Delhi Fire: जहां खाक हो गईं 21 जिंदगियां, वहां 'फरिश्ता' बनकर आए रियाजुद्दीन ने बचा लीं कई सांसें, बिछा दिए ₹2 लाख के गद्दे!
Malviya Nagar Hotel Fire: इस दर्दनाक हादसे ने 21 मासूम जिंदगियों को हमेशा के लिए छीन लिया, लेकिन मौत के इस तांडव के बीच इंसानियत और बहादुरी की एक ऐसी मिसाल भी देखने को मिली, जिसने सबका दिल जीत लिया। होटल की आग भले ही बुझ चुकी है, लेकिन अपनों को खोने वाले परिवारों के दिलों में लगी आग और रियाजुद्दीन जैसी इंसानियत की कहानी को दिल्ली कभी नहीं भूल पाएगी
Delhi Fire: 'फरिश्ता' बनकर आए रियाजुद्दीन ने बचा ली कई सांसें, बिछा दिए अपने 2 लाख के गद्दे!
बुधवार का वो दिन दिल्ली के मालवीय नगर के लिए एक ऐसा खौफनाक मंजर लेकर आया, जिसे याद कर आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। इलाके के 'होटल फ्लोरिस स्टे' में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया। चारों तरफ सिर्फ काला धुआं, जलती लपटें और जान बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते बेबस लोग थे। इस दर्दनाक हादसे ने 21 मासूम जिंदगियों को हमेशा के लिए छीन लिया, लेकिन मौत के इस तांडव के बीच इंसानियत और बहादुरी की एक ऐसी मिसाल भी देखने को मिली, जिसने सबका दिल जीत लिया।
मौत के साए में जब मसीहा बने रियाजुद्दीन
जब होटल के कमरों में फंसे लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे, तब उनके लिए रियाजुद्दीन नाम के एक शख्स फरिश्ता बनकर सामने आए। रियाजुद्दीन की होटल वाली गली के पास ही गद्दों की दुकान है।
जैसे ही उन्होंने देखा कि अंदर फंसे लोग जान बचाने के लिए बेबसी में खिड़कियों से नीचे कूद रहे हैं, उन्होंने एक पल भी नहीं गंवाया। रियाजुद्दीन ने नफे-नुकसान का कोई हिसाब नहीं लगाया और अपनी दुकान से '2 लाख रुपये' के गद्दे निकालकर तुरंत सड़क पर बिछा दिए।
NDTV से बातचीत में रियाजुद्दी ने बताया, "मेरी दुकान भले ही आज खाली हो गई है, लेकिन मुझे इस बात का ताउम्र सुकून रहेगा कि मैं 8 से 12 लोगों की जान बचा सका। गद्दों की वजह से ऊपर से कूदने वाले लोगों को गहरी चोटें नहीं आईं।"
रियाजुद्दीन पहले सिविल डिफेंस में काम कर चुके हैं, इसलिए उन्हें पता था कि ऐसे संकट के समय क्या करना चाहिए। उन्होंने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए खिड़कियों को तोड़ा और लोगों को सुरक्षित कूदने का रास्ता दिया। आज उनका बिजनेस भले ही खाली हो गया हो, पर उनके चेहरे पर इंसानी जान बचाने का जो सुकून है, वो अनमोल है।
इससे पहले मंसूर, जो इलाके के ही रहने वाले हैं और वहां कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं, ने बताया था कि ऐसा लगता है कि आग पहली मंजिल पर लगी थी। उन्होंने कहा, "लोग पहली मंजिल से कूदने लगे। फिर वे दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल से भी कूदने लगे। हम गद्दे ले आए और उन्हें नीचे बिछा दिया, ताकि वे उन पर गिर सकें।"
मंसूर ने बताया कि अंदर फंसे लोगों की मदद करने की कोशिश में उन्होंने अपने घर से इमारत की ओर एक रस्सी फेंकी। उन्होंने कहा, "एक महिला ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह उसे थाम नहीं पाई और जमीन पर गिर गई।"
हादसे का दर्दनाक सच: आंकड़े और आंसू
इस भयानक आग की चपेट में आने से कुल 21 लोगों की असमय मौत हो गई, जबकि 49 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मेहमानों की थी, जो हमारे देश आए थे। कुल 12 विदेशी नागरिकों ने इस हादसे में अपनी जान गंवाई।
इस आग ने कई हंसते-खेलते भारतीय परिवारों को भी उजाड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के नाम हैं: श्रुतिका बर्नवाल, तर्जनी अग्रवाल, वार्या अग्रवाल (पर्ल), झावेरी अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, कमला अग्रवाल, प्रेम लता अग्रवाल और मासूम जीविषा अग्रवाल।
इसी हादसे में एक परिवार को 8 लोगों की जान भी चली गई। विवके अग्रवाल ने अपने पिता के इलाज के लिए पूरे परिवार समेत दिल्ली में ही ठहरे हुए थे। पास की एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में उनके पिता जिंदगी और मौत से लड़ रहे थे। इसलिए उन्होंने इस होटल में दो कमरे में बुक किए हुए थे। लेकिन किसी को क्या पता था कि पूरा का पूरा परिवार इस हादसे की भेंट चढ़ जाएगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
प्रशासन और दमकल विभाग की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया था। रेस्क्यू किए गए 49 लोगों में से 8 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि बाकी घायलों का इलाज अभी भी चल रहा है।
होटल की आग भले ही बुझ चुकी है, लेकिन अपनों को खोने वाले परिवारों के दिलों में लगी आग और रियाजुद्दीन जैसी इंसानियत की कहानी को दिल्ली कभी नहीं भूल पाएगी।