BJP के एक सरप्राइज कैंडिडेट ने कैसे मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव को बना दिया रोमांचक? कांग्रेस में मची भगदड़!

MP Rajya Sabha Chunav: 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, इसलिए वह आसानी से दो सीटें जीत सकती है। पार्टी ने तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 6:02 PM
कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने का फैसला किया है।

मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीति गरमा गई है। चार्टर्ड विमान, विधायकों को बेंगलुरु भेजने की तैयारी, करोड़ों रुपये के कथित ऑफर और तीसरी सीट पर कांटे की टक्कर ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, इसलिए वह आसानी से दो सीटें जीत सकती है। पार्टी ने तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है।

लेकिन असली मुकाबला तीसरी सीट को लेकर है। बीजेपी ने अचानक महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतार दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन से होगा।


किसके पास कितने वोट?

बीजेपी के 164 विधायक हैं। दो सीटें जीतने के लिए उसे 116 वोट चाहिए, जिसके बाद उसके पास 48 वोट बचते हैं।

वहीं कांग्रेस की स्थिति पहले से कमजोर हुई है। एक विधायक की सदस्यता रद्द हो चुकी है और एक अन्य विधायक को वोट डालने से रोक दिया गया है। इसके बावजूद कांग्रेस के पास तीसरी सीट के लिए अभी भी मामूली बढ़त मानी जा रही है।

इसके अलावा, कांग्रेस से चुनाव जीतकर आईं निर्मला सप्रे के बीजेपी का समर्थन करने की संभावना है। वहीं भारतीय आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार भी बीजेपी के साथ माने जा रहे हैं।

कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु क्यों भेजा?

कांग्रेस को डर है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं या पार्टी छोड़ सकते हैं। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि कुछ विधायकों को बीजेपी की ओर से पैसे का लालच दिया गया और उनसे संपर्क किया गया। बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

इसी आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने का फैसला किया है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए पार्टी को लगता है कि वहां उसके विधायक सुरक्षित रहेंगे और किसी तरह की टूट-फूट नहीं होगी।

2020 का डर अभी भी कायम

कांग्रेस की चिंता की सबसे बड़ी वजह 2020 की घटना है। उस समय ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 कांग्रेस विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी, जिससे कमलनाथ सरकार गिर गई थी और बीजेपी दोबारा सत्ता में आ गई थी।

इस घटना को कांग्रेस आज तक नहीं भूली है, इसलिए इस बार वह कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

18 जून को क्या होगा?

18 जून को मध्य प्रदेश समेत 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होगा। मध्य प्रदेश में सबकी नजर तीसरी सीट पर टिकी है, जहां मुकाबला बेहद रोचक और करीबी माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रख पाती है या बीजेपी तीसरी सीट पर भी जीत हासिल कर कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर देती है।

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