राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगे हैं। इस मामले पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। वहीं मामले में निर्माण समिति के अध्यक्ष और भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, मंदिर प्रबंधन का पूरा मैनेजमेंट स्ट्रक्चर, अनुभवी लोगों के हाथ में सौंप दिया जाए।
मंदिर की व्यवस्था को बदलने की मांग
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि अब मंदिर के संचालन में केवल वॉलंटियर्स पर आधारित व्यवस्था के बजाय प्रोफेशनल और व्यवस्थित प्रबंधन अपनाने की जरूरत है। उनका कहना है कि राम मंदिर में दान को लेकर सामने आए कथित विवाद ने प्रशासन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ी कई अहम चिंताओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं बड़ी मात्रा में लोगों का दान और रोजमर्रा के कामकाज संभालती हैं, वे लंबे समय तक अनौपचारिक तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकतीं। ऐसी संस्थाओं में स्पष्ट जिम्मेदारियां, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही का साफ सिस्टम होना बेहद जरूरी है, ताकि कामकाज पारदर्शी और प्रभावी तरीके से चल सके।
की जाए मजबूत निगरानी व्यवस्था
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर की पूरी प्रबंधन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की जरूरत है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने इस बारे में कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी है। उनका मानना है कि मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी अनुभवी और प्रोफेशनल लोगों को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में गतिविधियां होती हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में जिम्मेदारियों का स्पष्ट और व्यवस्थित बंटवारा नहीं है। ऐसे में बेहतर प्रबंधन, स्पष्ट भूमिकाओं और मजबूत निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि सभी काम सुचारू और पारदर्शी तरीके से चल सकें।
नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि फिलहाल मंदिर का प्रबंधन काफी हद तक वॉलंटियर्स के भरोसे चल रहा है। उन्होंने बताया कि वहां काम करने वाले लोगों को मौखिक रूप से उनकी जिम्मेदारियां समझा दी जाती हैं, लेकिन उनके लिए कोई लिखित आदेश, स्पष्ट जिम्मेदारियां बताई नहीं जाती। उन्होंने कहा कि मंदिर में विभिन्न कार्यों के लिए करीब 1,500 लोग काम कर रहे हैं। इतनी बड़ी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक औपचारिक प्रबंधन प्रणाली और मजबूत निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, हाल ही में सामने आया विवाद उनके लिए भी निराशाजनक है, क्योंकि यह ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर का निर्माण अपने अंतिम चरण में है। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं भक्तों के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला श्रद्धालुओं की आस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है और इससे लोगों को दुख पहुंचा है।
यह बयान राम मंदिर में दान के पैसों के हिसाब-किताब में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बीच आया है। मंदिर के एक कर्मचारी के घर से नकदी मिलने के बाद 7 करोड़ रुपये और उससे भी बड़ी रकम से जुड़े कई दावे सामने आए, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया और जांच की मांग तेज हो गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। यह टीम रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।