EL Nino Impact: यूपी से महाराष्ट्र तक उन 12 राज्यों की लिस्ट जहां असर डालेगा अल-नीनो, IMD के जून एंड फोरकास्ट में क्या आएगा?

El Nino Impact: कृषि सचिव अतीष चंद्रा ने एक विशेष इंटरव्यू में बताया कि सरकार जून के अंत में आने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नए पूर्वानुमान का इंतजार कर रही है। इसके बाद अल-नीनो को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी और अंतिम रणनीति तय की जाएगी

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 5:03 PM
El Nino Impact: देश के करीब 12 राज्यों में अल नीनो का निगेटिव असर पड़ सकता है

El Nino Impact: जून के महीने में मानसून की सुस्त पड़ती रफ्तार के बीच देश के कृषि क्षेत्र पर अल-नीनो का साया मंडराने लगा है। उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक देश के 12 राज्यों पर इसका सबसे गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इस संभावित संकट से निपटने और खरीफ फसलों को बचाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय पूरी तरह सतर्क हो गया है।

इस बीच कृषि सचिव अतीष चंद्रा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में बताया कि सरकार जून के अंत में आने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नए पूर्वानुमान का इंतजार कर रही है। इसके बाद अल-नीनो को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी और अंतिम रणनीति तय की जाएगी।

यूपी से महाराष्ट्र तक, ये अल-नीनो से प्रभावित होने वाले 12 राज्यों की लिस्ट


कृषि मंत्रालय ने मुख्य रूप से वर्षा आधारित कृषि वाले उन 12 राज्यों की पहचान की है जहां अल-नीनो का सबसे गंभीर और प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है। इन राज्यों के नाम यहां नीचे दिए गए हैं:-

उत्तर प्रदेश

बिहार

झारखंड

मध्य प्रदेश

महाराष्ट्र

राजस्थान

गुजरात

ओडिशा

आंध्र प्रदेश

तेलंगाना

कर्नाटक

तमिलनाडु

326 जिले हाई-रिस्क पर, तैयार हो रहा है स्पेशल एक्शन प्लान

कृषि सचिव अतीष चंद्रा के मुताबिक इन 12 प्रभावित राज्यों के भीतर 326 जिलों की पहचान हाई-रिस्क के रूप में की गई है। इन सभी जिलों के लिए विशेष जिला-स्तरीय कार्य योजनाओं को अपडेट किया जा रहा है। मौसम के इस गंभीर पूर्वानुमान को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सक्रिय सहयोग से आकस्मिक योजनाओं में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। वर्षा आधारित क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें जैसे तिलहन, ऑयल पाम, दलहन और कपास के मिशनों की गहन समीक्षा की जा रही है।

IMD के जून एंड फोरकास्ट में क्या आएगा?

कृषि सचिव ने साफ किया कि अल-नीनो के भारत में दाखिल होने की सटीक टाइमलाइन को लेकर अभी अंतिम अनुमान आना बाकी है। IMD इस जून के अंत तक अपना नया विस्तृत पूर्वानुमान जारी करेगा। तब तक देश में खरीफ की बुवाई का सीजन अपने चरम पर होगा, जिससे यह समझने में आसानी होगी कि यह सीजन आगे कैसा रहने वाला है। अब तक के व्यापक अनुमानों के अनुसार अल-नीनो के नवंबर के आसपास सक्रिय होने की बात कही गई है, लेकिन आईएमडी अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले अधिक सटीकता और निश्चितता की तलाश में है।

मानसून ट्रैकर: 4 से 5 दिन की देरी से चल रही है रफ्तार

मौसम विभाग ने जून से सितंबर की अवधि के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून के दीर्घकालिक औसत के लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। ये सामान्य से कम बारिश के सीजन का संकेत है। अभी मानसून अपनी तय समय-सारणी से 4 से 5 दिन पीछे चल रहा है।

उत्तर भारत में सक्रिय एक पश्चिमी विक्षोभ को मानसून की आगे की प्रगति में बाधा माना गया है। पश्चिम बंगाल के ऊपर बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के कारण मानसून पूरब की ओर से आगे बढ़ रहा है। इसकी दक्षिणी शाखा जो महाराष्ट्र में आगे बढ़ने वाली थी, वह अभी भी पीछे चल रही है।

कृषि सचिव ने बताया कि तमिलनाडु को छोड़कर (जहां मुख्य रूप से लौटते मानसून से बारिश होती है) जिन राज्यों में मानसून पहुंच चुका है, वहां अब तक अच्छी बारिश दर्ज की गई है।

IOD का न्यूट्रल होना बढ़ा रहा है चिंता

अल-नीनो के असर को तय करने में हिंद महासागर द्विध्रुव' (Indian Ocean Dipole - IOD) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मई के महीने में सकारात्मक रहने के बाद, जून में IOD न्यूट्रल हो गया है। कृषि मंत्रालय इस पर लगातार नजर बनाए हुए है। आमतौर पर एक पॉजिटिव IOD अल-नीनो के बुरे प्रभाव को बेअसर कर देता है। न्यूट्रल या नेगेटिव IOD होने पर अल-नीनो मानसून को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। आईएमडी अभी भी आशान्वित है कि समुद्र में कुछ ऐसे बदलाव होंगे जो अल-नीनो के प्रभाव को कम कर देंगे।

सरकार की तैयारी: खाद और पानी का क्या है हाल?

कृषि सचिव ने देश के किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अल-नीनो से घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ 2014-15 को छोड़कर अल-नीनो भारत को कभी भी बहुत गंभीर रूप से प्रभावित नहीं कर पाया है। उस साल भी कृषि उत्पादन मजबूत रहा था। अब भारत के पास जलवायु-अनुकूल बीजों की उन्नत किस्में मौजूद हैं। देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में बेहतर है। चिंतित करने वाली बात केवल बिना सिंचाई वाले क्षेत्र हैं, सिंचित क्षेत्र सुरक्षित हैं।

भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत 75000 तालाबों का जीर्णोद्धार किया है और 1 लाख से अधिक भूजल रिचार्ज संरचनाओं को पुनर्जीवित किया है। देश में उर्वरकों की आपूर्ति पूरी तरह पर्याप्त है। बड़े किसानों ने मार्च-अंतिम और अप्रैल की शुरुआत में ही स्टॉक खरीद लिया था, जबकि छोटे किसान जरूरत के वक्त खरीदते हैं। जमीन पर खाद की उपलब्धता पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है।

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