विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी जहाज 'IRIS डेना' (IRIS Dena) पर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो हमले के बाद बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत में ईरानी युद्धपोत IRIS लावन को शरण देने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी है। जयशंकर ने अपने भाषण में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का भी जिक्र किया और कहा कि, 'वह यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन लॉ ऑफ दी शी यानी UNCLOS और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करते हैं। लेकिन मानवीय आधार पर ईरान के जहाज को शरण देने का फैसला सही था, लेकिन वह गलत वक्त पर गलत जगह फंस गए।'
दिल्ली में रायसीना डायलॉग में बोलते हुए जयशंकर ने शनिवार को कहा, "मैं भी संयुक्त राष्ट्र के समुद्री और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का समर्थन करता हूं। हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि उनका एक जहाज जो उस समय शायद हमारी सीमा के करीब था, हमारे बंदरगाह पर आना चाहता था। उन्होंने बताया कि वे कुछ समस्याओं का सामना कर रहे हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि जब जहाज यहां से रवाना हुए थे और जब वो यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी। वो लोग अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे और फिर वो किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए।
रायसीना डायलॉग 2026 में बोलते हुए जयशंकर ने इंडियन ओशन रीजन (हिंद महासागर क्षेत्र) की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह इलाका इस समय रिकवरी और रीबिल्डिंग की बड़ी प्रक्रिया से गुजर रहा है। इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए देशों के बीच लगातार कूटनीतिक प्रयास और आपसी सहयोग बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि, इंडियन ओशन रीजन सिर्फ एक समुद्री इलाका नहीं है, बल्कि यह एक पूरा इकोसिस्टम है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई हिस्सों की तुलना में हिंद महासागर क्षेत्र अभी ज्यादा तेजी से पुनर्निर्माण और सुधार के दौर से गुजर रहा है। जयशंकर ने कहा कि इस क्षेत्र के अलग-अलग देश अपने-अपने स्तर पर विकास और सुधार की कोशिशें कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ-साथ पूरे रीजन में व्यापार के पुराने रास्तों को फिर से मजबूत करना और बेहतर कनेक्टिविटी बनाना भी बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, हिंद महासागर क्षेत्र में चल रहे इस बड़े बदलाव और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को समझना और पहचानना जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह का बड़ा बदलाव आसान नहीं होता। इसके लिए लंबे समय तक मेहनत, सहयोग और लगातार प्रयास करने पड़ते हैं। जयशंकर ने यह भी बताया कि पिछले लगभग दस सालों में भारत की कूटनीति ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग और विकास को बढ़ावा देने के लिए काफी निवेश और मेहनत की है। सरल शब्दों में, उन्होंने यह संदेश दिया कि हिंद महासागर क्षेत्र का भविष्य मजबूत बनाने के लिए देशों के बीच साझेदारी, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ाना बहुत जरूरी है, और भारत इस दिशा में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है।