पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर जश्न मना रहा है। हमारी सेनाओं ने न सिर्फ पाकिस्तान के हमलों को नाकाम किया। बल्कि पलटवार भी ऐसा किया कि बिना उनकी सीमा में घुसे उन्हें तबाही का ऐसा मंजर दिखाया है कि पाकिस्तान के हौसले पस्त हो गए। एक्सपर्ट्स को लग रहा है कि इस ऑपरेशन के कारण मंहगाई बढ़ती चली जाएगी। लेकिन खुशी की लहर देश के इस आंतरिक फ्रंट पर भी है। पीएम मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार ने ये सुनिश्चित किया है कि मंहगाई काबू में रहे। सरकार के लिए पीठ थपथपाने के लिए ये अच्छी खबर है कि अप्रैल 2025 में मंहगाई दर पिछले 6 साल में सबसे कम रही। मंहगाई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2025 में रिटेल मंहगाई दर 3.16 फीसदी तक पहुंच गई। ये जुलाई 2019 से अब तक 6 सालों की सबसे कम मंहगाई दर रही। ये आंकड़े साबित कर रहे है कि मंहगाई धीरे धीरे लगातार नीचे आ रही है।
UPA के दस साल की तुलना में मोदी सरकार के दस साल
वित्त वर्ष 2024-25 में रिटेल मंहगाई दर 4.6 फीसदी रही। ये 2018-19 के मुकाबले अब तक की सबसे कम मंहगाई दर रही। ये ताजा आंकड़े भी बता रहे हैं कि पिछले तीन साल में लगातार रिटेल मंहगाई दर में कमी आ रही है। यूपीए सरकार के दौर में मंहगाई दर 10 फीसदी तक जा पहुंची थी। यूपीए के दौर का ये संकट अब मोदी सरकार के लिए चिंता का विषय नहीं रहा है। ये कमाल है पीएम मोदी के सफल गवर्नेंस का और कीमतों को काबू में रखने के लिए पिछले एक दशक में उठायी गईं उनकी कोशिशों का।
2014 में जब से पीएम मोदी ने सत्ता संभाली है, रिटेल मंहगाई दर 8 फीसदी से आगे नहीं बढ़ी है। इसके विपरित यूपीए के दस साल के शासन काल में 2004-14 तक ये मंहगाई दर औसतन 8.1 फीसदी रही थी। और 2009-14 तक ये बढ़ कर 10.4 फीसदी तक जा पहुंची थी। यूपीए सरकार के दौरान जारी आंकड़ों पर मानें तो जनवरी 2012 से अप्रैल 2014 तक के 28 में से 22 महीनों में मंहगाई की दर 9 फीसदी रही और 10 से ज्यादा मंहगाई दर 9 बार से ज्यादा जा पहुंची थी।
खाने-पीने की चीजों की मंहगाई के आंकड़ों की तुलना करें तो पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 1999 से 2004 तक मंहगाई दर पर काबू करते हुए महज 2.2 फीसदी तक सीमित रखा था। जबकि यूपीए-1 के दौर में 2004-09 में ये 6.5 फीसदी तक जा पहुंची थी और यूपीए-2 के दौरान ये मंहगाई दर 11 फीसदी के हाई पर पहुंच गया था। लेकिन पीएम मोदी की अगुवाई में NDA सरकार ने मंहगाई दर औसतन 5.3 फीसदी तक ही सीमित रखी है। उधर तेल की मंहगाई दर यूपीए-2 के दौर मे 8.9 फीसदी रही तो एनडीए के 2014-24 यानि दस साल के शासन काल मे 4.4 फीसदी तक सीमित रखने में सफल रही।
सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से मंहगाई दर में राहत
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट करके कहा कि मोदी सरकार ने मंहगाई को काबू में रखने के लिए कई कदम उठाएं हैं। कोरोना काल में शुरू हुई पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन देने की समयसीमा 2029 तक के लिए बढ़ा दी गयी है। साथ ही भारत ब्रांड ने जनता को उचित कीमतों पर दालें मुहैया कराने के लिए नेफेड, एनसीसीएफ, केन्द्रीय भंडारों के माध्यम से बेच रही है।
अक्टूबर 2024 से भारत आटा की MRP 30 रुपये प्रति किलो और चावल 34 रुपये प्रति किलो के भाव से ही आम आदमी को मुहैया कराई जा रही हैं। दालों की कीमतों को लेकर बवाल मचता था तो मोदी सरकार ने भारत चना दाल की MRP 70 रुपये प्रति किलो, भारत चना की 58 रुपये प्रति किलो, भारत मूंग दाल 107 रुपये, भारत मसूर दाल 89 रुपये प्रति किलो के भाव से बेच रहे हैं।
प्राइस स्टैबलाइजेशन फंड के तहत दालों का एक बफर स्टॉक भी सरकार ने रखा है। और जब भी जरूरत पड़े इसे बाजार में उतारा जाता है ताकि इसकी उपलब्धता भी बनी रहे। उधर केंद्र सरकार ने केंद्र के कोटे से चावल और गेहूं खुले बाजार में बेचने की योजना के तहत काम कर रही है ताकि ये न सिर्फ बाजार में आसानी से उपलब्ध रहे बल्कि रिटेल कीमतों को भी काबू में रखा जा सके। मोदी सरकार ने एलपीजी सब्सिडी और सिलेंडर की कीमतों में कमी की है ताकि उज्जवला योजना के लाभार्थियों के साथ साथ रोजमर्रा इस्तेमाल करने वाले आम आदमी को भी इससे राहत पहुंचे। मार्च 9, 2024 को मोदी सरकार ने गैर सब्सिडी वाले 14.2 किलो के गैस सिलेंडरों की कीमतों मे 100 रुपए की कमी की थी। मार्च 2024 में ही पीएम मोदी की कैबिनेट ने एक टारगेटेड सब्सिडी योजना के तहत साल 2024-25 में उज्जवला के लाभार्थियों को मिलने वाले 14.2 किलो के सीलिंडरों में 300 रुपये की कमी की थी।
वित्त मंत्रालय ने भी कीमतों की काबू में रखने की पीएम मोदी की मुहिम में बखूबी अपना रोल निभाया। सभी मंत्रालयों से समन्वय कर वित्त मंत्रालय ने कृषि, खाद्य वस्तुएं, तेल, खाद सब्सिडी से लेकर उन तमाम चीजों पर आयात और निर्यात शुल्क लगाते रहे जिनसे आम आदमी पर असर पड़ रहा हो। जहां सब्सिडी की जरुरत रही, वहां वित्त मंत्रालय ने उचित फंड भी जारी किए ताकि कीमतों पर असर नहीं पड़े।