राजधानी दिल्ली में लगभग एक महीने से प्रदूषण की स्थिति खतरनाक है। दिल्ली की हवा में 'जहर' का स्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार को दिल्ली में कई जगह पर एक्यूआई रेड जोन में पहुंच गया। वहीं हालात ऐसे हैं कि अब लोगों को प्रदूषण को लेकर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। रविवार (9 नवंबर) को कुछ लोगों ने इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि दिल्ली में पॉल्यूशन गंभीर और खतरनाक लेवल पर पहुंच गया हैं, लेकिन GRAP के उपाय लागू नहीं किए गए हैं।
दिल्ली के कई इलाके रेड जोन में
दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता 400 से ऊपर जाने के बाद, शहर को रेड जोन में रखा गया। इसके अगले दिन कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इंडिया गेट की ओर मार्च करते हुए सरकार से प्रदूषण पर सख्त और असरदार नीतियां बनाने की मांग की। हालांकि, पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इंडिया गेट विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह नहीं है। अधिकारी देवेश कुमार महला ने बताया, “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नई दिल्ली में विरोध के लिए जंतर-मंतर तय है, इसलिए हमने प्रदर्शनकारियों से वहीं जाने को कहा। इसके बावजूद कई लोगों को हिरासत में लिया गया।”
इंडिया गेट पर करीब 30 मिनट तक प्रदर्शन चला, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अनुमति नहीं दी गई और पुलिस ने जबरन वहां से हटाया। पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को कई बार दोहराया है। उन्होंने इंडिया टुडे से कहा कि सरकार की ओर से पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश देना “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” है।
लोगों में दिखा काफी गुस्सा
एक प्रदर्शनकारी ने एएनआई से कहा, “वे सिर्फ डेटा सेंटरों पर पानी छिड़क रहे हैं… क्लाउड सीडिंग भी नाकाम रही। ये अस्थायी उपाय हैं, हमें स्थायी समाधान चाहिए। जनता भी चुप बैठी है, कई लोग सिर्फ देखने आए हैं, विरोध में आवाज़ नहीं उठा रहे।” वहीं, दिल्ली आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने माना कि प्रदूषण की समस्या नई नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि लोगों का सिस्टम पर भरोसा अब कम हो गया है। इंडिया टुडे से बात करते हुए भारद्वाज, जो खुद इंडिया गेट पर मौजूद थे, ने केंद्र सरकार पर “आंकड़ों में हेराफेरी” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जब भी प्रदूषण का स्तर चरम पर पहुंचता है, सरकार AQI केंद्रों से डेटा लेना बंद कर देती है।”