El Nino Effect: भारत में इस साल कमजोर मानसून और मजबूत होते अल नीनो का असर अब आगामी रबी फसलों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार (7 अक्टूबर) को मौद्रिक नीति के फैसले के दौरान कहा कि कमजोर मानसून के साथ मजबूत अल नीनो आगामी रबी सीजन को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान RBI गवर्नर ने कहा कि कमजोर और असमान मानसून के बीच El Nino की स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए जोखिम बढ़ा रही है। इसका असर आगामी रबी फसल की बुआई और उत्पादन पर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जलाशयों का स्तर और सरकार की ओर से अलग-अलग फसलें उगाना तथा जल संरक्षण जैसे कदम इस जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।
मानसून के दौरान चौथी बार सबसे कम बारिश
भारत में जून से सितंबर के बीच इस साल 87.4 प्रतिशत बारिश हुई, जो 2001 के बाद मानसून के मौसम में चौथी सबसे कम बारिश है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने हाल ही में बताया था कि इस मानसून में बारिश की कमी का एक प्रमुख कारण प्रशांत क्षेत्र में जून में उभरी अल नीनो की स्थिति थी, जो उसके बाद से मजबूत होती गई। आईएमडी ने कहा कि फिलहाल अल नीनो की स्थिति मजबूत है। इसके मार्च 2027 तक बने रहने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, इस मानसून देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिलीमीटर होती है। यह सामान्य से 13 प्रतिशत कम है। आईएमडी ने 29 मई को जारी मानसून के पूर्वानुमान में कहा था कि बारिश90 प्रतिशत रह सकती है, जिसमें चार प्रतिशत की मॉडल त्रुटि थी। इससे पहले 13 अप्रैल को विभाग ने मानसून में 92 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था।
अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) नामक जलवायु घटना के तीन चरणों में से एक है। इसका पृथ्वी पर गर्म प्रभाव पड़ता है। इसे भारत में कम मानसूनी बारिश से जोड़ा जाता है। इसके विपरीत चरण ला-नीना का आमतौर पर ठंडा प्रभाव पड़ता है। ईएनएसओ की एक तटस्थ स्थिति भी होती है। मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष बारिश की कमी जून में सबसे अधिक 35.4 प्रतिशत रही। इसके बाद अगस्त में 16.3 प्रतिशत और सितंबर में 7.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जुलाई ही एकमात्र ऐसा महीना रहा, जब सामान्य से अधिक बारिश हुई। इस दौरान एक प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
आईएमडी के महानिदेशक मौसम विज्ञान डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने एक बयान में कहा कि यदि कम दबाव की प्रणालियों के कारण अतिरिक्त बारिश नहीं हुई होती तो देश में बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी। उन्होंने कहा कि इस मौसम में 14 कम दबाव की प्रणालियां बनीं और कुल 77 दिन कम दबाव की प्रणालियां सक्रिय रहीं। जबकि सामान्य तौर पर यह अवधि 57 दिन होती है। मानसून की वापसी के बारे में महापात्र ने कहा कि अब तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से मानसून की वापसी हो चुकी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट चुका है।
El Nino क्यों बढ़ा रहा है चिंता?
अल नीनो की वजह से भारत में मानसूनी बारिश प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है। भारत सरकार के अनुसार, 2026 के दौरान El Nino जून में कमजोर था। लेकिन जुलाई में यह मध्यम स्थिति तक पहुंच गया था और अक्टूबर-दिसंबर के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना जताई गई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत El Nino के कारण सर्दियों का मौसम भी अपेक्षाकृत गर्म रह सकता है। इसका असर गेहूं, सरसों, चना, मसूर, मटर, आलू, प्याज और मसालों जैसी रबी फसलों पर पड़ सकता है।
महंगाई पर भी पड़ सकता है असर
RBI की चिंता केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है। यदि रबी फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है तो आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। कमजोर मानसून पहले ही खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा कर चुका है। इसी बीच RBI ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया।
केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख भी 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है। RBI गवर्नर ने साफ तौर पर आगाह किया है कि कमजोर मानसून+ मजबूत El Nino का असर अब सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका सीधा असर रबी उत्पादन, खाद्य कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।