एलॉन मस्क को टक्कर देने के लिए यूरोप ने मिलाया ISRO से हाथ, SpaceX पर निर्भरता कम करेगा Eutelsat; जानें क्या है पूरा प्लान

Eutelsat-ISRO: भारत भी अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को कमर्शियल बना रहा है। इसरो अब रिसर्च पर ध्यान देगा और कमर्शियल लॉन्च को बढ़ावा देगा। भारत ने 2033 तक अपनी घरेलू स्पेस इकोनॉमी को 44 अरब डॉलर यानी करीब ₹3.7 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 3:23 PM
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यूक्रेन युद्ध के बाद Eutelsat ने रूसी 'सोयुज' रॉकेटों का साथ छोड़ दिया था, जिसके बाद भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है

Eutelsat: दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलॉन मस्क और उनकी कंपनी 'स्टारलिंक' को सीधी चुनौती देने के लिए यूरोपीय सैटेलाइट दिग्गज Eutelsat ने भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO का रुख किया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस बेस्ड यह कंपनी अपने भविष्य के सैटेलाइट लॉन्च के लिए इसरो के साथ बातचीत कर रही है, ताकि वह स्पेसएक्स और यूरोपीय 'एरियन' रॉकेटों पर अपनी निर्भरता कम कर सके।

क्यों खास है Eutelsat और ISRO की यह दोस्ती?

Eutelsat के सीईओ जीन-फ्रांस्वा फालचर ने पुष्टि की है कि इसरो के साथ बातचीत जारी है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:


SpaceX से दूरी: वर्तमान में स्टारलिंक की प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद Eutelsat को मस्क की कंपनी SpaceX के रॉकेटों का इस्तेमाल करना पड़ता है। कंपनी अब इस निर्भरता को खत्म करना चाहती है।

रूस से टूटा नाता: यूक्रेन युद्ध के बाद Eutelsat ने रूसी 'सोयुज' रॉकेटों का साथ छोड़ दिया था, जिसके बाद भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

भारत-फ्रांस की बढ़ती नजदीकी: पिछले साल फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गैर-यूरोपीय प्रदाताओं पर निर्भरता को 'पागलपन' बताया था। अब दोनों देश रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं।

ISRO के लिए बड़ा मौका

भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को कमर्शियल बना रहा है, जहां इसरो अब रिसर्च पर ध्यान देगा और कमर्शियल लॉन्च को बढ़ावा देगा। भारत ने 2033 तक अपनी घरेलू स्पेस इकोनॉमी को 44 अरब डॉलर यानी करीब ₹3.7 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसरो पहले ही वनवेब के 72 सैटेलाइट्स को अपने LVM3 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज चुका है।

Eutelsat का मास्टर प्लान

एलॉन मस्क के 10,000 सैटेलाइट्स के नेटवर्क के मुकाबले Eutelsat अपनी अलग रणनीति पर काम कर रहा है। कंपनी के पास अभी 650 सैटेलाइट्स हैं, जिन्हें जल्द ही 1,000 के पार ले जाने की योजना है। एयरबस कंपनी के लिए 440 नए सैटेलाइट्स बना रही है। कंपनी 2031 तक पूरी तरह से फंडेड है। पिछले साल ₹47,000 करोड़ की रिफाइनेंसिंग के बाद फ्रांस की सरकार इसमें सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई है। कंपनी 2030 तक नए सैटेलाइट्स और उनके लॉन्च पर करीब 2 बिलियन यूरो खर्च करेगी, जिसका 30% से 40% हिस्सा केवल रॉकेट लॉन्चिंग पर जाएगा।

भारत एक बड़ा बाजार

सीईओ फालचर ने फरवरी में भारत के दूरसंचार मंत्री और रेगुलेटर्स से भी मुलाकात की थी। उनके अनुसार, भारत जैसा विशाल देश सैटेलाइट इंटरनेट के लिए एक रणनीतिक बाजार है। भविष्य की लॉन्चिंग के लिए क्षमताएं बहुत पहले से तैयार करनी पड़ती हैं, इसलिए इसरो के साथ यह डील लंबी अवधि के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।

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