El Nino Risks: अगस्त में अल नीनो बढ़ा सकता है मुश्किलें! बारिश का घाटा 12% पर आया पर ये रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली

El Nino Impact: आने वाले दिनों के मौसम और मानसूनी चाल को लेकर दौलत Capital ने कहा है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का निकट भविष्य का आउटलुक मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश की ओर इशारा करता है। हालांकि मजबूत होता अल नीनो और लगभग न्यूट्रल इंडियन ओशन डिपोल (IOD) अगस्त के महीने में पूरे सीजन के व्यापक जोखिम को बनाए हुए हैं

अपडेटेड Aug 04, 2026 पर 2:28 PM
El Nino impact: देश में मानसूनी बारिश में सुधार के चलते कुल बारिश का घाटा घटकर 12 प्रतिशत पर आ गया है

El Nino impact: देश में मानसूनी बारिश में सुधार के चलते कुल बारिश का घाटा घटकर 12 प्रतिशत पर आ गया है। इसके साथ ही जलाशयों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। रिपोर्टस के मुताबिक आने वाले समय में मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जगी है। इतने सारे पॉजिटिवि बदलाव दिखने के बावजूद अगस्त महीने में अल नीनो का बढ़ता खतरा देश के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। एएनआई के मुताबिक फाइनेंशियल फर्म दौलत कैपिटल की एक रिपोर्ट में मानसूनी बारिश, अल नीनो के जोखिम और खरीफ फसलों की बुआई को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।

बारिश के कवरेज में सुधार, लेकिन वितरण को लेकर बढ़ी चिंता

दौलत कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक देश में कम बारिश वाले क्षेत्रों की हिस्सेदारी पिछले सप्ताह के 40 प्रतिशत से घटकर अब 36 प्रतिशत रह गई है। बेहद कम बारिश दर्ज करने वाले क्षेत्र शून्य बने हुए हैं। अत्यधिक बारिश पाने वाले इलाकों की हिस्सेदारी में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले सप्ताह के महज 1 प्रतिशत से बढ़कर अब 11 प्रतिशत पर पहुंच गया है। देश में सामान्य बारिश वाले क्षेत्रों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है और यह 57 प्रतिशत से घटकर 51 प्रतिशत पर आ गई है।


रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बारिश के आंकड़ों में आया यह सुधार कम बारिश वाले क्षेत्रों के सामान्य होने से नहीं बल्कि कुछ खास इलाकों में बहुत अधिक बारिश होने की वजह से आया है। इसका मतलब यह है कि देश भर में बारिश का वितरण समान रूप से होने के बजाय कुछ हिस्सों में बहुत तेज और अत्यधिक बारिश दर्ज की गई है।

अगस्त में अल नीनो का खतरा और IMD का पूर्वानुमान

आने वाले दिनों के मौसम और मानसूनी चाल को लेकर दौलत Capital ने कहा है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का निकट भविष्य का आउटलुक मध्य और पश्चिमी भारत में सामान्य से अधिक बारिश की ओर इशारा करता है। हालांकि मजबूत होता अल नीनो और लगभग न्यूट्रल इंडियन ओशन डिपोल (IOD) अगस्त के महीने में पूरे सीजन के व्यापक जोखिम को बनाए हुए हैं।

क्या है अल-नीनो और IOD? समझिए मौसम का गणित

मौसम के इस चक्र और मानसून पर इसके प्रभाव को समझने के लिए दोनों स्थितियों का अंतर जानना जरूरी है। अल-नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह के पानी के गर्म होने का एक जलवायवीय पैटर्न है। भारत में इसका सीधा संबंध कमजोर मानसून और भीषण गर्मी से होता है। IOD उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर (Indian Ocean) के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों की समुद्री सतह के तापमान का अंतर है। जब पॉजिटिव IOD बनता है तो इससे मानसून की हवाएं मजबूत होती हैं जो देश में बेहतर और झमाझम बारिश में मदद करती हैं।

खरीफ फसलों की बुआई का हाल: तिलहन में बढ़त, चावल पिछड़ा

बारिश के इस बदलते रुख के बीच देश में खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार भी आगे बढ़ी है। 31 जुलाई तक देश में कुल खरीफ बुआई का रकबा 894.2 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो कि वर्ष 2025 की समान अवधि में 920.7 लाख हेक्टेयर था। हालांकि पिछले साल की तुलना में बुआई का अंतर कम हुआ है, लेकिन अलग-अलग फसलों के रुझान मिले-जुले रहे हैं।

पूरे सीजन में पिछड़ने के बाद तिलहन की बुआई में सबसे शानदार वापसी देखी गई है और यह पिछले साल के आंकड़े से आगे निकल गई है। तिलहन का रकबा बढ़कर 172.3 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 171.1 लाख हेक्टेयर था। इस तरह पिछले सप्ताह के 3.4 लाख हेक्टेयर के घाटे से उबरकर अब इसमें 1.2 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़त दर्ज हुई है। मोटे अनाज की बुआई ने भी पिछले साल के अंतर को काफी हद तक पाट लिया है। हाल के हफ्तों में रफ्तार पकड़ने के संकेत देने के बाद चावल की बुआई की गति पिछले साल के मुकाबले थोड़ी और पीछे छूट गई है। दालों की बुआई में केवल मामूली सुधार दर्ज किया गया है जबकि गन्ने के रकबे में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वह स्थिर बना हुआ है।

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