पान की दुकान से शुरू हुआ सफर: पत्नी की एक रेसिपी ने बदल दी किस्मत, आज 475 करोड़ का बिरयानी साम्राज्य

पान की दुकान से शुरू हुआ सफर आज 475 करोड़ के बिरयानी साम्राज्य तक पहुंच गया है। नागासामी नायडू ने 1957 में 4 सीटों से होटल शुरू किया था, पत्नी की खास रेसिपी ने उनकी किस्मत बदल दी और आज Dindigul Thalappakatti 100 से ज्यादा शहरों में मशहूर है।

अपडेटेड Oct 30, 2026 पर 8:08 AM
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1957 में 4 सीटों वाले होटल से शुरू हुआ था Dindigul Thalappakatti का सफर, आज है 475 करोड़ का ब्रांड

तमिलनाडु: तमिलनाडु का Dindigul Thalappakatti एक ऐसा जाना-पहचाना नाम है, जिसे किसी परिचय की जरूरत नहीं है। आज बिरयानी पसंद करने वालों के साथ-साथ दुनिया के तमाम लोग इस नाम से वाकिफ हैं। थलप्पाकट्टी के 100 से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं, लेकिन इसकी शुरुआत एक छोटी सी पान की दुकान से हुई थी। 1957 में नागासामी नायडू ने इसकी नींव रखी थी। उनकी पत्नी की बनाई बिरयानी की रेसिपी ने इसे बड़ा ब्रांड बना दिया।

Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, आज Dindigul Thalappakatti के देश के कई राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस और दुबई जैसे देशों में भी आउटलेट हैं। लेकिन इतने बड़े ब्रांड बनने के बाद भी कंपनी आज भी अपनी 68 साल पुरानी उसी रेसिपी पर कायम है, जो इसे बाकी बिरयानी ब्रांड से अलग बनाती है।

ऐसे शुरू हुआ था छोटा सा बिजनेस


नागासामी नायडू तमिलनाडु के डिंडीगुल में पान की दुकान चलाते थे। उनके परिवार की बिरयानी लोगों को खूब पसंद आती थी। इसे देखते हुए उन्होंने 1957 में 'आनंदा विलास बिरयानी होटल' खोला। तब वहां सिर्फ 4 लोग ही बैठ सकते थे, लेकिन धीरे-धीरे इसका स्वाद सबको पसंद आने लगा।

इस खास वजह से फेमस हुई बिरयानी

इस बिरयानी की खास बात इसकी रेसिपी थी। इसमें बासमती चावल की जगह छोटे दाने वाला सीरगा सांबा चावल इस्तेमाल होता था। यह चावल मसालों को अच्छे से सोख लेता है। साथ ही इसमें खास मसाले और लोकल मीट डाला जाता था। इसी अलग स्वाद ने इसे फेमस बना दिया।

पगड़ी से कैसे मिला नाम?

नागासामी नायडू हमेशा सफेद शर्ट, धोती और सिर पर पगड़ी पहनकर काउंटर पर बैठते थे। इसी वजह से लोग उनके होटल को आनंदा विलास की जगह 'थलप्पाकट्टी' कहने लगे। तमिल में थलप्पाकट्टी का मतलब पगड़ी वाला व्यक्ति होता है। 1978 में उनके बेटे ने इसका नाम 'थलप्पाकट्टी आनंदा विलास' रख दिया।

अगली पीढ़ी ने संभाली कमान

परिवार ने डिंडीगुल (Dindigul) से बाहर भी होटल खोलना शुरू किया। कोयंबटूर (Coimbatore) में बड़ा रेस्टोरेंट खोला गया, लेकिन स्वाद वही रखा गया। इसके लिए डिंडीगुल के पुराने कारीगरों को ही वहां भेजा गया।

बाद में पोते डी. नागासामी ने बिजनेस संभाला। उन्होंने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की और लंदन से मास्टर डिग्री ली। 2000 में वह भारत लौटे और पारिवारिक बिजनेस से जुड़ गए।

चेन्नई से मिली बड़ी पहचान

डी. नागासामी ने पहले वथालागुंडु (Vathalagundu) में रेस्टोरेंट खोला, जहां रोज 350 प्लेट बिरयानी बिकने लगी। इसके बाद 2008 में चेन्नई के अन्ना नगर में रेस्टोरेंट खोला। शुरू में ग्राहक कम आए, फिर पगड़ी को ब्रांड के तौर पर प्रमोट किया गया और बिजनेस चल निकला।

निवेश के बाद तेजी से बढ़ा ब्रांड

2019 में कंपनी को बड़ा निवेश मिला। CX Partners नाम की कंपनी ने 260 करोड़ रुपये में 50.1% हिस्सेदारी खरीदी। उस समय कंपनी की कीमत करीब 519 करोड़ थी। इसके बाद 2020 और 2021 में भी निवेश मिला, जिससे कंपनी देश-विदेश में फैल गई। फरवरी 2023 में सेलम में कंपनी ने अपना 100वां रेस्टोरेंट खोला।

अब 475 करोड़ रुपये का है कारोबार

कंपनी की कमाई हर साल बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में इसका रेवेन्यू 475 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से 16% ज्यादा है। इस तरह 4 लोगों के बैठने की जगह से शुरू हुआ यह छोटा सा होटल आज 475 करोड़ का ब्रांड बन गया है।

एक पान वाले से करोड़ों के बिजनेस मालिक तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन नागासामी नायडू ने साबित कर दिया कि अगर नियत साफ हो और काम में ईमानदारी हो तो सफलता जरूर मिलती है।आज उनकी कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने से डरते हैं।

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