सितंबर तक मजूबत हो जाएगा El Nino, मानसून से लेकर इकॉनमी सबपर होगा असर! इस बीच IMD डीजी ने बताया क्या है तैयारी

El Nino Forecast: देश के मौसम विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा ने कहा है कि इस महीने की शुरुआत में प्रशांत महासागर में शुरू हुई अल नीनो की स्थिति के और तेज होने की उम्मीद है। सितंबर के आखिर तक इसके मजबूत होने और मानसून सीजन के बाद भी बने रहने की आशंका है

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 2:05 PM
El Nino Forecast: मौसम विभाग ने बताया कि सितंबर तक मजबूत होगा। लेकिन अल नीनो, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है

El Nino Forecast: प्रशांत महासागर में इस महीने की शुरुआत में एक्टिव हुआ अल नीनो मौसमीय प्रभाव सितंबर के अंत तक और मजबूत हो सकता है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। मौसम विभाग के मुताबिक, सरकार और संबंधित एजेंसियां पहले से ही जरूरी तैयारियां कर रही हैं।

IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा (Dr. Mrutyunjay Mohapatra)  ने बताया कि जुलाई, अगस्त और सितंबर की शुरुआत तक मध्यम स्तर का अल नीनो रहने की आशंका है। जबकि सितंबर के अंत तक इसके मजबूत होने के संकेत हैं। यह स्थिति मानसून के बाद भी जारी रह सकती है।

अल नीनो इफेक्ट


अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है। साथ ही बारिश के पैटर्न में बदलाव आता है। भारत में इसका असर मानसून पर पड़ सकता है। इससे कृषि क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका रहती है। हालांकि, डॉ. महापात्रा ने कहा कि समय रहते चेतावनी और तैयारी से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने भी एल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए राज्यों को विशेष निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कम बारिश वाले क्षेत्रों में बीज, जल संरक्षण, नमी प्रबंधन और वैकल्पिक फसल योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

घबराने की जरूरत नहीं!

मौसम विभाग के अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि देश के जलाशयों में इस समय सामान्य से बेहतर जल भंडारण है, जिससे खरीफ फसलों को लाभ मिलेगा।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एल नीनो का असर कृषि उत्पादन, खाद्य महंगाई और आर्थिक विकास दर पर पड़ सकता है। विशेष रूप से तिलहन, दालें, खाद्य तेल और कपास जैसी कम सिंचित फसलें अधिक प्रभावित हो सकती हैं।

इस राज्यों में कम बारिश की आशंका

IMD के अनुसार गुजरात, राजस्थान, मध्य भारत, ओडिशा, उत्तर आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं अपेक्षाकृत कम होने के कारण बारिश की कमी का असर अधिक महसूस किया जा सकता है।

मौसम विभाग ने यह भी बताया कि नई टेक्नोलॉजी और आधुनिक पूर्वानुमान सिस्टम के कारण मौसम की भविष्यवाणी पहले की तुलना में काफी सटीक हुई है। 2021 से 2025 के दौरान दीर्घकालिक पूर्वानुमान की त्रुटि घटकर केवल 2.2 प्रतिशत रह गई है, जो पहले 7.5 प्रतिशत थी। IMD का कहना है कि सतर्कता और समय पर तैयारी के साथ अल नीनो की चुनौती का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

वर्तमान स्थित

भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल अल नीनो की स्थितियां बनी हुई हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इनके और मजबूत होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि पर वायुमंडल ने प्रतिक्रिया दी है। महासागर-वायुमंडल की जॉइंट सिस्टम अब अल नीनो स्थितियों के अनुरूप विशेषताएं दिखा रही है।

IMD ने कहा, "मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम’ (एमएमसीएफएस) के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की स्थितियां और मजबूत होंगी।" इससे पहले अल नीनो की स्थितियां 2023 में विकसित हुई थीं।

ये स्थितियां 2000 के बाद 2002, 2009 और 2015 में भी बनी थीं। अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है, जिसका असर दुनिया के मौसम और भारत के मानसून पर पड़ सकता है।

ओडिशा सरकार एक्टिव

ओडिशा सरकार ने अल नीनो के संभावित प्रभावों को लेकर शनिवार को लोगों से कहा कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है> किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सभी आवश्यक वैकल्पिक योजनाएं तैयार की हुई हैं।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा अल नीनो को राज्य के समक्ष प्रमुख चुनौतियों में से एक बताए जाने के बाद इसके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो आमतौर पर सामान्य से कम बारिश, अधिक तापमान, लंबे शुष्क दौर और सूखे जैसी परिस्थितियों से जुड़ा होता है।

हालांकि , राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने विश्वास जताया कि इस बारिश मानसून में राज्य में सामान्य बारिश होगी। मानसून शुक्रवार को राज्य के कुछ हिस्सों में दस्तक दे चुका है। पिछले दो वर्षों में विभाग की उपलब्धियों पर आधारित एक पुस्तिका और वीडियो जारी करते हुए पुजारी ने किसानों से संभावित मौसमीय प्रभाव को लेकर चिंतित न होने की अपील की।

कृषि मंत्री ने कहा कि ओडिशा में सामान्य मानसूनी वर्षा औसतन 1,452 मिलीमीटर है। उन्हें उम्मीद है कि इस वर्ष भी वर्षा इसी स्तर के आसपास रहेगी। इस बीच, विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए भूमि प्रशासन, भ्रष्टाचार नियंत्रण और जनसेवा वितरण में विफलता का आरोप लगाया।

अल नीनो की बड़ी बातें

अल नीनो क्या है?

अल नीनो एक जलवायु (Climate) घटना है। इसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का सतही पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह ENSO (El Niño Southern Oscillation) चक्र का गर्म चरण है। आमतौर पर हर 2 से 7 साल के बीच अल नीनो विकसित हो सकता है। इसका प्रभाव लगभग 9–12 महीनों तक रह सकता है। इससे प्रशांत महासागर की व्यापारिक (Trade) हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे गर्म पानी पूर्वी प्रशांत की ओर फैल जाता है और समुद्र का तापमान बढ़ जाता है।

भारत पर प्रभाव से नुकसान

मानसून कमजोर पड़ सकता है।

वर्षा सामान्य से कम हो सकती है।

सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

दुनिया पर प्रभाव

वैश्विक तापमान बढ़ता है।

कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक वर्षा हो सकती है।

हीटवेव, जंगल की आग और मौसम की चरम घटनाएँ बढ़ सकती हैं।

ला नीना से ये कितना है अलग?

अल नीनो के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से गर्म होता है।

ला नीना के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से ठंडा रहता है।

ला नीना अक्सर भारत में बेहतर मानसून से जुड़ी होती है।

ये भी पढ़ें- TV Actress Sanchita Ugale Suicide: कौन थीं संचिता उगले? Kumkum Bhagya एक्ट्रेस ने सिर्फ 30 साल की उम्र में दे दी जान! पढ़ें- संघर्षशील अभिनेत्री की अधूरी कहानी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।