Delhi Malviya Nagar Hotel Fire News: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके की एक तंग गली में बिना फायर NOC के चल रहे एक होटल में बुधवार (3 जून) को भीषण आग लग गई, जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं। मालवीय नगर के हौज रानी स्थित ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में सुबह करीब 8:30 बजे आग लगी और देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गई। इससे लोग स्तब्ध रह गए। कई स्थानीय लोगों सहित बचावकर्मी पांच मंजिला संकरी इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए मौके पर पहुंचे। घटना के समय इमारत में कई लोग सो रहे थे।
अधिकारियों ने बताया कि इमारत में एंट्री और एग्जिट का केवल एक ही गेट था। खिड़कियां स्थायी रूप से सील थीं। मेन गेट सेंसर से चलता था। इन सभी कारणों से मिलकर इमारत एक तरह से मौत का जाल बन गई थी। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 58 लोगों को होटल से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 21 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों में 9 भारतीय शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस अग्निकांड में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई घायल गंभीर हालत में हैं। यह हाल के वर्षों में शहर की आग लगने की सबसे भीषण घटनाओं में से एक है। मृतकों में अधिकांश मध्य एशियाई और अफ्रीकी देशों के हैं। उनके परिजनों का इलाज चंद दूरी पर स्थित मैक्स अस्पताल में किया जा रहा था, जिस वजह से वे होटल में ठहरे हुए थे।
लाल डोरा इलाका किसे कहते हैं?
जिस एरिया में आग लगी उसे लाल डोरा इलाका कहते हैं। लाल डोरा इलाके के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। लाल डोरा जैसे इलाके करीब सभी शहरों में होते हैं। इस इलाके का अंग्रेजों से खास कनेक्शन है। दरअसल, दिल्ली में लाल डोरा (Lal Dora) उन एरिया को कहा जाता है जो मूल रूप से गांवों की आबादी (Abadi Area) के लिए चिन्हित किए गए थे।
ब्रिटिश शासन ने 1908 में राजस्व नक्शों पर गांव की आबादी और कृषि भूमि को अलग दिखाने के लिए लाल रंग की रेखा खींची थी, जिसे 'लाल डोरा' नाम दिया गया। लाल डोरा एरिया में संपत्ति अक्सर अन्य इलाकों के मुकाबले सस्ती मिल जाती हैं। लेकिन इन इलाकों में जमीन खरीदने से पहले स्वामित्व (title), रजिस्ट्री और निर्माण की वैधता की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए।
लाल डोरा एरिया की बड़ी बातें
लाल डोरा एरिया मूल रूप से गांवों के रिहायशी इलाके थे। यहां खेती नहीं होती थी।
लंबे समय तक इन एरिया को कई नगर निगम भवन नियमों और भवन-नक्शा स्वीकृति प्रक्रियाओं से छूट मिली हुई थी।
दिल्ली के शहरी विस्तार के बाद इनमें से कई गांव 'अर्बन विलेज' (Urban Village) बन गए।
इन इलाकों में अक्सर संकरी गलियां, अनियमित निर्माण और संपत्ति के कानूनी दस्तावेजों से जुड़ी जटिलताएं देखने को मिलती हैं।
दिल्ली के कुछ प्रसिद्ध लाल डोरा/अर्बन विलेज एरिया
लाल डोरा और अवैध कॉलोनी में फर्क
दिल्ली के किसी पुराने गांव जैसे महरौली के भीतर जो मूल आबादी क्षेत्र था, वह लाल डोरा एरिया हो सकता है। वहीं, दूसरी ओर यदि किसी व्यक्ति या डेवलपर ने कृषि भूमि पर बिना स्वीकृत लेआउट प्लान के सैकड़ों प्लॉट काटकर बस्ती बसा दी, तो वह अवैध कॉलोनी कहलाएगी।