Delhi Fire: 'भाई, शायद हम बच नहीं पाएंगे', आग में फंसे विवेक ने रिश्तेदार को किया था फोन, मालवीय नगर अग्निकांड में उजड़ा 8 लोगों का पूरा परिवार

Malviya Nagar Hotel Fire: गुरुग्राम के सेक्टर-46 स्थित उनके घर पर मातम पसरा हुआ है। पड़ोसी और रिश्तेदार अभी तक यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक ही परिवार के इतने लोग एक साथ दुनिया छोड़ गए। मृतकों में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजिनी, मां प्रेमलता, बेटियां जीविसा और वरिया समेत तीन अन्य रिश्तेदार शामिल हैं

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 1:08 PM
Delhi Fire: 'भाई, शायद हम बच नहीं पाएंगे' आग में फंसे विवेक ने अपने रिश्तेदार को किया था फोन, मालवीय नगर अग्निकांड में उजड़ा 8 लोगों का पूरा परिवार

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने गुरुग्राम के अग्रवाल परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया। अस्पताल में अपने पिता के इलाज के लिए कुछ दिनों के लिए होटल में ठहरा यह परिवार कभी घर वापस नहीं लौट सका। इस दर्दनाक हादसे में परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई।

गुरुग्राम के सेक्टर-46 स्थित उनके घर पर मातम पसरा हुआ है। पड़ोसी और रिश्तेदार अभी तक यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक ही परिवार के इतने लोग एक साथ दुनिया छोड़ गए। मृतकों में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजिनी, मां प्रेमलता, बेटियां जीविसा और वरिया समेत तीन अन्य रिश्तेदार शामिल हैं।

पिता के इलाज के लिए अस्पताल के पास ही लिए रूम


परिजनों के मुताबिक, विवेक अग्रवाल के पिता राधेश्याम अग्रवाल का पास के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। इसी वजह से विवेक ने अस्पताल के नजदीक रहने के लिए होटल में दो कमरे बुक किए थे, ताकि परिवार इलाज के दौरान उनके साथ रह सके।

पड़ोसी योगेंद्र सिंह ने बताया कि परिवार के सभी लोग बेहद मिलनसार थे। उन्होंने कहा, "हमें बताया गया है कि पोस्टमार्टम के बाद शव कल घर लाए जाएंगे। यह खबर सुनकर हर कोई सदमे में है।"

एक और पड़ोसी ने कहा कि विवेक और उनका परिवार पूरे इलाके में अच्छे स्वभाव के लिए जाना जाता था। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा।

'भाई, शायद हम बच नहीं पाएंगे।'

इस हादसे के बाद राधेश्याम अग्रवाल अपने पूरे परिवार में अकेले जिंदा बचे हैं और वो भी ICU में जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। रिश्तेदारों ने बताया कि विवेक की एक बेटी तो अपने दादा से मिलने के लिए बेंगलुरु से सिर्फ एक दिन पहले ही आई थी।

रिश्तेदार पुनीत गुप्ता ने बताया कि आग लगने के दौरान उनकी विवेक से फोन पर बात हुई थी। पुनीत के मुताबिक, विवेक ने घबराई हुई आवाज में कहा था, "भाई, शायद हम बच नहीं पाएंगे।" उन्होंने विवेक को गीला रूमाल मुंह पर रखने की सलाह दी, लेकिन हालात इतने खराब थे कि इससे भी कोई मदद नहीं मिली। जब तक परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

परिवार के करीबी रिश्तेदार प्रेम बंसल ने बताया कि होटल सिर्फ इसलिए चुना गया था क्योंकि वह अस्पताल के बेहद करीब था। परिवार चाहता था कि ICU में भर्ती राधेश्याम अग्रवाल के पास हर समय कोई न कोई मौजूद रहे। विवेक अग्रवाल एक मल्टीनेशनल कंपनी में डायरेक्टर रह चुके थे और गुरुग्राम में रहते थे।

पिता को देखने आए मामा, मौसी और मौसा की भी गई जान

इस हादसे में सिर्फ विवेक अग्रवाल का परिवार ही नहीं, बल्कि उनके रिश्तेदार भी आग की चपेट में आ गए। होटल में विवेक के मामा अशोक गोयल, उनकी मौसी कमला और उनके पति भी ठहरे हुए थे। डॉक्टरों ने परिवार को पहले ही बता दिया था कि राधेश्याम अग्रवाल की हालत गंभीर है। इसी वजह से परिवार के कई सदस्य दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि अस्पताल के बाहर एक और दुख उनका इंतजार कर रहा होगा।

एक रिश्तेदार ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि कई शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि सभी लोग बुरी तरह झुलस गए थे।

परिवार के लोगों ने होटल की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि होटल एक बेहद संकरी गली में स्थित था, जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आई होगी। उनका आरोप है कि वहां आग से बचने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आते थे।

बुधवार सुबह मालवीय नगर स्थित पांच मंजिला फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में आग लग गई थी। आग तेजी से पूरे भवन में फैल गई और कई लोग अंदर फंस गए। राहत और बचाव अभियान के दौरान 58 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन 21 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।

फिलहाल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि होटल में आग से सुरक्षा के जरूरी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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