पहले चाइनीज Robodog, फिर कोरिया के सॉकर ड्रोन को भी बताया अपना! AI समिट में एक और नए विवाद में फंसी Galgotias यूनिवर्सिटी

यूनिवर्सिटी का कहना है कि सॉकर ड्रोन का डिजाइन से लेकर इस्तेमाल तक पूरा काम कैंपस के अंदर ही किया गया। उनका दावा है कि यह उनकी अपनी “एंड-टू-एंड” इनोवेशन का नतीजा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर ही कई यूजर्स ने ऐसा दावा किया कि ये Striker V3 ARF सॉकर ड्रोन है, जो कोरिया से इंपोर्ट किया गया है और आसानी से ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है

अपडेटेड Feb 18, 2026 पर 7:55 PM
AI समिट में एक और नए विवाद में फंसी Galgotias यूनिवर्सिटी

इंडिया AI समिट में चाइनीज रोबोडॉग को अपना बताने वाली गलगोटियास यूनिवर्सिटी एक और नए विवाद में फंस गई, जब यूनिवर्सिटी प्रोफेसर नेहा सिंह ने 'सॉकर ड्रोन' को लेकर दावा किया कि इस ड्रोन को भी यूनिवर्सिटी स्टाफ और छात्रों ने खुद ही बनाया है। यह विवाद उसी दिन सामने आया, जब नई दिल्ली में हुए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के एक्सपो एरिया से यूनिवर्सिटी को जगह खाली करने के लिए कहा गया था। इससे पहले रोबोटिक डॉग को लेकर भी विवाद हो चुका था।

यूनिवर्सिटी का कहना है कि सॉकर ड्रोन का डिजाइन से लेकर इस्तेमाल तक पूरा काम कैंपस के अंदर ही किया गया। उनका दावा है कि यह उनकी अपनी “एंड-टू-एंड” इनोवेशन का नतीजा है।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक प्रोफेसर कहते सुनाई दे रही हैं कि यूनिवर्सिटी के पास सिमुलेशन लैब से लेकर सॉकर खेलने के लिए खास एरीना तक सब कुछ मौजूद है। उनका कहना है कि यह कैंपस में भारत का पहला सॉकर एरीना है।

जबकि सोशल मीडिया पर ही कई यूजर्स ने ऐसा दावा किया कि ये Striker V3 ARF सॉकर ड्रोन है, जो कोरिया से इंपोर्ट किया गया है और आसानी से ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

बाजार में ये स्काईबॉल ड्रोन के नाम से बिकता है। skyballdrone.com वेबसाइट के मुताबिक, ये एक लगभग रेडी टू फ्लाई (ARF) ड्रोन है, मतलब आधा-अधूरा असेंबल किया हुआ आता है, आपको बस कुछ पार्ट्स जोड़ने होते हैं, जैसे बैटरी, कंट्रोलर और रिसीवर।

ये खासतौर पर Drone Soccer (या Skyball Drone Soccer) के लिए डिजाइन किया गया है। इसे बनाने वाली कंपनी का नाम Helsel Group है, जो साउथ कोरिया की है।

इससे एक दिन पहले ही यूनिवर्सिटी को रोबोटिक डॉग मामले में विवादों से घिर चुकी थी, जिसके चलते यूनिवर्सिटी बुधवार को यूनिवर्सिटी के स्टॉल की लाइट काट दी गई थी और अब वो इस समिट से बाहर हो चुकी है।

हालांकि, बाद में यूनिवर्सिटी ने माना कि AI समिट में दिखाया गया रोबोट चीन की कंपनी से खरीदा गया था और उन्होंने उसे खुद बनाने का दावा नहीं किया था।

दरअसल, रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ‘Unitree Go2’ नाम का रोबोट ‘Orion’ नाम से दिखाया गया, जिसके बाद आरोप लगे कि बाहर से खरीदी गई तकनीक को देश में बना हुआ बताया गया।

वहीं अब यूनिवर्सिटी ने AI समिट में हुए विवाद पर माफी मांगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यूनिवर्सिटी की फैकल्टी नेहा सिंह को प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें आधिकारिक रूप से मीडिया से बात करने के लिए नियुक्त किया गया था।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एन के गौर ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा, "हम, गलगोटियास यूनिवर्सिटी, हाल ही में हुए AI समिट में हुई गलतफहमी के लिए दिल से माफी मांगते हैं।"

इसमें लिखा, "हमारे एक प्रतिनिधि, जो पवेलियन संभाल रहे थे, उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। उन्हें प्रोडक्ट की तकनीकी उत्पत्ति के बारे में सही जानकारी नहीं थी। कैमरे पर बोलते समय उत्साह में उन्होंने कुछ ऐसी बातें कह दीं, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थीं। साथ ही, उन्हें प्रेस से बात करने की आधिकारिक अनुमति भी नहीं थी।"

बयान में आगे कहा गया, "हम आपसे समझदारी और सहयोग की अपेक्षा करते हैं, क्योंकि संस्थान की ओर से किसी भी तरह की गलत जानकारी देने का इरादा नहीं था। गलगोटियास यूनिवर्सिटी शैक्षणिक ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदार तरीके से अपने काम को पेश करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आयोजकों की भावना को समझते हुए हमने कार्यक्रम स्थल खाली कर दिया है।"

'कैमरे पर उत्साह में ज्यादा बोल दिया' AI सिमिट से बाहर हुई Galgotias यूनिवर्सिटी, चाइनीज Robodog विवाद पर मांगी माफी

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