नई दिल्ली, 21 सितंबर (PTI), दिल्ली (Delhi) के MCD स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अब एक खास अभियान चलाने की तैयारी है। नगर निगम ने एक महीने में 50 हजार नए स्टूडेंट्स के एडमिशन कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए शिक्षकों को हर शनिवार अपने इलाके में जाकर परिवारों से मिलने और उन्हें MCD (Municipal Corporation of Delhi) स्कूलों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। साथ ही, स्कूलों की सुविधाओं और बच्चों की पढाई से जुडी दूसरी जरूरतों पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।
हर शनिवार घर-घर पहुंचेगे शिक्षक
नए एडमिशन (Admission) के लिए शिक्षकों को हर शनिवार आसपास के इलाकों में जाकर परिवारों से मिलने को कहा गया है। इस दौरान वे पेरेंट्स को MCD स्कूलों में मिलने वाली पढाई और सुविधाओं के बारे में बताएंगे। अभियान में पेरेंट्स के साथ NGO और स्थानीय लोगों को भी जोड़ने की योजना है। शिक्षा विभाग को स्कूल चलो अभियान को भी और तेजी से चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
MCD ने शिक्षकों को इस अभियान से जोड़ने के लिए एक खास प्रोत्साहन भी रखा है। जो शिक्षक 75 नए बच्चों का दाखिला कराने में मदद करेंगे, उनके नाम नगर निगम शिक्षक पुरस्कार के लिए भेजे जा सकते हैं। इससे शिक्षकों को अभियान में ज्यादा सक्रिय होकर काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
स्कूलों में सुविधाएं सुधारने के लिए की ये तैयारी
बच्चों के दाखिले के साथ स्कूलों की मौजूदा सुविधाओं को बेहतर करने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों को ऐसे स्कूलों की पहचान करने को कहा गया है जहां मरम्मत की जरूरत है। इनमें कक्षाओं, शौचालय, बिजली और पानी से जुडे काम शामिल हैं। स्कूलों में सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों की कमी को दूर करने पर भी काम किया जाएगा।
स्पोर्ट्स और मिड-डे मील पर भी रहेगा फोकस
MCD स्कूलों में बच्चों को पढाई के साथ खेलों के बेहतर मौके देने की योजना पर भी काम हो रहा है। इसके लिए प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर खेल सुविधाएं विकसित करने और MCD मिनी लीग कराने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा बच्चों को साफ पानी, साफ शौचालय और बेहतर सफाई मिले, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। मिड-डे मील की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी।
MCD का यह अभियान सिर्फ नए बच्चों को स्कूल तक लाने के साथ स्कूल के माहौल को बेहतर बनाने और बच्चों को पढ़ाई के अलावा दूसरी गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए भी कोशिश की जा रही है। अब इस योजना को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है, यह देखना अहम होगा।