GST On Mango Drinks: केंद्र सरकार मैंगो ड्रिंक पर GST को उसमें मौजूद नेचुरल आम के पल्प के अमाउंट से जोड़ने पर विचार कर रही है। इस प्रपोजल के तहत 22-25% या उससे अधिक असली आम का पल्प वाले पेय पर 5% GST की रियायती दर जारी रह सकती है। इसका मकसद तोतापुरी आम की मांग बढ़ाकर किसानों को बेहतर दाम दिलाना और लोगों को बेहतर क्वालिटी वाले मैंगो ड्रिंक उपलब्ध कराना है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की बनाई एक्सपर्ट कमिटी की सिफारिशों के आधार पर यह प्रस्ताव, सिर्फ़ 22-25 फीसदी असली नेचुरल आम के पल्प वाले आम के ड्रिंक्स पर ही 5 फीसदी की रियायती GST दर बनाए रखने का सुझाव देता है। कम पल्प वाले प्रोडक्ट्स पर ज़्यादा GST दर लग सकती है।
ICAR-सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के डायरेक्टर टी दामोदरन की अगुवाई वाले पैनल ने अपनी रिपोर्ट कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री ने अधिकारियों को सिफारिशों पर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया है।
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के हवाले से, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने रिपोर्ट किया "कमेटी के हिसाब से, अगर सिर्फ़ उन ड्रिंक्स को 5 परसेंट की रियायती गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) कैटेगरी में रखा जाए जिनमें तय लिमिट से ज़्यादा पल्प होता है, और कम पल्प वाले प्रोडक्ट्स पर ज़्यादा GST रेट्स लगाए जाएं, तो एक तरफ तोतापुरी आम के पल्प का कंजम्पशन बढ़ेगा, और दूसरी तरफ कंज्यूमर्स को ज़्यादा पौष्टिक और असली फ्रूट-बेस्ड ड्रिंक्स मिलेंगे।"
इस प्रस्ताव का मकसद आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में इस सीजन में कीमतों में भारी गिरावट के बाद तोतापुरी पल्प की डिमांड को फिर से बढ़ाना है। कमिटी ने इस गिरावट की वजह प्रोसेसिंग यूनिट्स द्वारा देर से खरीद, घरेलू बाजार में बिकने वाले बेवरेज में पल्प की कम मात्रा और ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव को बताया है।
इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए, केंद्र GST काउंसिल, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI), और फाइनेंस, एग्रीकल्चर, फूड प्रोसेसिंग और हेल्थ मिनिस्ट्रीज़ को शामिल करते हुए टैक्स स्ट्रक्चर और प्रोडक्ट स्टैंडर्ड्स को फाइनल करने के लिए एक मीटिंग बुलाने की योजना बना रहा है।
तैयार होगा GST का नया स्ट्रक्चर
पैनल ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के लिए एक सेंट्रल कोऑर्डिनेशन एंड प्राइस स्टेबिलाइजेशन कमिटी बनाने की भी सिफारिश की है ताकि हर सीजन से पहले फसल के अनुमान, प्रोसेसिंग डिमांड, एक्सपोर्ट और इनपुट कॉस्ट का आकलन किया जा सके और इंडिकेटिव खरीद कीमतों की सिफारिश की जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, कमिटी ने आंध्र प्रदेश में पुराने हो रहे तोतापुरी बागों को ज़्यादा कीमत वाली आम की किस्मों के साथ ग्राफ्टिंग करके, अच्छी खेती के तरीकों को बढ़ाकर, खरीद की टाइमलाइन को स्टैंडर्ड बनाकर और किसानों के वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देकर फिर से नया जीवन देने का भी प्रस्ताव रखा है। इसने APEDA, ICAR और राज्य सरकारों के मिलकर किए गए प्रयासों से तोतापुरी आमों के लिए घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट को मजबूत करने की भी सिफारिश की।
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