केंद्र सरकार ने दिल्ली-NCR में पुराने ट्रक और बसों की जगह नए BS-VI और इलेक्ट्रिक गाड़ियां लाने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की बड़ी योजना को मंजूरी दी है। इसका मकसद प्रदूषण कम करना और सड़कों पर चल रही पुरानी गाड़ियों को बदलना है।

केंद्र सरकार ने दिल्ली-NCR में पुराने ट्रक और बसों की जगह नए BS-VI और इलेक्ट्रिक गाड़ियां लाने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की बड़ी योजना को मंजूरी दी है। इसका मकसद प्रदूषण कम करना और सड़कों पर चल रही पुरानी गाड़ियों को बदलना है।
2 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा फायदा
सरकार के मुताबिक, इस दो साल की योजना से करीब 2.07 लाख गाड़ी मालिकों को फायदा मिलेगा। इनमें लगभग 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं। योजना के तहत BS-IV और उससे पुराने ट्रक-बस मालिकों को नई BS-VI या इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने के लिए मदद दी जाएगी।
नई गाड़ी खरीदने पर क्या मिलेगा?
सरकार नई गाड़ी के लोन पर 5 साल तक 5% ब्याज में राहत देगी। इसके अलावा गाड़ी के हिसाब से हर महीने 4,800 रुपये तक के फ्यूल वाउचर भी मिलेंगे। इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने वालों को अलग से अतिरिक्त फायदा दिया जाएगा।
दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारें भी इस योजना में हिस्सा लेंगी। नई गाड़ियों पर रजिस्ट्रेशन फीस नहीं लगेगी और रोड टैक्स में 100% तक छूट मिल सकती है। पुरानी गाड़ियों के बकाया शुल्क भी माफ किए जाएंगे। वहीं गाड़ी बनाने वाली कंपनियां नई गाड़ियों पर 8% तक की छूट देंगी।
पुरानी गाड़ियों का क्या होगा?
BS-III और उससे पुराने ट्रक और बसों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर में भेजना होगा। BS-IV गाड़ियों को या तो स्क्रैप कराया जा सकता है या NCR से बाहर बेचा जा सकता है। योजना का फायदा लेने के लिए नई BS-VI या इलेक्ट्रिक गाड़ी NCR में ही खरीदकर रजिस्टर करानी होगी।
ऑटो इंडस्ट्री ने फैसले का स्वागत किया
SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्र ने कहा कि ब्याज में राहत, टैक्स छूट, फ्यूल वाउचर और कंपनियों की छूट मिलकर पुरानी गाड़ियों को बदलना आसान बना सकती है। इससे दिल्ली-NCR में कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
टाटा मोटर्स के एमडी और सीईओ गिरीश वाघ ने कहा कि यह योजना माल ढुलाई और यात्री परिवहन को ज्यादा साफ और आधुनिक बनाने में मदद करेगी। वहीं VECV के एमडी बी. श्रीनिवास का मानना है कि यह मॉडल आगे चलकर देश के दूसरे हिस्सों में भी अपनाया जा सकता है।
प्रदूषण पर कितना असर पड़ेगा?
सरकार के मुताबिक, दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्ट सेक्टर PM2.5 प्रदूषण का 14%, कार्बन मोनोऑक्साइड का 40% और नाइट्रोजन ऑक्साइड का 63% हिस्सा पैदा करता है। खास बात यह है कि ट्रक और बसें कुल गाड़ियों का सिर्फ 3% हैं, लेकिन PM2.5 प्रदूषण में उनकी हिस्सेदारी 36% है। सरकार का कहना है कि एक पुराना भारी ट्रक या बस, 14 BS-VI गाड़ियों जितना प्रदूषण फैला सकता है।
योजना कैसे चलेगी?
पूरी योजना एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए चलाई जाएगी। यहीं पर आवेदन, ब्याज में राहत, फ्यूल वाउचर और प्रदूषण में कमी की निगरानी होगी। योजना में आवेदन दो साल तक किए जा सकेंगे, जबकि नई गाड़ी पर मिलने वाले फायदे रजिस्ट्रेशन के बाद पांच साल तक जारी रहेंगे।
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