शिप-टू-माउथ की लाचारी से 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन तक, पंडित नेहरू और पीएम मोदी की लीडरशिप में भारत कितना बदला?

PM Modi 12 Years: पीएम मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। अब जब हम देश की खाद्य सुरक्षा का आकलन करते हैं, तो आजादी के समय महज 37 करोड़ की आबादी को खिलाने के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाले भारत से लेकर, आज 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले आत्मनिर्भर और निर्यातक भारत का सफर वाकई अभूतपूर्व है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 10:01 AM
आज देश के लगभग 80 करोड़ नागरिकों को पूरी तरह मुफ्त अनाज मुहैया कराया जा रहा है

India's Food Security Journey: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 10 जून को लगातार 4399 दिनों तक पद पर रहने का एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। इसके साथ ही वे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर जब हम देश की बुनियादी यात्रा का आकलन करते हैं, तो भारत की 'फूड सिक्योरिटी' यानी खाद्य सुरक्षा की कहानी देश के सबसे बड़े बदलाव के रूप में सामने आती है।

आजादी के समय महज 37 करोड़ की आबादी को खिलाने के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाले भारत से लेकर, आज 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले आत्मनिर्भर और निर्यातक भारत का सफर वाकई अभूतपूर्व है। आइए जानते हैं कि नेहरू युग की उस 'शिप-टू-माउथ' की लाचारी से लेकर पीएम मोदी के दौर में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने तक देश कितना बदल चुका है।

नेहरू युग और 'शिप-टू-माउथ' की वह कड़वी लाचारी


आजादी के तुरंत बाद के दशकों में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती भुखमरी और खाद्य असुरक्षा से निपटने की थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में देश को खड़ा करने के लिए कई बड़े सार्वजनिक संस्थानों और बांधों का निर्माण तो हुआ, लेकिन कृषि उत्पादकता बेहद कम थी। खराब बुनियादी ढांचे और सूखे के कारण देश 37 करोड़ से भी कम आबादी का पेट भरने के लिए पूरी तरह से विदेशी मदद पर निर्भर था।

उस दौर में इस लाचारी का सबसे बड़ा प्रतीक अमेरिका के साथ हुआ PL-480 समझौता था। इस समझौते के तहत भारत 1950 और 1960 के दशकों में अमेरिका से भारी मात्रा में गेहूं और अनाज का आयात करता था। भारत की स्थिति को अक्सर 'शिप-टू-माउथ' यानी जहाज से मुंह तक कहा जाता था, जिसका सीधा मतलब था कि देश के लोग भूखे रहेंगे या उनका पेट भरेगा, यह इस बात पर तय होता था कि विदेशी अनाज का जहाज बंदरगाह पर पहुंचा है या नहीं।

पीएम मोदी का दौर: लाचारी खत्म, अब हम बने अन्नदाता

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कहानी पूरी तरह से बदल चुकी है। भारत अब अनाज के लिए किसी बाहरी देश या विदेशी सहायता पर निर्भर नहीं है। बल्कि आज का भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य उत्पादकों की कतार में मजबूती से खड़ा है। देश में रिकॉर्ड तोड़ अनाज की सरकारी खरीद होती है और डिजिटल वितरण प्रणालियों के जरिए इसे जरूरतमंदों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाता है।

पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना: 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन

अमरीका के आगे अनाज के लिए हाथ फैलाने वाला देश आज दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत देश के लगभग 80 करोड़ नागरिकों को पूरी तरह मुफ्त अनाज मुहैया कराया जा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं का सबसे बड़ा उदाहरण है।

पोषण अभियान और कुपोषण पर सीधा प्रहार

सिर्फ पेट भरना ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य को पोषण देना भी आज सरकार की प्राथमिकता है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'पोषण अभियान' के जरिए देश के करोड़ों बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक पौष्टिक भोजन और जरूरी पोषण सहायता सीधे पहुंचाई जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ और मजबूत हो सके।

दुनिया को अनाज बांट रहा है आज का आत्मनिर्भर भारत

जो भारत कभी 'शिप-टू-माउथ' के संकट से गुजर रहा था, वह आज न सिर्फ अपने 80 करोड़ नागरिकों को मुफ्त राशन दे रहा है, बल्कि दुनिया के तमाम देशों को भारी मात्रा में खाद्यान्न का निर्यात भी कर रहा है। वैश्विक स्तर पर अनाज की कमी होने पर भारत आज दुनिया के लिए संकटमोचक बनकर उभरता है। नेहरू के उस दौर से निकलकर मोदी के इस स्वर्ण काल तक पहुंचने की यह विकास यात्रा भारत की असली ताकत और आत्मनिर्भरता को बयां करती है।

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