दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी शरजील इमाम को 10 दिन की अंतरिम जमानत दी है। उन्हें यह राहत अपने भाई की शादी में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल करने के लिए दी गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में शरजील इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में 20 से 30 मार्च तक अंतरिम जमानत मंजूर की है।
हाईकोर्ट ने सुनाया था ये फैसला
बता दें कि, इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने शरजील को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया। पिछले साल बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए भी शरजील ने जमानत मांगी थी लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट से उसे जमानत नहीं मिली थी। शरजील इमाम उन कई लोगों में शामिल हैं जिन पर फरवरी 2020 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी बड़ी साजिश का आरोप है। इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए रची गई एक पहले से तैयार और सोची-समझी साजिश का नतीजा थी।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस अरविंद कुमार और एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने रिकॉर्ड पर ऐसे पर्याप्त सबूत रखे हैं, जिनसे पहली नजर में यह लगता है कि दोनों कथित आपराधिक साजिश में शामिल थे। हालांकि, उसी समय अदालत ने इस मामले के पांच अन्य आरोपियों — गुलफिशा फतिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इन लोगों की भूमिका इमाम और खालिद से अलग दिखाई देती है।