दिल्ली के सबसे बुजुर्ग 125 साल के वोटर को चुनाव आयोग का नोटिस, जानिए क्या है पूरा मामला

पुरानी दिल्ली के 125 साल के मुखिया 33 लाख से ज्यादा वोटरों वाली सूची में सबसे बुजुर्ग मतदाता बताए जा रहे हैं। इस लिस्ट में 80 और 90 साल की उम्र वाले कई बुजुर्ग भी शामिल हैं। इसी मामले में SIR के दौरान एन्यूमरेशन फॉर्म में दी गई जानकारी में अंतर मिलने पर मुखिया को भी नोटिस भेजा गया है।

अपडेटेड Sep 22, 2026 पर 2:43 PM
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दिल्ली की वोटर लिस्ट में 125 साल के एक वोटर का नाम सामने आया है, जो काफी चर्चा में है।

पुरानी दिल्ली के सदर बाजार इलाके के रहने वाले श्याम मुखिया का नाम वोटर लिस्ट से जुड़े एक मामले के चलते चर्चा में है। 125 साल के बताए जा रहे मुखिया का नाम उन लाखों वोटरों की लिस्ट में शामिल है, जिन्हें SIR के दौरान कुछ जानकारी को लेकर नोटिस भेजा गया है। अब इस मामले में नोटिस की वजह और आगे की प्रक्रिया को लेकर जानकारी सामने आई है।

मुखिया के नाम में मिली ये गड़बड़ी

दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी की वेबसाइट पर जारी नोटिस की लिस्ट में श्याम मुखिया का नाम भी शामिल है। सदर बाजार विधानसभा क्षेत्र के वोटर मुखिया के मामले में उनके खुद के नाम से जुड़ी जानकारी में अंतर बताया गया है। यानी वोटर लिस्ट में दर्ज जानकारी और SIR के दौरान दी गई जानकारी में कुछ मैच नहीं पाया गया। इसी वजह से उनके नाम को जांच के लिए चिन्हित किया गया और उन्हें नोटिस भेजा गया।

33 लाख से ज्यादा वोटरों को भेजा गया नोटिस


SIR के तहत दिल्ली में वोटरों की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद 33.13 लाख से ज्यादा नोटिस भेजे गए हैं। इन नोटिस की एक बड़ी वजह वोटरों की मौजूदा जानकारी का साल 2002 की पिछली SIR की जानकारी से मैच नहीं खाना बताया गया है। इस लिस्ट में अलग-अलग उम्र के लोग शामिल हैं। 80 और 90 साल की उम्र वाले कई बुजुर्ग वोटरों के नाम भी इसमें दर्ज हैं।

कई जाने-पहचाने लोगों के नाम भी शामिल

इस नोटिस वाली लिस्ट में सिर्फ आम वोटरों के नाम ही नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई जाने-पहचाने लोगों के नाम भी बताए गए हैं। इनमें राजनीति, न्यायपालिका, सरकारी सेवा और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं। पूर्व उप प्रधानमंत्री एल.के. आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू जैसे नाम भी इस प्रक्रिया में सामने आए हैं।

नोटिस मिलने के बाद भी नाम नहीं कटता

किसी वोटर को नोटिस मिलना अपने आप में उसका नाम वोटर लिस्ट से हटने का मतलब नहीं है। संबंधित वोटर को चुनाव पंजीकरण अधिकारी के सामने अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर वह अपनी जानकारी को सही साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी जमा कर सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारी मिली जानकारी और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करते हैं।

अभी वोटर लिस्ट को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज करने का काम चल रहा है। जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें 30 सितंबर तक अपना जवाब और जरूरी कागज जमा करने होंगे। इसके बाद जांच पूरी होने पर 4 नवंबर को नई फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी।

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