दिल्ली का मालवीय नगर तीन जून 2026 को कभी ना भूलने वाले एक दर्दनाक हादसे का गवाह बना। मालवीय नगर के हौजरानी में मौजूद फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में तीन जून को लगी आग में 22 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इस हादसे में 11 भारतीय और 11 विदेशी नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई। होटल में लगी आग के बाद स्थिति इतनी भयावह थी कि, इस छह मंजिला इमारत में फंसे लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर नीचे कूदने लगे थे।
मौत के बीच उम्मीद की कहानी
वहीं मालवीय नगर हादसे के दौरान एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें रोड पर बिछे गद्दों पर कूदकर करीब 12 से 15 लोगों ने अपनी जान बचाई। यह सूझबूझ का काम होटल के ठीक सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाज़ुद्दीन और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने किया था। उन्होंने न केवल घायलों को बाहर निकालने में मदद की, बल्कि कई लोगों को अस्पताल भिजवाने के लिए चादरें और जरूरी कपड़े दिए। हालांकि लोगों की जान बचाने में रियाजुद्दीन अंसारी को नुकसान भी उठाना पड़ा है। रियाजुद्दीन अंसारी ने मनीकंट्रोल से बात करते हुए उस हादसे के भयावह मंजर के बारे में हमें हर एक बात बताई।
रियाजुद्दीन मंसूरी ने मनीकंट्रोल से खास बातचीत की।
भयावह था आग लगने के बाद का मंजर
बता दें कि, इस हादसे के बाद गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन और उनके बेटे अरमान मंसूरी से मिलने भी लोग दूर-दूर से आ रहे हैं और उन्हें किसी हीरो की तरह उनके साथ अपनी तस्वीर खींचा रहे हैं। हम जब रियाजुद्दीन मंसूरी से मिलने पहुंचे तो कुछ लोग उनके साथ बारी-बारी से अपनी तस्वीर खींचा रहे थे। मनीकंट्रोल हिन्दी से बात करते हुए रियाजुद्दीन मंसूरी ने सबसे पहले हादसे के उस भयावह मंजर के बारे में बताया। उन्होंने कहा, तीन जून की सुबह करीब 8 से 8:15 बजे के बीच उनके एक पड़ोसी का फोन आया। पड़ोसी ने बताया कि उनकी दुकान के सामने बने 6 मंजिला गेस्ट हाउस में भीषण आग लग गई है। आग लगने की खबर मिलते ही मैंने अपने बेटे अरमान मंसूरी को वहां भेजा। जब अरमान ने आग की गंभीरता देखी, तो उसने तुरंत मुझे भी फोन कर वहां बुला लिया।
हौजरानी में मौजूद फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल, जहां 22 लोगों ने अपनी जान गंवा दी।
जान बचाने में ऐसे की लोगों की मदद
रियाजुद्दीन जब घटनास्थल पर पहुंचे, तब उनके साथ गांव के 7-8 युवक भी थे। गेस्ट हाउस के अंदर फंसे लोग चीख-चिल्ला रहे थे और मदद की गुहार लगा रहे थे। हालात को देखते हुए उन्होंने अपनी दुकान से रजाइयां और गद्दे निकालकर सड़क पर बिछा दिए। इसके बाद ऊपर फंसे लोगों से नीचे कूदने को कहा। पहले 7-8 लोग और फिर 12 से 15 अन्य लोग नीचे कूदे। गद्दों की वजह से उनकी जान बच गई, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। गेस्ट हाउस से कुल 45 लोगों को बाहर निकाला गया। इनमें से करीब 15 लोगों ने कूदकर अपनी जान बचाई थी। बाहर निकाले गए 45 लोगों में से 21 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि बाकी लोग गंभीर रूप से घायल थे।
रियाजुद्दीन बताते हैं, "जैसे ही होटल में आग लगी हमने अपनी दुकान के गद्दे सड़क पर बिछा दिए। आप समझिए की जितनी भी डेड बॉडी बाहर निकाली गई हैं उसके प्रयोग में ली गई सभी चादरें भी हमारी ही दुकान की थीं। होटल के भीतर से घायलों को भी हमने अपनी ही चादरों में रखकर बाहर निकाला। हमारा डेढ़ से दो लाख का नुकसान हुआ है। वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में बताया कि, फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस समय पर मौके पर पहुंच गए थे। उनका कहना है कि यदि फायर ब्रिगेड थोड़ी भी देर से आती, तो आग आसपास की इमारतों और दूसरे गेस्ट हाउस तक फैल सकती थी, जिससे नुकसान और ज्यादा बढ़ जाता।
"हमें पैसे नहीं, दुआएं चाहिए"
उन्होंने कहा कि जो कुछ भी किया, वह केवल इंसानियत के नाते किया। कई लोग उन्हें आर्थिक मदद देने के लिए फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने आम जनता से पैसे लेने से इनकार कर दिया है। रियाजुद्दीन मंसूरी ने कहा कि, "हमें लोगों से पैसे नहीं, सिर्फ उनकी दुआएं चाहिए। हम सरकार से अपील करते हैं कि, वह हमारी मदद करे ताकि हम अपना काम दोबारा शुरू कर सकें और फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।"
बातचीत के अंत में रियाजुद्दीन मंसूरी ने बताया कि, लोगों को बचाने के लिए अपनी दुकान से लगभग सारी नई बेडशीट और रजाइयों का कपड़ा प्रशासन को दे दिया। इससे उनकी दुकान का लगभग पूरा सामान खत्म हो गया। फिलहाल दुकान खाली है और वहां पुलिस तैनात है। अब तक उन्हें सरकार या स्थानीय विधायक सतीश उपाध्याय की ओर से किसी तरह की मदद या आश्वासन नहीं मिला है।