Delhi CJP Protest: दिल्ली में सभी मेट्रो स्टेशन खुले! रेल और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल, बैरिकेडिंग और पुलिस हिरासत पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

Delhi CJP Protest: सुप्रीम कोर्ट ने रविवार (11 अक्टूबर) को निर्देश जारी करते हुए कहा कि दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं तब तक सामान्य रूप से चलनी चाहिए जब तक कि कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति पैदा न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रैफिक नियमों के पालन के साथ लोगों की आवाजाही की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही इंटरनेट सेवा बहाल की जानी चाहिए

अपडेटेड Oct 11, 2026 पर 2:30 PM
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Delhi CJP Protest: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं पहुंचाई जानी चाहिए

Delhi CJP Protest News: राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाएं बंद करने तथा लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार (11 अक्टूबर) को अहम निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने वाले लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा, "ऐसे लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए।" साथ ही शीर्ष अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने, कानून के मुताबिक इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रखने और लोगों एवं ट्रैफिक की आवाजाही की अनुमति देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर लगी धारा 163 का बोर्ड हटाने का भी निर्देश दिया, ताकि न्याय तक पहुंच को लेकर कोई आशंका न रहे।

दिल्ली में मेट्रो-ट्रेन और इंटरनेट चालू रहेंगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने उसके निर्देश के उल्लंघन के आरोप में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने में किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचायी जानी चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से जुटने वालों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए। शीर्ष अदालत ने ट्रैफिक नियमों के अधीन लोगों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही बैरिकेड्स लगाने की जरूरत की समीक्षा करने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने कहा, "कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए।"

केंद्र सरकार को नोटिस जारी

अदालत ने केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस भी जारी किया, जिसमें दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के कारण मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी न्यायालय के निर्देश के कथित उल्लंघन को लेकर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो अपनी सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों।

पीठ ने कहा, "9 अक्टूबर 2026 के हमारे पिछले आदेश के उल्लंघन और 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने के आरोपों वाली तत्काल सुनवाई की याचिकाओं के मद्देनजर न्यायालय ने विशेष सुनवाई की।"

'निर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि निर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया। मेट्रो रेल सेवा संचालित नहीं हो रही थी। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन बंद रहे। ट्रैफिक संबंधी कोई एडवाइजरी जारी नहीं किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को अनुचित रूप से परेशान किया गया। लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। जिन स्थानों पर यह सब हुआ, उनमें वे इलाके भी शामिल थे, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा के दायरे में नहीं आते थे।"

पत्रकारों को लेकर पुलिस को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने से न रोका जाए। सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशन में से केवल 45 पर एंट्री और एग्जिट प्रतिबंधित था। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के नौ अक्टूबर के आदेश का उल्लेख किया गया है। यह आदेश दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर 57 मेट्रो स्टेशन को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार तक सरकार से जवाब मांगा है।

निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP और कुछ छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। सरकार ने शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करके और 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को रोक दिया। हिरासत में लिए गए लोगों में CJP नेता अभिजीत दीपके, विपक्ष के कई नेता और यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल थे।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की मुख्य बातें

  • दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। पाबंदियां तभी लगाई जा सकती हैं जब वे आर्टिकल 19(2) के तहत सही ठहराई जा सकें।
  • कानूनी पाबंदियां लगाने की वैधानिक शक्तियों पर असर डाले बिना, कानून के अनुसार इंटरनेट सेवाएं चालू रहनी चाहिए।
  • दिल्ली में लोगों और गाड़ियों की आवाजाही में बेवजह रुकावट नहीं आनी चाहिए। कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की जरूरतों के आधार पर बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए।
  • किसी को भी गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। किसी भी हिरासत के मामले में कानून द्वारा तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
  • कानून के अनुसार शांतिपूर्ण सभाओं की अनुमति दी जानी चाहिए, खासकर उन इलाकों के बाहर जहां धारा 163 BNSS के तहत सख्ती लागू है।
  • सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों तक बिना रुकावट पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास धारा 163 की पाबंदियों वाला कोई भी नोटिस बोर्ड अगर अभी भी लगा है, तो उसे हटा दिया जाना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस आश्वासन को दर्ज किया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपना काम करने में नहीं रोका जाएगा।
  • शीर्ष अदालत के 9 अक्टूबर के आदेश के उल्लंघन के आरोप में अवमानना ​​की कार्यवाही के तहत नोटिस जारी किया गया। अधिकारियों को मंगलवार, 13 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें मेट्रो पाबंदियों और रेलवे की सलाहों का विवरण शामिल हो।
  • बड़े पैमाने पर हिरासत और उससे जुड़े अन्य मामलों के आरोपों वाली 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिकाओं पर 13 अक्टूबर को मुख्य मामलों के साथ सुनवाई होगी।
  • अदालत ने कहा कि राज्य को कथित हिरासत के हालात, तरीके और कानूनी आधार के बारे में बताना होगा, क्योंकि आर्टिकल 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा और उन्हें लागू करना कोर्ट का कर्तव्य है।

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