Delhi-Dehradun Expressway: हाल ही में लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर गड्ढे और सड़क धंसने के मामले को लेकर संसद में सरकार ने अपना पक्ष रखा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि एक्सप्रेसवे पर पाए गए दो गड्ढों की मरम्मत सरकार के पैसे से नहीं। बल्कि ठेकेदार ने अपनी जिम्मेदारी के तहत अपने खर्च पर कराई है। केंद्र सरकार ने संसद में माना कि उद्घाटन के कुछ महीनों बाद ही नए बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर दो गड्ढे पाए गए थे। सरकार ने कहा कि मरम्मत का काम ठेकेदार ने अपने खर्च पर किया था।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब उत्तर प्रदेश के शामली के पास एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंसने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में सड़क पर बड़ा गड्ढा और क्षतिग्रस्त हिस्सा दिखाई देने के बाद निर्माण गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने इतने महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। साथ ही नेशनल हाईवे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी पैदा कर दीं।
करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2026 में किया था। इसका मकसद दिल्ली से उत्तराखंड के एंट्री गेट तक यात्रा के समय को 6 घंटे से घटाकर सिर्फ 2.5 घंटे करना है।
संसद में क्या बोले नितिन गडकरी?
राज्यसभा सांसद अशोक सिंह के सवाल का जवाब देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 10 साल की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि (Defect Liability Period) के तहत आता है। इस अवधि में यदि निर्माण से जुड़ी कोई तकनीकी खामी सामने आती है, तो उसकी मरम्मत की पूरी जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की होती है। उन्होंने बताया कि इसी अवधि के दौरान दो गड्ढों की पहचान की गई थी, जिन्हें ठेकेदार ने अपने खर्च पर ठीक कराया। इस मरम्मत पर सरकार का कोई खर्च नहीं आया।
हालांकि, गडकरी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जिन दो गड्ढों का उन्होंने जिक्र किया, क्या वे वही हैं जो शामली के पास वायरल वीडियो में दिखाई दिए थे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि गड्ढे बनने की वास्तविक वजह क्या थी।
NHAI ने बताई सड़क धंसने की वजह
इससे पहले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने सड़क धंसने की घटना पर सफाई देते हुए कहा था कि यह समस्या स्थानीय स्तर पर पानी भरने (Water Stagnation) और स्थायी क्रॉस-ड्रेनेज सिस्टम समय पर चालू न होने के कारण हुई।
NHAI के अनुसार, बारिश का पानी निकालने के लिए वहां बैलेंसिंग कल्वर्ट (Balancing Culvert) बनाया गया था। लेकिन स्थानीय लोग उसके मुहाने का इस्तेमाल वाहन निकालने के रास्ते के रूप में करने लगे। इसी वजह से ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह चालू नहीं हो पाया, जिससे पानी जमा हुआ और सड़क का हिस्सा प्रभावित हुआ।
12 हजार करोड़ की लागत से बना है एक्सप्रेसवे
करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अप्रैल 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह देश की महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय करीब 6 घंटे से घटकर केवल ढाई घंटे रह गया है।
इससे उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों, पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद सड़क धंसने और गड्ढों की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने भी इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। जबकि सरकार का कहना है कि दोष पाए जाने पर ठेकेदारों को कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार जवाबदेह बनाया जा रहा है।