India-US Trade Deal: अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे किसान, 12 फरवरी को करेंगे प्रदर्शन

एक बयान में SKM ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा भारतीय कृषि को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने “पूरी तरह आत्मसमर्पण” करने जैसा है। संगठन ने पीयूष गोयल के इस्तीफे की भी मांग की है। किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता सरकार के उस दावे के खिलाफ है

अपडेटेड Feb 08, 2026 पर 11:15 PM
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12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाई गई आम हड़ताल का भी समर्थन किया है।

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील हो चुकी है। वहीं इस डील को कई लोग सही तो कई लोग गलत बता रहे हैं तो दूसरी तरफ डील को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) समेत कई किसान संगठनों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इन संगठनों ने 12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाई गई आम हड़ताल का भी समर्थन किया है।

ट्रेड डील के खिलाफ ऐलान 

एक बयान में SKM ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा भारतीय कृषि को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने “पूरी तरह आत्मसमर्पण” करने जैसा है। संगठन ने पीयूष गोयल के इस्तीफे की भी मांग की है। किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता सरकार के उस दावे के खिलाफ है, जिसमें कहा गया था कि कृषि और डेयरी क्षेत्र को मुक्त व्यापार समझौतों से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह समझौता साइन किया गया, तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन होंगे।


संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक गुट) ने कहा है कि वह बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने के लिए जल्द ही बैठक बुलाएगा। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि वाणिज्य मंत्री भले ही सार्वजनिक रूप से यह कह रहे हैं कि कृषि और डेयरी क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे, लेकिन भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान से अलग तस्वीर सामने आती है। उनके अनुसार, भारत अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर गैर-टैरिफ बैरियर (Non-Tariff Barriers) पर चर्चा करने और उन्हें कम करने पर सहमत हुआ है।

किया ये बड़ा ऐलान

डल्लेवाल का कहना है कि अगर भारतीय बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोले गए, तो इसका सीधा नुकसान देश के किसानों को होगा। वहीं, अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के नेता कृष्णा प्रसाद ने कहा कि यह समझौता सूखे डिस्टिलर अनाज, पशुओं के चारे के लिए लाल ज्वार और सोयाबीन तेल जैसे उत्पादों के आयात की अनुमति दे सकता है। उनका मानना है कि इससे कृषि और डेयरी क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ेगा। किसान संगठनों ने साफ कहा है कि वे इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करेंगे।

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