El Nino and Monsoon update: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि अल नीनो (El Nino) की स्थिति का भारतीय मानसून पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। आमतौर पर अल नीनो के दौरान देश में मानसून सामान्य से कमजोर रहता है। हालांकि इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि अल नीनो कितना मजबूत है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि 1950 से अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी, जिनमें से 7 वर्षों में भारतीय मानसून सामान्य से कम रहा। इसके अलावा मानसून के दूसरे हिस्से, खासकर सितंबर महीने की बारिश पर अल नीनो का प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
सरकार ने बताया कि IMD नियमित रूप से मौसमी और मासिक बारिश एवं तापमान का पूर्वानुमान जारी करता है। 13 अप्रैल 2026 को जारी पहले चरण के दीर्घकालिक पूर्वानुमान (Long Range Forecast) में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा 92% लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके बाद जारी दूसरे चरण के पूर्वानुमान में इसे संशोधित कर 90% LPA कर दिया गया, जिसकी ±4% त्रुटि सीमा बताई गई।
IMD ने अपने मौसमी पूर्वानुमान में यह भी संकेत दिया था कि 2026 के मानसून के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है, ताकि केंद्र और राज्य सरकारें तथा अन्य संबंधित एजेंसियां पहले से तैयारी कर सकें।
रोजाना और मासिक आधार पर जारी होती हैं अपडेट
सरकार ने बताया कि IMD मानसून के दौरान हर दिन वर्षा की स्थिति और हर महीने अल नीनो की स्थिति से जुड़े अपडेट जारी करता है। इसके अलावा जिला और ब्लॉक स्तर तक वर्षा संबंधी जानकारी विभिन्न विभागों और राज्य सरकारों को उपलब्ध कराई जाती है।
IMD नियमित रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), गृह मंत्रालय (MHA) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (MoAFW) की बैठकों में भी भाग लेकर मौसम संबंधी जानकारी साझा करता है। वहीं कृषि मंत्रालय के क्रॉप वेदर वॉच कार्यक्रम के तहत हर सप्ताह बीते समय की वर्षा और अगले दो सप्ताह के वर्षा पूर्वानुमान की जानकारी भी दी जाती है।
कृषि और जल प्रबंधन पर भी नजर
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) ने बताया कि वह 2026 के मौसमी, अल्पकालिक और मध्यम अवधि के पूर्वानुमानों के आधार पर कृषि और बांध प्रबंधन विभागों के साथ मिलकर अल नीनो और वर्षा के संभावित प्रभावों का आकलन कर रहा है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादन और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता देना है।
जिला-स्तरीय जोखिम आकलन जारी नहीं किया गया
सरकार ने स्पष्ट किया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2026 के दौरान अल नीनो के प्रभाव से निपटने के लिए राज्यों को कोई जिला-वार जोखिम एवं प्रभाव आकलन अध्ययन या अलग से दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं। हालांकि, IMD नियमित रूप से मौसम पूर्वानुमान, मौसमी आउटलुक, भारी बारिश, लू और अन्य चरम मौसम घटनाओं से जुड़े अलर्ट जारी करता है।
ये सभी सूचनाएं केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित एजेंसियों को भेजी जाती हैं, ताकि समय रहते आवश्यक तैयारियां और राहत संबंधी कदम उठाए जा सकें। यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।