Diwali Gift for Farmers: दिवाली से पहले किसानों को बड़ा तोहफा! यूरिया की कीमतों में 10% की गिरावट, रबी सीजन में सप्लाई को लेकर आई गुड न्यूज
Diwali Gift for Farmers: दिवाली से पहले यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरा संकेत है। इसका सीधा फायदा किसानों को सस्ती बोरी के रूप में भले न मिले। लेकिन खाद की उपलब्धता और सरकारी सब्सिडी खर्च के लिहाज से यह अहम साबित हो सकता है
Diwali gift for farmers: अगस्त की तुलना में नए टेंडर में यूरिया की आयात कीमतों में करीब 10 फीसदी की कमी दिखाई दी है
Diwali gift for farmers: दिवाली से पहले किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसका फायदा भारत को रबी फसलों की बुवाई से पहले यूरिया का आयात अपेक्षाकृत कम कीमत पर करने के रूप में मिल सकता है। इससे एक ओर देश में खाद की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, दूसरी ओर सरकार के उर्वरक सब्सिडी पर होने वाले खर्च में भी कमी आ सकती है।
भारत में रबी सीजन के दौरान गेहूं, सरसों, चना और अन्य फसलों की बुवाई होती है। इस दौरान यूरिया की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का नीचे आना भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आयात की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा किसानों को यूरिया की बोरी सस्ती होने के रूप में नहीं मिलेगा, क्योंकि देश में यूरिया की खुदरा कीमत सरकार नियंत्रित करती है।
यूरिया आयात के लिए जारी किया गया 17 लाख टन का टेंडर
भारत की सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने रबी सीजन से पहले 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर जारी किया था। इसके तहत पश्चिमी तट के बंदरगाहों के लिए 10 लाख टन और पूर्वी तट के बंदरगाहों के लिए 7 लाख टन यूरिया खरीदने की योजना बनाई गई।
'दैनिक जागरण' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेंडर में पूर्वी तट के लिए यूरिया की सबसे कम बोली 352.10 डॉलर प्रति टन और पश्चिमी तट के लिए 356.25 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई। अगस्त में जारी किए गए पिछले टेंडर के दौरान कीमतें लगभग 390 से 394 डॉलर प्रति टन के दायरे में थीं।
इस तरह अगस्त की तुलना में नए टेंडर में यूरिया की आयात कीमतों में करीब 10 फीसदी की कमी दिखाई दी है। इससे संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। साथ ही भारत को खाद खरीदने के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल कीमतें मिल रही हैं।
जरूरत से तीन गुना से ज्यादा यूरिया की पेशकश
इंडियन पोटाश लिमिटेड के 17 लाख टन यूरिया आयात के टेंडर के जवाब में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने लगभग 53.5 लाख टन यूरिया की आपूर्ति के प्रस्ताव दिए। यह मात्रा भारत की ओर से मांगी गई मात्रा के तीन गुने से भी अधिक है। बड़ी संख्या में प्रस्ताव मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय खरीदारों को लेकर निर्यातकों के बीच प्रतिस्पर्धा का संकेत मिलता है।
जब किसी उत्पाद की आपूर्ति के लिए कई कंपनियां प्रस्ताव देती हैं, तो खरीदारों को बेहतर कीमतों पर सौदा करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कंपनियों की ओर से पेश की गई पूरी मात्रा की खरीद होना तय नहीं है। अंतिम खरीद टेंडर की शर्तों, कीमतों और संबंधित निर्णयों पर निर्भर करेगी।
किसानों को 242 रुपये में ही मिलेगी यूरिया की बोरी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया सस्ता होने के बावजूद किसानों को फिलहाल इसकी खुदरा कीमत में तत्काल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। भारत में 45 किलोग्राम यूरिया की एक बोरी की निर्धारित कीमत 242 रुपये है। नीम कोटिंग और लागू करों से संबंधित अतिरिक्त शुल्क अलग हो सकते हैं।
यूरिया की वास्तविक लागत और किसानों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच का अंतर सरकार सब्सिडी के माध्यम से वहन करती है।
इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें कम होती हैं, तो सरकार को आयात पर अपेक्षाकृत कम खर्च करना पड़ सकता है। इससे उर्वरक सब्सिडी के बजट पर दबाव कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, सरकार को वास्तविक बचत कितनी होगी, यह अंतिम खरीद कीमत, आयात की मात्रा, परिवहन, बंदरगाहों पर होने वाले खर्च और अन्य लागतों पर निर्भर करेगा।
इस साल वैश्विक बाजार में क्यों बढ़ी थीं यूरिया की कीमतें?
इस साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मध्य पूर्व में संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति को लेकर चिंताओं और अन्य उत्पादन एवं परिवहन संबंधी बाधाओं ने वैश्विक उर्वरक बाजार पर दबाव बढ़ाया था। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान यूरिया की कीमतें 959 डॉलर प्रति टन के स्तर तक पहुंच गई थीं। बाद में आपूर्ति की स्थिति में सुधार और बाजार की परिस्थितियों में बदलाव के कारण कीमतों में नरमी आने लगी।
चीन की निर्यात नीति में बदलाव भी वैश्विक बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहा। चीन घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर यूरिया के निर्यात पर प्रतिबंध सख्त करता है या उनमें नियंत्रित ढील देता है। निर्यात में ढील से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव कम होता है।
भारत में हर साल कितनी होती है यूरिया की जरूरत?
भारत में कृषि उत्पादन के लिए यूरिया सबसे महत्वपूर्ण नाइट्रोजन उर्वरकों में से एक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश ने वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 306.67 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया था। इसके बावजूद घरेलू मांग और उत्पादन के बीच अंतर को पूरा करने के लिए भारत को आयात पर भी निर्भर रहना पड़ता है।
रबी सीजन में यूरिया की समय पर उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। गेहूं और सरसों जैसी प्रमुख फसलों की शुरुआती बढ़वार से लेकर आगे के विकास तक नाइट्रोजन की जरूरत होती है। यदि बुवाई के समय खाद की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होती, तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों और सरकार के लिए क्या है इसका मतलब?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में गिरावट भारत के लिए दो तरह से राहत दे सकती है। पहला, अपेक्षाकृत कम कीमत पर आयात होने से खाद की खरीद लागत घट सकती है। दूसरा, सरकार के सब्सिडी खर्च में कमी आने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि रबी सीजन के दौरान उन्हें समय पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध हो। फिलहाल, कीमतों में आई नरमी को सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। लेकिन आयात की फाइनल कीमतों और वास्तविक आपूर्ति के आधार पर ही इसके पूरे प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।