भारत के सरकारी बॉन्ड्स में निवेश पर विदेशी निवेशकों को मिलेगी टैक्स से छूट, अध्यादेश हुआ जारी

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इस छूट का मकसद सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को आसान बनाना और पात्र विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है। यह अध्यादेश इसलिए जारी किया गया क्योंकि संसद का सत्र नहीं चल रहा है और राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट थे कि ऐसी परिस्थितियां मौजूद हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है

अपडेटेड Jun 05, 2026 पर 12:18 PM
वित्त मंत्रालय का कहना है कि इस छूट का मकसद सरकारी सिक्योरिटीज़ में निवेश को आसान बनाना और पात्र विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है

केंद्र सरकार ने 5 जून को इनकम-टैक्स (संशोधन)अध्यादेश 2026 जारी कर दिया है। इसके तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन्स पर टैक्स चुकाने से छूट दी गई है। यह अध्यादेश 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा,जिससे इसका फायद मौजूदा टैक्स ईयर की शुरुआत से ही मिल सकेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026,आयकर अधिनियम,2025 की अनुसूची IV में संशोधन करता है ताकि सरकारी बॉन्ड में निवेश से जुड़ी टैक्स फ्री आय की नई कटेगरीज जोड़ी जा सकें।

यह अध्यादेश इसलिए जारी किया गया क्योंकि संसद का सत्र नहीं चल रहा है और राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट थे कि ऐसी परिस्थितियां मौजूद हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। इस संशोधन के तहत,एक नई एंट्री जोड़ी गई है जिसके तहत विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (government securities) पर कमाए गए किसी भी ब्याज और ऐसी प्रतिभूतियों की बिक्री,अदला-बदली या ट्रांसफर से होने वाले किसी भी कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ)को टैक्स छूट दी गई है,बशर्ते कि तय जानकारी देने की शर्तों का पालन किया जाए।

बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स को भी मिलेगी ये छूट


एक अलग एंट्री के तहत 'बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स'(BIS) को भी यही छूट दी गई है। स्विट्ज़रलैंड में स्थित यह संस्थान दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है। हालांकि,इसके लिए भी तय फ़ॉर्म और तरीके से जानकारी देना जरूरी होगा।

इस ऑर्डिनेंस में यह बताया गया है कि सरकारी सिक्योरिटीज़ की बिक्री,एक्सचेंज या ट्रांसफर से होने वाली ब्याज की आय और कैपिटल गेन्स दोनों पर ही यह छूट लागू होगी। इसमें 'सरकारी सिक्योरिटी'को 'सरकारी सिक्योरिटीज़ एक्ट,2006'के तहत दी गई परिभाषा से जोड़कर परिभाषित भी किया गया है।

हटाए गए सभी टैक्स

बता दें कि अभी तक FIIs को उन सरकारी बॉन्ड पर 12.5% ​​लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) देना पड़ता था जिन्हें 12 महीने से ज़्यादा समय तक इनको होल्ड किया हो। अगर बॉन्ड को 12 महीने से कम समय के लिए होल्ड जाता था तो शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर 20% थी। अब इन दोनों टैक्स को हटा दिया गया है।

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विदहोल्डिंग टैक्स भी खत्म

सरकारी सिक्योरिटीज़ पर विदेशी इन्वेस्टर्स को मिलने वाली ब्याज इनकम पर लगने वाला विदहोल्डिंग टैक्स भी खत्म कर दिया गया है। सरकार द्वारा यह कदम विदेशी निवेश को बढ़ाने और विदेशी फंड की निकासी को रोकने के लिए उठाए गए हैं। सरकार के इस कदम से रुपये को सपोर्ट मिल सकता है और बढ़ते चालू खाते के घाटे को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

बता दें कि विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड से होने वाली ब्याज की कमाई पर 20 प्रतिशत का विदहोल्डिंग टैक्स (स्रोत पर काटा जाने वाला टैक्स) भी देना पड़ता था। 1 जुलाई 2023 तक,सरकारी सिक्योरिटीज़,राज्य विकास ऋण और रुपये में जारी बॉन्ड से होने वाली कमाई पर इस टैक्स की दर 5 प्रतिशत थी। लेकिन बाद में इसे बढ़ा दिया गया था।

5 प्रतिशत की टैक्स दर को शुरू में 2013 में 'टेपर टैंट्रम'के कारण रुपये की गिरती कीमत को थामने के उपाय के तौर पर लागू किया गया था। इसे थोड़े समय के लिए लागू किया गया था,लेकिन टैक्स की यह दर एक दशक से भी ज़्यादा समय तक वही बनी रही। 2023 में,सरकार ने (डेट सिक्योरिटीज़ से होने वाली ब्याज आय पर) टैक्स की दर को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला किया,ताकि इसे कैपिटल गेन्स पर लागू दरों के बराबर रखा जा सके।

वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस छूट का मकसद सरकारी सिक्योरिटीज़ में निवेश को आसान बनाना और पात्र विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है।

गौरतलब है क 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 5 प्रतिशत कमजोर हुआ है। वर्तमान में डॉलर के मुकाबले रुपया 95-96 रुपए प्रति डॉलर के आसपास दिख रहा है।

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