23731 करोड़ की गोबरधन स्कीम को मिली मंजूरी, जानिए इससे किसानों के लिए इनकम के कौन-कौन से नए रास्ते खुलेंगे

GOBARdhan Scheme Explained: गोबरधन योजना देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कमाई के नए मौके लेकर आएगी। अक्सर किसानों के लिए सिरदर्द बनने वाली पराली (फसल अवशेष) और मवेशियों का गोबर अब उनकी अतिरिक्त कमाई का जरिया बनेंगे।

अपडेटेड Aug 06, 2026 पर 5:09 PM
अब नई यूनिफाइड 'गोवर्धन' योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित की जाएगी। इससे फैसले जल्दी होंगे और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

GOBARdhan Scheme Explained: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के लिए भारत की नेशनल यूनिफाइड स्कीम गोबरधन (GOBARdhan - National Circular Bioenergy Scheme) को हरी झंडी दे दी है। सरकार ने इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय योजना के लिए 23731 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में जैविक संसाधनों यानी पराली, गोबर और दूसरे कचरे को साफ-सुथरी ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक विकास में बदलना है। इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू किया जाएगा। योजनी के माध्यम से ग्रामीण इलाके के कचरे को ही भारत की तरक्की का ईंधन बनाने की तैयार है। सरकार की कोशिश रहेगी कि इस स्कीम से गांव क्लीन एनर्जी प्रोडकेशन के केंद्र बनेंगे और देश की ऊर्जा सुरक्षा में सीधे भागीदार बनेंगे।

किसानों की आमदनी के खुलेंगे कई नए रास्ते

गोवर्धन योजना देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कमाई के नए मौके लेकर आएगी। अक्सर किसानों के लिए सिरदर्द बनने वाली पराली (फसल अवशेष) और मवेशियों का गोबर अब उनकी अतिरिक्त कमाई का जरिया बनेंगे। इस योजना के माध्यम से किसान, ग्रामीण उद्यमी और सहकारी समितियां (कोऑपरेटिव्स) कचरा और बायोमास जुटाने का काम करके अच्छी इनकम कर सकेंगे। इसके अलावा सीबीजी प्लांट में गैस बनने के बाद निकलने वाली जैविक खाद के उत्पादन और बिक्री से भी किसानों को बड़ा फायदा होगा। इससे न सिर्फ केमिकल फर्टिलाइजर्स पर उनकी निर्भरता और खेती की लागत घटेगी बल्कि जैविक खाद बेचकर कमाई का एक नया रास्ता भी खुलेगा।


सीबीजी उत्पादन में 10 गुना तक होगी बढ़ोतरी

सरकार की इस पहल का लक्ष्य देश में घरेलू स्तर पर CBG के उत्पादन को करीब 10 गुना तक बढ़ाना है। इससे भारत की आयातित फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल और गैस) पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा बेहद मजबूत होगी। केमिकली सीबीजी पूरी तरह से प्राकृतिक गैस जैसी होती है और इसे मौजूदा गैस पाइपलाइन नेटवर्क में आसानी से मिलाया जा सकता है। यह योजना पूरे सीबीजी सेक्टर को एक राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए तैयार की गई है।

गोवर्धन योजना के 6 मेन ग्रोथ इंजन क्या हैं?

योजना को सुचारू और सफल बनाने के लिए सरकार ने छह मेन ग्रोथ इंजन निर्धारित किए हैं-

1 - निश्चित सीबीजी खरीद की गारंटी: उत्पादकों को अपनी तैयार गैस बेचने में कोई दिक्कत न आए इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के माध्यम से खरीद तय की गई है। सीएनजी और पीएनजी में सीबीजी मिलावट का लक्ष्य 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत रखा गया है।

2 - स्टेबल प्राइसिंग प्रेमवर्क: सीबीजी उत्पादकों को आर्थिक स्थिरता देने के लिए 2110 रुपये प्रति MMBTU की दर से एक स्थिर मूल्य तय किया गया है। यह कम से कम 10 साल के लिए फिक्स रहेगा। इससे उत्पादकों को लंबे समय तक बेहतर कमाई की गारंटी मिलेगी।

3 - कैपिटल असिस्टेंस: नए सीबीजी प्रोजेक्ट्स को हर दिन 1 टन क्षमता (1 TPD) पर 2 करोड़ रुपये तक की सरकारी मदद दी जाएगी। यह मदद प्लांट की मशीनों के अलावा बायोमास इकट्ठा करने और जैविक खाद बनाने से जुड़े उपकरणों के लिए भी मिलेगी।

4 - पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: सीबीजी प्लांटों को मुख्य गैस पाइपलाइनों और सिटी गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च घटेगा और बिक्री आसान होगी।

5 - क्रेडिट गारंटी सपोर्ट: एमएसएमई, महिला उद्यमियों और नए डेवलपर्स को बैंकों से आसानी से सस्ता लोन दिलाने के लिए एक विशेष क्रेडिट गारंटी मैकेनिज्म बनाया गया है।

6- इकोसिस्टम चैलेंज फंड: जिला स्तर पर योजना को बेहतर ढंग से लागू करने, कचरा इकट्ठा करने के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और नई तकनीक को अपनाने के लिए यह फंड बनाया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

पिछले कुछ सालों में सतत (SATAT) पहल और दूसरी योजनाओं के तहत देश में 200 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। अब नई यूनिफाइड 'गोवर्धन' योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित की जाएगी। इससे फैसले जल्दी होंगे और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। यह योजना वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन करके ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करेगी। सरकार का दावा है कि कृषि अवशेषों, गोबर और नगरपालिका के जैविक कचरे का सही इस्तेमाल करके यह योजना वेस्ट-टू-वेल्थ और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी

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