दिल्ली की एक अदालत ने NEET-UG पेपर लीक मामले में आरोपी यश यादव को बड़ी राहत देते हुए आगामी री-एग्जाम में शामिल होने की अनुमति दे दी है। फिलहाल यश न्यायिक हिरासत में है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा प्राप्त करना हर नागरिक का फंडामेंटल राइट है, इसलिए उसे परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता। अदालत के इस फैसले के बाद यश यादव अब तय प्रक्रिया के तहत दोबारा आयोजित होने वाली NEET-UG परीक्षा में शामिल हो पाएंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने ये भी नोट किया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इस मांग का कोई विरोध नहीं किया और उम्मीदवार के लिए पहले ही एडमिट कार्ड जारी किया जा चुका है।
बता दें पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 12 मई को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी थी। अब छात्रों के लिए यह परीक्षा दोबारा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
यश यादव ने अदालत से 15 दिनों की इंटरिम बेल देने की मांग की थी, ताकि वह 21 जून को होने वाली NEET-UG री-एग्जाम में और अपनी बहन की शादी में भी शामिल हो सके। इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उसकी याचिका पर तत्काल फैसला नहीं लिया था और कहा था कि उस समय इस अनुरोध पर विचार करना जल्दबाजी होगी। बाद में अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसकी मांग पर सुनवाई की। मामले की पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि यश यादव को अभी तक NEET-UG री-एग्जाम का एडमिट कार्ड नहीं मिला है। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 जून के लिए तय कर दी थी।
इस मामले में 2 जून को अदालत ने यश यादव को NEET-UG की तैयारी जारी रखने के लिए अपनी पढ़ाई की किताबें साथ रखने की अनुमति दी थी। यश उन 13 आरोपियों में शामिल है जिन्हें कथित पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसे उस समय हिरासत में लिया गया जब उसके पास कथित तौर पर लीक हुआ क्वेश्चन पेपर मिलने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों का दावा है कि ये पेपर उसे गुरुग्राम के BAMS छात्र शुभम खैरनार के माध्यम से मिला था, जिसके बाद जांच का दायरा और बढ़ गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि यश यादव ने कथित तौर पर लीक हुए क्वेश्चन पेपर को बाद में जयपुर निवासी मांगीलाल बिवाल उर्फ मांगीलाल खटीक को 10 लाख रुपये में उपलब्ध कराया था। अधिकारियों के अनुसार, ये सौदा इस शर्त पर हुआ था कि प्रश्नपत्र के कम से कम 150 सवाल असली NEET-UG परीक्षा से मेल खाएं। वहीं पूछताछ के दौरान शुभम खैरनार ने कथित रूप से बताया कि उसने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यह पेपर यादव तक पहुंचाया था और इसके बदले उससे 15 लाख रुपये लिए थे। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और पैसों के लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुए पेश
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच पूरी होने तक कई आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने का फैसला किया। सुनवाई में यश यादव, मांगीलाल खटीक, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, धनंजय लोखंडे, मनीषा संजय हवलदार, मनोज शिरुरे, तेजस शाह और शुभम खैरनार समेत अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के सामने पेश हुए। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रखने के निर्देश दिए।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस मामले में मनीषा संजय वाघमारे, धनुंजय निवृत्ति लोखंडे और शुभम मधुकर खैरनार को प्रमुख आरोपियों के रूप में चिन्हित किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले से जुड़े कई पहलुओं की अभी भी जांच की जा रही है और सच्चाई तक पहुंचने के लिए इन आरोपियों से आगे भी पूछताछ करना जरूरी है। सीबीआई का कहना है कि जांच अभी जारी है और इससे जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाला जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां मामले में शामिल प्रमुख आरोपियों से अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ करेंगी।