Fathima Thahliya Row: केरल में मुस्लिम लीग की विधायक के दीपक जलाने पर विवाद, फातिमा तहिलिया पर क्यों भड़के मुस्लिम संगठन?

Fathima Thahliya Row: केरल के पेराम्ब्रा विधानसभा क्षेत्र से MLA और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की पहली महिला विधायक फातिमा तहिलिया ने हाल ही में कोझिकोड जिले में एक रेस्तरां के उद्घाटन समारोह में पारंपरिक दीप प्रज्वलित किया था। कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 3:10 PM
Fathima Thahliya Row: फातिमा तहिलिया के दीपक जलाने पर मुस्लिम संगठन विधायक पर भड़क गए हैं

Fathima Thahliya Row: केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की मुस्लिम विधायक फातिमा तहिलिया द्वारा एक उद्घाटन समारोह में पारंपरिक निलाविलक्कु (दीपक) जलाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे ने राज्य में धार्मिक परंपराओं, सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन ने इस कदम पर आपत्ति जताई है। वहीं सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग विधायक के समर्थन में उतर आए हैं।

पेराम्ब्रा से आईयूएमएल की पहली महिला विधायक फातिमा तहिलिया ने हाल ही में अपने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कोझिकोड जिले में एक रेस्तरां के उद्घाटन समारोह में पारंपरिक दीप प्रज्वलित किया था। कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया।

मुस्लिम संगठनों का विरोध


केरल के प्रमुख सुन्नी-शाफई मुस्लिम संगठन समस्ता केरल जमीयतुल उलेमा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मुसलमानों को उन धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं में भाग लेने से बचना चाहिए, जिनकी जड़ें इस्लामी शिक्षाओं में नहीं हैं और जो दूसरे धर्मों से जुड़ी मानी जाती हैं। संगठन की केंद्रीय मुशावरा ने इस विषय पर विचार-विमर्श के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि निलाविलक्कु जलाने की परंपरा ऐतिहासिक रूप से गैर-मुस्लिम समुदायों के धार्मिक आयोजनों से जुड़ी रही है।

समस्ता के वरिष्ठ नेता अब्दुल हमीद फैजी अंबलक्काडवु ने भी संगठन के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि इस्लाम अन्य धर्मों के अनुयायियों के प्रति मित्रता, सहिष्णुता और सद्भाव की शिक्षा देता है> लेकिन दूसरे धर्मों के धार्मिक अनुष्ठानों को अपनाने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि इस विषय पर संगठन ने विस्तार से विचार करने के बाद अपना स्पष्ट मत रखा है।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति ऐसे कार्य को उन धार्मिक मान्यताओं के साथ करता है जो इस्लाम के विपरीत हैं, तो यह गंभीर धार्मिक विषय हो सकता है। वहीं, बिना उन मान्यताओं को स्वीकार किए केवल परंपरा या अनुकरण के रूप में ऐसा करना भी इस्लामी दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। हालांकि, संगठन ने यह भी कहा कि यदि निलाविलक्कु का उपयोग केवल रोशनी के साधन के रूप में किया जाए तो उसमें कोई आपत्ति नहीं है।

समस्ता ने जताई आपत्ति

फातिमा तहलिया के दीप प्रज्वलन पर केरल के प्रमुख सुन्नी-शाफई इस्लामी विद्वानों के संगठन समस्ता केरल जमीयतुल उलेमा ने आपत्ति जताई है। संगठन की केंद्रीय मुशावरा (परामर्श परिषद) ने इस विषय पर विचार-विमर्श के बाद एक बयान जारी कर कहा कि मुसलमानों को ऐसे रीति-रिवाजों और समारोहों में भाग लेने से बचना चाहिए जिनकी जड़ें इस्लामी शिक्षाओं में नहीं हैं और जो पारंपरिक रूप से अन्य धर्मों से जुड़े हुए हैं।

बयान में कहा गया कि निलाविलक्कु जलाने की परंपरा ऐतिहासिक रूप से गैर-मुस्लिम समुदायों द्वारा धार्मिक अनुष्ठान के रूप में अपनाई जाती रही है। हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि मुसलमानों को सामाजिक सौहार्द और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखना चाहिए।

समस्ता के वरिष्ठ नेता अब्दुल हमीद फैजी अंबलक्काडवु ने बाद में फेसबुक पोस्ट के माध्यम से संगठन के रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस्लाम अन्य धर्मों के अनुयायियों के प्रति मित्रता, सहिष्णुता और अच्छे संबंध रखने की शिक्षा देता है।

उन्होंने कहा कि इस्लामी परंपरा में पड़ोसियों और अन्य समुदायों के लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार का विशेष महत्व है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम अन्य धर्मों के धार्मिक अनुष्ठानों को अपनाने की अनुमति नहीं देता।

धार्मिक दृष्टिकोण पर संगठन की व्याख्या

समस्ता के बयान में कहा गया कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति किसी ऐसे कार्य को उन धार्मिक मान्यताओं को स्वीकार करते हुए करता है जो इस्लाम के विपरीत हैं, तो यह गंभीर धार्मिक विषय माना जाएगा। संगठन ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति उन मान्यताओं को स्वीकार किए बिना केवल गैर-मुस्लिमों की नकल के रूप में ऐसा करता है, तब भी यह इस्लामी दृष्टि से अनुचित और निषिद्ध माना जाएगा।

हालांकि संगठन ने यह स्पष्ट किया कि यदि निलाविलक्कु का उपयोग केवल प्रकाश के साधन के रूप में किया जाए, तो उसमें कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही लोगों से इस विषय पर संयमित चर्चा करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील भी की गई।

सोशल मीडिया पर मिला समर्थन

दूसरी ओर, इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने विधायक फातिमा तहिलिया का समर्थन करते हुए कहा कि उद्घाटन समारोह में दीप जलाना एक सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा है, न कि किसी विशेष धर्म का प्रचार। कुछ लोगों ने आलोचकों पर तंज कसते हुए केरल की "100 प्रतिशत साक्षरता" का जिक्र किया और कहा कि ऐसे मुद्दों को अनावश्यक रूप से धार्मिक रंग दिया जा रहा है।

धार्मिक आस्था Vs सामाजिक परंपरा की बहस

फातिमा तहिलिया के दीप प्रज्वलन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन की बहस में बदल गया है। एक ओर धार्मिक संगठन अपने सिद्धांतों के आधार पर आपत्ति जता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग इसे सामाजिक और सांस्कृतिक शिष्टाचार का हिस्सा मान रहे हैं। फिलहाल यह मामला केरल में धार्मिक पहचान, सामाजिक सहभागिता और सार्वजनिक जीवन में परंपराओं की भूमिका को लेकर नई चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

यूजर्स के रिएक्शन

फेसबुक और X पर कई लोगों ने यह भी लिखा कि देश की अनेक मस्जिदों और दरगाहों में दीपक या चिराग का इस्तेमाल होता है, इसलिए दीप प्रज्वलन को इस्लाम विरोधी बताना उचित नहीं है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि आखिर एक उद्घाटन समारोह में दीप जलाना किस तरह धार्मिक विवाद का विषय बन सकता है। फातिमा तहलिया के दीप प्रज्वलन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन की बहस में बदल गया है।

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