अनाकापल्ले जिले के नथावरम पुलिस ने नरसिपटनम से तमिलनाडु और श्रीलंका में हाई क्वालिटी वाली शीलावती किस्म की गांजा की सप्लाई करने के आरोप में बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आंध्र-ओडिशा बॉर्डर से श्रीलंका में गांजा की तस्करी का यह पहला मामला लगता है। गिरफ्तार महिला की पहचान 28 साल की गाडे रेणुका के रूप में हुई है, जो विजयनगरम जिले के संथाकविती की रहने वाली है।
बताया जाता है कि वह पायकाराओपेटा, नरसिपटनम, सालुरु और बेंगलुरु में गांजे की तस्करी में शामिल थी, जिस वजह से उसे "लेडी डॉन" भी कहा जाता था। रेनूका और उसके साथी सूर्य कालिदास ने ओडिशा से गांजा मंगवाने और उसे तमिलनाडु और श्रीलंका में सप्लाई करने के लिए नरसिपटनम में एक घर किराए पर लिया था।
सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर वाई. तारकेश्वर राव और नथावरम सब-इंस्पेक्टर ने सृगावरम गांव के पास गैंग को रोका और 74 किलोग्राम सूखा गांजा, एक कार, दो बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए।
जांच से पता चला कि रेणुका ने बेंगलुरु और कोयंबटूर में घर किराए पर लेकर अपना कारोबार बढ़ाने के लिए एक नेटवर्क तैयार किया था। बिचौलिए अड्डुरी प्रसाद की मदद से वह ओडिशा के बलिमेला और चित्रकोंडा में आदिवासियों से 5,000 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गांजा खरीदती थी।
ड्राइवर मदन कुमार और नागा मुत्तु माल को राजनगरम राजमार्ग जंक्शन तक ले जाते थे, जहां से इसे तमिलनाडु और श्रीलंका भेजा जाता था। पुलिस ने बताया कि गैंग तमिलनाडु भर में छोटे पैकेटों में गांजा भी बेचता था और रेणुका के राज्य-आधारित तस्करों से संबंधों का फायदा उठाकर माल को श्रीलंका भेजता था।