बिना पर्चे के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, CDSCO ने पेनकिलर्स और एंटीबायोटिक्स को लेकर कड़े किए नियम!

किडनी की परेशानी से जूझ रहे मरीजों को एडवाइजरी में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही, बार-बार होने वाले दर्द या बुखार में बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से इलाज करने से बचने को कहा गया है।

अपडेटेड Sep 22, 2026 पर 4:47 PM
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दर्द और बुखार में बार-बार पेनकिलर या एंटीबायोटिक दवा लेना पड़ सकता है भारी।

कई लोग बिना डॉक्टर से पूछे दर्द, बुखार या दूसरी बीमारी होने पर पेनकिलर या एंटीबायोटिक ले लेते हैं। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, CDSCO (Central Drugs Standard Control Organisation) ने पेनकिलर और एंटीबायोटिक के गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर यह एडवाइजरी जारी की है। जिसमें संस्था ने डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, अस्पतालों और आम लोगों को सोच-समझकर इन दवाओं का इस्तेमाल करने को कहा है। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है या किडनी पर असर पड़ने का खतरा है, उन्हें पेनकिलर लेने से पहले डॉक्टर को अपनी कंडीशन जरूर बतानी चाहिए। एडवाइजरी में ऐसे पेशेंट के लिए दवा लेने से पहले डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल से बात करने पर जोर दिया गया है।

किडनी के मरीज खुद से न लें ये मेडिसिन

यदि दर्द, बुखार या कोई दूसरा लक्षण बार-बार हो रहा है, तो हर बार खुद से पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेना सही तरीका नहीं है। ऐसी सिचुएशन में डॉक्टर से कंसल्ट करना बहुत जरुरी है। बार-बार गलत दवा लेने से शरीर को नुकसान हो सकता है।

पेनकिलर और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करने के कारण


आम पेनकिलर में इस्तेमाल होने वाली NSAIDs दवाओं का जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। इसी तरह एंटीबायोटिक भी हर तरह के बुखार या सर्दी-जुकाम में काम नहीं करते। इसलिए इन दवाओं को अपनी मर्जी से खाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

डॉक्टर भी दवा की डोज लिखने से पहले रखे ये ध्यान

CDSCO ने डॉक्टरों से कहा है कि मरीज की उम्र, बीमारी और दूसरी बिमारियों को ध्यान में रखकर ही NSAIDs और एंटीबायोटिक लिखे जाएं। जहां दवा जरूरी हो, वहां भी जरूरत के हिसाब से ही दवा देने को कहा गया है। मरीज की जरूरत के हिसाब से ही एंटीबायोटिक, डोज और दिन तय होना चाहिए।

मेडिकल स्टोर करें इन नियमों का पालन

एडवाइजरी में फार्मासिस्ट, केमिस्ट और दवा सप्लायर को भी नियमों का पालन करने की सलाह दी है। कई पेनकिलर और एंटीबायोटिक ऐसी कैटेगरी में आते हैं, जिन्हें बिना रजिस्टर्ड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बेचना नियमों के खिलाफ है। इसलिए दुकानदारों से ऐसी दवाओं को बिना पर्ची के नहीं देने को कहा गया है।

अस्पतालों को भी दिए ये निर्देश

अस्पतालों और हेल्थकेयर संस्थानों से कहा गया है कि वे इन दवाओं को सही तरीके से लिखने और उनके इस्तेमाल करने के लिए अपने सिस्टम को मजबूत करें। दवा लिखने से पहले मरीजों को सही जानकारी देने पर ध्यान देने को कहा गया है। साथ ही, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों से डॉक्टरों, केमिस्टों और आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाने को कहा गया है।

पेनकिलर और एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं हैं, जिन्हें लोग अक्सर छोटी परेशानी में भी आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन हर दर्द या बुखार में एक जैसी दवा लेना सही नहीं होता। खासकर जब कोई समस्या बार-बार हो रही हो या पहले से किडनी की बीमारी हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा जरूरी हो जाता है। दवा जरूरत के हिसाब से और सही तरीके से ली जाए, तो इसके गलत इस्तेमाल से होने वाले नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है।

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