता चला कि पोस्टर चिपकाने का काम तीन युवकों ने किया है, जो सीसीटीवी फुटेज में साफ नजर आए। पुलिस अधिकारियों ने इन युवाओं की पहचान स्थापित की, ये नौगाम इलाके ही रहने वाले थे, नाम थे- आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर- उल- अशरफ और मकसूद अहमद डार।

जब इनसे गहराई से पूछताछ की गई, तो पता चल कि आर्टिकल 370 की समाप्ति के पहले जम्मू- कश्मीर में जो पत्थरबाजी का सिलसिला चला करता था, उसमें ये नियमित तौर पर शामिल रहते थे, उनके लिए ये कमाई का साधन था। इन्हें प्रति दिन पत्थरबाजी करने के लिए पांच- छह सौ रुपये मिला करते थे। इन्होंने ही ये बताया कि उनसे ये काम एक मौलवी कराता था और इसी मौलवी के इशारे पर उन्होंने 18 अक्टूबर की रात को नौगाम इलाके में पोस्टर चिपकाये थे।

युवकों से हुई पूछताछ के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस उस मौलवी के पास जा पहुंची, जो श्रीनगर के बाहरी हिस्से छनपुरा में मस्जिद अली नक्कीबाग का इमाम था। इस इमाम का नाम था मौलवी इरफान अहमद, जो मूल तौर पर शूपियां का रहने वाला था और लंबे समय से आतंकी गतिविधियों में संलग्न था। मौलवी न सिर्फ आतंकवादियों को हथियार की सप्लाई करता था, बल्कि कश्मीरी युवाओं को आतंकी प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भी भेजता था। इसके अलावा वो पत्थरबाजी भी 2019 से पहले नियमित तौर पर कराते रहता था, सुरक्षाबलों की गाड़ियों के उपर। इसी मौलवी ने पोस्टर लगवाये थे अपने पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर, नौगाम के इलाके में, स्थानीय युवकों के सहारे।

मौलवी इरफान अहमद से जब जम्मू- कश्मीर पुलिस ने गहराई से पूछताछ की, तो इसने डॉक्टर आदिल के बारे में जानकारी दी। डॉक्टर आदिल से मौलवी अनंतनाग में मिला था, जहां के मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद वही वो रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर नौकरी कर रहा था। मौलवी ने ये कबूला कि जेहादी मानसिकता वाले डॉक्टर आदिल के पास उसने पिस्तौल देखी थी। मौलवी ने जमीर नामक एक और जेहादी के बारे में सूचना दी, जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त था।

मौलवी से मिली इस जानकारी के आधार पर जम्मू- कश्मीर पुलिस ने गांदरबल के निवासी जमीर अहमद अहंगर को गिरफ्तार किया और उसके बाद डॉक्टर आदिल को ढूंढने की कवायद शुरु की। तब पता चला कि मूल तौर पर कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपुरा का रहने वाला डॉक्टर आदिल अनंतनाग छोड़ चुका है और ये सहारनपुर के एक अस्पताल में नौकरी कर रहा है। यहां पर यूपी एटीएस की मदद से इन्होंने डॉक्टर आदिल को पकड़ा। आदिल ने सहारनपुर में विब्रोश अस्पताल में कुछ समय तक नौकरी की थी और गिरफ्तारी के पहले सहारनपुर के फेमस हॉस्पिटल को ज्वाइन कर लिया था। यही काम करते हुए आदिल की शादी हुई थी, जिस शादी में भाग लेने के लिए उसके कई मुस्लिम साथी कश्मीर भी गये थे।

डॉक्टर आदिल से पूछताछ के दौरान जम्मू- कश्मीर पुलिस को डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनाई उर्फ मुसाइब के बारे में पता चला, जो आतंकी साजिश में उसके साथ शामिल था और श्रीनगर छोड़कर हरियाणा के फरीदाबाद में मौजूद अल फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के तौर पर नौकरी कर रहा था। डॉक्टर आदिल ने पूछताछ के दौरान ये भी कबूल किया कि उसके पास एक एके-56 राइफल है, जो उसने अनंतनाग गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के लॉकर में छुपाकर रखी हुई है। पुलिस ने छापा मारकर लॉकर से वो राइफल बरामद कर ली।

इसके बाद जम्मू- कश्मीर पुलिस ने अपना ध्यान डॉक्टर मुजम्मिल पर लगाया। डॉक्टर मुजम्मिल की तलाश में वो फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी पहुंची। जब उसने डॉक्टर मुजम्मिल से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने फरीदाबाद के एक ठिकाने के बारे में जानकारी दी, जहां वो बम विस्फोट करने के लिए तैयार की जाने वाली आईईडी से जुड़ी हुई सामग्री और उपकरण बड़े पैमाने पर रखे हुए था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस को उस ठिकाने से 358 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री हासिल हुई, साथ में डेटोनेटर वगैरह उपकरण।

डॉक्टर मुजम्मिल ने पूछताछ के दौरान ही अपनी गर्लफ्रैंड डॉक्टर शाहिद सईद के बारे में बताया, जो मूल तौर पर लखनऊ की रहने वाली थी और उसी के साथ अल फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में नौकरी कर रही थी असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर। मुजम्मिल ने बताया कि उसने अपनी जैसी ही जेहादी मानसिकता वाली इस गर्लफ्रैंड के पास एक एके-47 राइफल छुपाकर रखी है।

मुजम्मिल से मिली इस जानकारी के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हरियाणा पुलिस की मदद से डॉक्टर शाहिन सईद की खोज शुरू की। तब तक इस लेडी डॉक्टर को अपने बॉयफ्रेंड की गिरफ्तारी की खबर लग चुकी थी और ऐसे में हड़बड़ाहट में उसने अपनी कार में छुपाकर रखी गई एके-47 राइफल को अल फलाह यूनिवर्सिटी के पीछे ही एक डंपिंग साइट पर फेंक दिया था। डॉक्टर शाहिद को पकड़ने के बाद उसकी निशानदेही पर जम्मू- कश्मीर पुलिस ने एके-47 राइफल डंपिंग साइट से बरामद कर ली।

इस दौरान डॉक्टर मुजम्मिल से पूछताछ के दौरान जम्मू- कश्मीर पुलिस को हाजी इश्तियाक नामक एक और जेहादी मानसिकता वाले व्यक्ति के बारे में पता चला, जो आतंकी साजिश में शामिल था। हाजी इश्तियाक मेवात का रहने वाला था, सिंगार- पुनहाना गांव का। इसकी डॉक्टर मुजम्मिल से गहरी दोस्ती हो चुकी थी, दोनों ही जेहादी मानसिकता रख रहे थे और भारत को सैकड़ों बम विस्फोटों के जरिये दहलाना चाह रहे थे।

पुलिस ने हाजी इश्तियाक को धर दबोचा, जिसने फरीदाबाद में ही एक मकान किराये पर लेकर रखा हुआ था। इस मकान पर जब जम्मू- कश्मीर पुलिस ने हरियाणा पुलिस की मदद से छापा मारा, तो उसके होश उड़ गये। यहां पर उसे 88 बोरे मिले। इन बोरों में थी कुल 2563 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री। हाजी इश्तियाक का ये ठिकाना अल फलाह यूनिवर्सिटी के पीछे ही था। यहां पर अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम, फ्यूल आयल, डेटोनेटर, बैटरी, टाइमर, हर वो सामग्री मिली, जिसके जरिये हजारों जिंदगियां ली जा सकती थीं, सैकड़ों बम विस्फोट किये जा सकते थे, आतंकवादी साजिश को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता था।

आतंकी ठिकानों पर छापेमारी में क्या मिला!

कुल मिलाकर अभी तक की तमाम ठिकानों पर हुई रेड के दौरान जम्मू- कश्मीर पुलिस को एके सीरीज की दो राइफल, एक चाइनीज स्टार पिस्टल, एक बेरेटा पिस्टल और करीब 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री मिल चुकी थी। इसके बाद डॉक्टर आदिल, डॉक्टर मुजम्मिल और उसकी गर्लफ्रैंड डॉक्टर शाहीन सईद को जब एक साथ बिठाकर जम्मू- कश्मीर पुलिस के अधिकारियों ने पूछताछ की, तो आतंकवाद के इस बड़े प्लॉट के बारे में और सनसनीखेज जानकारी हासिल हुई, ये भी पता चला कि कैसे जैश- ए- मोहम्मद के अपने पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर ये भारत को दहलाने की तैयारी अमूमन पूरी कर चुके थे, बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री इकट्ठा कर चुके थे, तमाम उन जगहों की रेकी कर चुके थे, जहां विस्फोट किये जाने थे।

इन्हीं से पूछताछ के दौरान जम्मू- कश्मीर पुलिस को डॉक्टर उमर के बारे में जानकारी मिली, जो न सिर्फ श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मुजम्मिल के साथ पढ़ा था, बल्कि आतंकी साजिश में उसके साथ सक्रिय तौर पर शामिल था। जम्मू- कश्मीर पुलिस ने एक बार फिर से अल फलाह यूनिवर्सिटी का रुख किया, डॉक्टर उमर को पकड़ने के लिए। तब तक उमर को भनक लग चुकी थी कि उसके ढेर सारे साथी पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं और उसकी गिरफ्तारी महज वक्त की बात है।

ऐसे में डॉक्टर उमर ने उस लाल किले के करीब फिदायीन हमला करके लोगों की जान लेने की सोची, जिस लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के दुश्मनों के खात्मे की बात हमेशा करते रहते हैं, उनको सबक सिखाने की बात करते रहते हैं। इसके लिए उसने उस आई-20 गाड़ी का इस्तेमाल किया, जो 2014 मेक की थी, HR26CE7674, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर था। इस गाड़ी का पहला मालिक मोहम्मद सलमान था, जिसके बाद ये कार कई लोगों को बिकते हुए इलियास आमिर के पास पहुंची थी, जो पुलवामा के शंबुरा गांव का रहने वाला था, इसके करीब ही डॉक्टर उमर का घर था।

Delhiblasttruth इसी साल 18 अक्टूबर को श्रीनगर के नौगाम इलाके में हुई एक पोस्टरबाजी की घटना के कारण इस साजिश की परतें खुलनी शुरू हुईं

बैंक के एटीएम पर गार्ड की नौकरी करने वाले इलियास आमिर ने अपने दोस्त तारिक अहमद डार को ये गाड़ी चलाने के लिए दी थी, जिसने इसे डॉक्टर उमर को दे दिया था। लाल किले के पास कल दोपहर बाद तीन बजे के करीब पहुंचने के बाद डॉक्टर उमर ने अगले तीन घंटे यहां इंतजार किया और फिर जब लाल किले के चौराहे पर भीड़ काफी बढ़ गई, वाहनों की आवाजाही काफी तेज हो गई, उस समय विस्फोट कर बड़े पैमाने पर जान- माल का नुकसान कर दिया, दिल्ली को फिर से आतंकी हमले का शिकार बना दिया।

अभी तक कहा जाता रहा है कि गरीबी और अशिक्षा के कारण मुस्लिम युवक जेहाद या आतंकवाद की तरफ बढ़ते हैं, लेकिन आतंक की इस ताजा साजिश को देखा जाए, तो इसमें शामिल सभी लोग न सिर्फ काफी पढ़े- लिखे हैं, धनी हैं, बल्कि डॉक्टर जैसे मानवीय पेशे में है, जहां मकसद लोगों की जान बचाना होता है, जान लेना नहीं, लेकिन जेहादी सोच के तहत निर्दोषों की जान लेने में ये सब लगे हुए थे।

अगर समय पर ज्यादातर आतंकियो की गिरफ्तारी नहीं होती, तो पता नहीं जेहादी मानसिकता वाले ये डॉक्टर अपने शागिर्दों, सहयोगियों के साथ मिलकर देश में कितनी बड़ी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देते, पाकिस्तान में बैठे अपने आतंकी आकाओं के इशारे पर, जो ऑपरेशन सिंदूर में जमकर मार खाने के बाद बिलबिलाये हुए हैं, भारत में आतंकी हमले करने की लगातार साजिश रच रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। पता नहीं, अब भी कितने जेहादी मानसिकता वाले छुपे बैठे हैं। इसलिए इस केस को अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एनआईए को सौंप दिया है। एनआईए इस मामले में आगे बढ़े, उससे पहले जम्मू- कश्मीर पुलिस ने एक और डॉक्टर सजाद अहमद मल्ला को हिरासत में लिया है। पता नहीं कितने डॉक्टर, जिन्होंने मानवता की सेवा करने की शपथ ली है, वो इस शपथ के खिलाफ जाकर आतंकी साजिश में लगे हुए हैं।

आगे की जांच में इसका खुलासा हो, सुरक्षा एजेंसियां इन तक जल्दी पहुंचे, यही देश को उम्मीद है। एक बार इस पूरी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद इनके आकाओं को भी सबक सिखाने की तैयारी है, जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान की धरती से साफ कर दिया है, हमले के पीछे के षडयंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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