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El Nino update: 40% कम बारिश और अल नीनो का डबल अटैक! 11 साल पुराना रिकॉर्ड टूटेगा क्या? समझिए खेती पर असर कितना

El Nino update: फसलों पर मानसून के असर को लेकर पी.के. सिंह ने बताया कि मौसम विभाग से मिले आंकड़ों और पूर्वानुमानों के आधार पर हर जिले के लिए अलग-अलग आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य कम बारिश या सूखे जैसी परिस्थितियों में किसानों और खेती को नुकसान से बचाना है

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Jun 23, 2026 पर 10:22 PM
El Nino update: 40% कम बारिश और अल नीनो का डबल अटैक! 11 साल पुराना रिकॉर्ड टूटेगा क्या? समझिए खेती पर असर कितना
El Nino : भारत इस साल मौसम की बड़ी चुनौती का सामना करने जा रहा है।

भारत इस साल मौसम की बड़ी चुनौती का सामना करने जा रहा है। प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है और यह साल के अंत तक बनी रह सकती है। इस बार अलनीनो के प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। ऐसे में इस बार ज्यादा पानी चाहने वाली फसलों पर प्रभाव पड़ सकता है. पानी की कमी से उत्पादन पर भी काफी असर पड़ सकता है। ऐसे में देश में सूखे जैसे हालात भी बन सकते हैं। वहीं मंगलवार को कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने कहा कि भारत ने मानसून में देरी या संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली है। इसके तहत जिला स्तर पर विशेष आपातकालीन योजनाएं बनाई गई हैं और देश में पर्याप्त मात्रा में अनाज का भंडार भी मौजूद है।

फलसों पर क्या पड़ेगा असर?

फसलों पर मानसून के असर को लेकर पी.के. सिंह ने बताया कि मौसम विभाग से मिले आंकड़ों और पूर्वानुमानों के आधार पर हर जिले के लिए अलग-अलग आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य कम बारिश या सूखे जैसी परिस्थितियों में किसानों और खेती को नुकसान से बचाना है। उन्होंने कहा कि जहां और जब बारिश की स्थिति के अनुसार जरूरत महसूस होगी, वहां इन योजनाओं को तुरंत लागू किया जाएगा। सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर समय रहते जरूरी कदम उठाएगी।

कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बताया कि मौजूदा मौसम की स्थिति काफी हद तक वर्ष 2015 के अल नीनो जैसी दिखाई दे रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश के सिंचाई ढांचे में काफी सुधार हुआ है, जिससे अब हालात पहले की तुलना में बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी कर रखी है। देश में अनाज का भंडार सुरक्षित और मजबूत स्थिति में है। खासकर चावल और गेहूं का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं है।

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