Goa Nightclub Fire Case: गोवा के अरपोरा गांव में 6 दिसंबर को हुए खौफनाक अग्निकांड की जांच रिपोर्ट ने व्यवस्था की कलई खोल दी है। 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब में लगी आग ने न केवल 25 जिंदगियां खाक कीं, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का 'कॉकटेल' कितना घातक हो सकता है। मजिस्ट्रेट जांच में सामने आया है कि जिस क्लब का लाइसेंस महीनों पहले खत्म हो चुका था, वह पंचायत और प्रदूषण बोर्ड जैसे विभागों की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा था।
जांच के 5 सबसे चौंकाने वाले खुलासे
1. एक्सपायर्ड लाइसेंस पर चल रहा था 'मौत का खेल': क्लब का ट्रेड लाइसेंस मार्च 2024 में ही खत्म हो चुका था। इसके बावजूद, स्थानीय पंचायत ने न तो परिसर को सील किया और न ही वहां चल रही गतिविधियों को रोका। यह पंचायत की सबसे बड़ी और प्राथमिक विफलता मानी गई है।
2. इको-सेंसिटिव जोन में अवैध निर्माण: यह क्लब एक 'सॉल्ट पैन' यानी इको-सेंसिटिव जोन में बना था। नियमों के मुताबिक यहां निर्माण वर्जित है, फिर भी पंचायत ने बिना किसी 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' के धड़ाधड़ NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) जारी कर दिए।
3. सात विभागों की 'मेहरबानी': हैरानी की बात यह है कि इस क्लब को ट्रेड, एक्साइज, फूड सेफ्टी और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड जैसे कम से कम 7 विभागों ने मंजूरी दे रखी थी। जांच में सवाल उठाया गया है कि जब निर्माण ही अवैध था, तो इन विभागों ने हरी झंडी कैसे दी?
4. GCZMA की चुप्पी: गोवा तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (GCZMA) को इस अवैध निर्माण और CRZ नियमों के उल्लंघन की दो शिकायतें मिली थीं, लेकिन विभाग उन पर कुंडली मारकर बैठा रहा। इसी निष्क्रियता ने क्लब मालिकों को बेखौफ होने का मौका दिया।
5. कागजों पर डिमोलिशन, हकीकत में पार्टी: पंचायत ने नाइट क्लब को गिराने का आदेश तो दिया था, लेकिन उसे लागू करने में जानबूझकर देरी की गई। जब तक आदेश पर स्टे आया, तब तक पंचायत के पास उसे गिराने का पर्याप्त समय था, जिसे उसने गंवा दिया।
पुलिस कस्टडी में है मालिक
नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरा को थाईलैंड से डिपोर्ट कर गोवा लाया गया है। गोवा की अदालत ने शुक्रवार को दोनों भाइयों की पुलिस कस्टडी 29 दिसंबर तक बढ़ा दी है। पुलिस ने उन पर गैर-इरादतन हत्या और सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी का मामला दर्ज किया है।