राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में पारंपरिक खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। आधुनिक तकनीक को अपनाकर यहां के किसान अब न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि अपने खेतों में अनाज के साथ-साथ बिजली भी पैदा कर रहे हैं। कभी बेकार और अनुपजाऊ मानी जाने वाली बंजर जमीन अब किसानों के लिए नोट छापने की मशीन साबित हो रही है।
जिले के मातौर गांव में टोल प्लाजा के पास रहने वाले एक किसान ने अपनी 11 बीघा बंजर जमीन पर 2 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया है, जो पूरे इलाके में मिसाल बन चुका है। इस प्लांट की बदौलत किसान को हर महीने करीब 10 लाख रुपए की बंपर कमाई हो रही है।
पीएम कुसुम योजना: बदल रही है ग्रामीण भारत की तकदीर
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM) योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसी योजना से प्रेरित होकर मातौर गांव के निवासी चंचल कुमार ने अपनी कम उपजाऊ जमीन पर 2 मेगावाट का सोलर एनर्जी प्लांट लगाया है। इस प्लांट से हर दिन हजारों यूनिट पर्यावरण-अनुकूल बिजली पैदा हो रही है, जिसे सीधे विद्युत निगम को बेचा जा रहा है।
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के कनिष्ठ अभियंता (Junior Engineer) शिव प्रकाश ने बताया, "अकेले इस जिले में पीएम कुसुम योजना के तहत अब तक 24 जगहों पर सोलर प्लांट चालू हो चुके हैं। ये प्लांट किसानों को एक तय और स्थायी इनकम दे रहे हैं, जिससे उनकी खाली पड़ी जमीन अब सोने जैसी कीमती हो गई है।
कमाई का पूरा गणित: कैसे बनते हैं रोज ₹30,000?
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सोलर प्लांट से कमाई का गणित बेहद मुनाफेदार है:
जिन किसानों के पास 10 से 11 बीघा जमीन है, वे आसानी से 2 मेगावाट का प्लांट लगा सकते हैं। इसके अलावा, योजना के तहत 0.5 मेगावाट से लेकर 5 मेगावाट तक के प्लांट लगाने का विकल्प मौजूद है।
'बिजली उपभोक्ता' से 'बिजली उत्पादक' बने किसान
एक दौर था जब ग्रामीण इलाकों में किसान कृषि बिजली कनेक्शन के लिए सालों-साल बिजली दफ्तरों के चक्कर काटते थे। लेकिन आज पीएम कुसुम योजना (कॉम्पोनेंट-A और कॉम्पोनेंट-C) के जरिए वे खुद बिजली उत्पादक बन चुके हैं। इससे न केवल उनकी अपनी बिजली की जरूरत पूरी हो रही है, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
सोलर पैनल के नीचे खेती: दोहरा मुनाफा
प्लांट मालिक चंचल कुमार का कहना है कि सरकार की सब्सिडी योजनाओं और आसान लोन सुविधा के कारण अब सोलर प्लांट लगाना बेहद सरल हो गया है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यह 'डबल मुनाफे' का सौदा है। किसान सोलर पैनलों के ऊंचे स्ट्रक्चर के नीचे खाली बची जमीन पर सब्जियां, औषधीय पौधे या अन्य छोटी फसलें उगाकर अतिरिक्त लाभ भी कमा सकते हैं।
खैरथल-तिजारा के खेतों से शुरू हुआ यह बदलाव इस बात का सबूत है कि भारतीय कृषि अब सिर्फ पारंपरिक हल-बैल तक सीमित नहीं है। खेत अब 'ऊर्जा उत्पादन केंद्र' (Energy Hubs) बन रहे हैं, जो किसानों की तकदीर और देश की ऊर्जा जरूरत दोनों को बदल रहे हैं।