Delhi Protest: रात के अंधेरे में भी रिकॉर्डिंग करने वाले बॉडी कैमरों से लैस हुए दिल्ली पुलिस के जवान, समझिए क्या है तैयारी
दिल्ली में तैनात पुलिस जवान अपनी यूनिफॉर्म पर यह कैमरे पहने हुए दिखाई दिए। सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के जवान दीपक चौधरी ने इन कैमरों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि यह बॉडी कैमरे जवानों के साथ-साथ आम जनता और प्रदर्शनकारियों दोनों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं।
बॉडी कैमरों की यह तैनाती ऐसे समय में देखने को मिली है, जब कुछ ही दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों का अनिवार्य और लगातार इस्तेमाल करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए शनिवार 10 अक्टूबर को पूरी राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े और हाई-टेक इंतजाम किए गए हैं। इस बार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के जवान आधुनिक नाइट-विजन बॉडी-वॉर्न कैमरों (BWCs) से लैस नजर आ रहे हैं। यह विशेष बॉडी कैमरे जवानों की यूनिफॉर्म पर लगाए गए हैं, जो दिन के उजाले के साथ-साथ रात के घने अंधेरे में भी हाई क्वॉलिटी की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करने में सक्षम हैं।
यह कैमरे हमारी और जनता दोनों की सुरक्षा के लिए हैं: जवान ने समझाई उपयोगिता
ANI की एक एक्स पोस्ट में दिल्ली में तैनात पुलिस जवान अपनी यूनिफॉर्म पर यह कैमरे पहने हुए दिखाई दिए। सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के जवान दीपक चौधरी ने इन कैमरों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि यह बॉडी कैमरे जवानों के साथ-साथ आम जनता और प्रदर्शनकारियों दोनों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन या हाथापाई की स्थितियों में अक्सर दिल्ली पुलिस के ऊपर एकतरफा आरोप लगा दिए जाते हैं। ऐसे में यह बॉडी कैमरे निष्पक्ष सबूत के तौर पर काम करेंगे और यह साबित करेंगे कि पुलिस ने किसी के साथ कुछ गलत किया है या नहीं। यह कैमरे मौके पर होने वाली हर एक गतिविधि को लगातार रिकॉर्ड करेंगे।
दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की थी अनिवार्य बॉडी कैमरे लगाने वाली याचिका
बॉडी कैमरों की यह तैनाती ऐसे समय में देखने को मिली है, जब कुछ ही दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों का अनिवार्य और लगातार इस्तेमाल करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। 7 अक्टूबर को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन सांबरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को केंद्र सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन के रूप में विचार करने को कहा था। अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी कि इस मामले में ऐसा कोई कानूनी पेंच नहीं है जहां कोर्ट को निर्देश जारी करने की जरूरत पड़े। अदालत ने कहा था कि जब भी विधायिका की कोई मंशा होती है, वे वैधानिक प्रावधानों में नियम तय कर देते हैं।
#WATCH | Delhi Police personnel use body cameras on their uniform as they are deployed for security ahead of the CJP protest today. These body cameras work even in the dark.
A Police personnel says, "These body cams are to protect us and others. In situations of manhandling, allegations are levelled against Delhi Police. So, these body cams will prove whether we did anything to anyone or not. This will record eveything..." — ANI (@ANI) October 10, 2026
जुलाई में हुए प्रदर्शन का हवाला देकर दायर की गई थी याचिका
यह याचिका एडवोकेट चाहत राघव द्वारा भारत सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त, सीआरपीएफ के महानिदेशक और बीपीआरएंडडी के खिलाफ दायर की गई थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण में तैनात अधिकारियों के लिए कैमरे पहनना और उन्हें चालू रखना अनिवार्य किया जाए। साथ ही रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने, डेटा सुरक्षा और सबूत के तौर पर उसके इस्तेमाल के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जाए।
याचिका में जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर CJP और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के प्रदर्शनों का जिक्र किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के अधिकांश वीडियो आम जनता या राहगीरों के मोबाइल फोन से सामने आए थे, न कि किसी आधिकारिक पुलिस रिकॉर्डिंग सिस्टम से। याचिका में कहा गया था कि 21 जुलाई की घटनाओं में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों दोनों को चोटें आई थीं, जबकि 23 जुलाई की समीक्षा बैठक में आरएएफ के महानिरीक्षक (IG) ने कथित तौर पर माना था कि इस्तेमाल किए गए बल के कुछ तरीके तय मानकों के अनुरूप नहीं थे।
1,500 कैमरों के लिए टेंडर और कानूनी प्रावधानों की मांग
याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2020 की बॉडी-वॉर्न कैमरों से जुड़ी एडवाइजरी सिर्फ एक सिफारिश थी, जो अधिकारियों के लिए कैमरे चालू रखना अनिवार्य नहीं बनाती। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस द्वारा गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए लगभग ₹7.4 करोड़ की अनुमानित लागत से 1500 बॉडी कैमरों की खरीद के लिए निकाले गए टेंडर का भी जिक्र किया था, जिसमें प्रति कैमरा लागत करीब ₹49333 बैठती है।
याचिका में मांग की गई थी कि कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाए जिसे कोई जवान बदल न सके, साथ ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत प्रमाणीकरण और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों का पालन हो। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह कैमरे किसी भीड़ पर चेहरा पहचानने वाला जाल नहीं, बल्कि पुलिस और नागरिकों के बीच संवाद का एक पारदर्शी रिकॉर्ड हैं जो बैरिकेड के दोनों तरफ मौजूद लोगों की सुरक्षा करते हैं।
छावनी में तब्दील हुई दिल्ली: 25,000 जवान, मेट्रो पाबंदी और इंटरनेट बंद
शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले ही अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस और पैरामिलिट्री के लगभग 25,000 जवानों को तैनात किया गया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 120 से अधिक कंपनियां सुरक्षा में लगाई गई हैं। शनिवार सुबह 6:00 बजे से ही कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक समेत 30 से ज्यादा पॉइंट्स पर सख्त ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। दिल्ली की सभी सीमाओं पर गाड़ियों की सघन चेकिंग की जा रही है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर असर
सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बैन लागू है, नमो भारत के दो स्टेशन बंद हैं और ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में एहतियात के तौर पर 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। आपको बता दें कि यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है, जिसके विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन बुलाया गया है।