बीते 20 दिनों से जारी ईरान, अमेरिका और इजरायल की जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इस लड़ाई में अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है। युद्ध में अमेरिका को ऐसे जख्म मिल रहे हैं, जिसका उसने कभी अंदाजा भी नहीं लगाया होगा। ईरान ने अमेरिका का सबसे आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट F-35 को हिट किया है। ईरान ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इस जेट को पहचान कर निशाना बनाया और मार गिराया, जबकि अमेरिका का कहना है कि जेट ने मिडिल ईस्ट के एक बेस पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग की।
दुनिया में पहली बार F-35 स्टील्थ फाइटर जेट हुआ हिट
ईरान ने यह भी दावा किया कि बंदर अब्बास के ऊपर एक और F-35 को भी निशाना बनाया गया। खास बात यह है कि जिन ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम को पहले कमजोर बताया जा रहा था, उन्होंने इतनी एडवांस और महंगी तकनीक वाले विमान को कैसे ट्रैक और टारगेट किया, इसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब अमेरिकी F-35 जेट गिराया गया, तब वह मध्य ईरान के ऊपर उड़ रहा था, जिससे यह साफ होता है कि अमेरिका को भरोसा था कि ईरान की हवाई सुरक्षा अब काफी कमजोर हो चुकी है। इसी भरोसे के चलते डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी विमान जहां चाहें वहां उड़ सकते हैं और उन पर कोई हमला नहीं हो रहा, जबकि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह खत्म बताया था। लेकिन इन बयानों के कुछ ही घंटों बाद, रडार से बचने के लिए बनाए गए इस एडवांस्ड F-35 जेट को निशाना बना लिया गया। इतना ही नहीं, अमेरिका के प्रतिक्रिया देने से पहले ही ईरान ने एक वीडियो जारी कर दिया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इस महंगे (100 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत वाले) जेट को ट्रैक कर इंटरसेप्ट किया, जिससे अमेरिका के दावों पर सवाल खड़े हो गए।
जंग में साबित होगा अहम मोड़
विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटना युद्ध का एक अहम मोड़ साबित हो सकती है, जिसकी चर्चा दुनिया भर में होगी। आज करीब 15 देश F-35 के अलग-अलग वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं और पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को भी यह जेट खरीदने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन भारत ने अभी तक इसमें खास रुचि नहीं दिखाई है। गौर करने वाली बात यह है कि F-35 अमेरिका की सबसे एडवांस एयरोस्पेस तकनीक का उदाहरण है और इसे बनाने में भारी निवेश किया गया है। लेकिन अब ईरान जैसे देश ने, जिसे पहले कमजोर बताया जा रहा था, इस जेट को निशाना बनाकर यह संकेत दिया है कि इतनी आधुनिक तकनीक में भी कुछ कमियां हो सकती हैं।
सवाल यह उठता है कि जिस F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट को रडार से बचने के लिए बनाया गया है, उसे आखिर ईरान ने कैसे गिराया। रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन के अनुसार “स्टेल्थ” तकनीक को पूरी तरह अदृश्य समझना सही नहीं है, क्योंकि इसे पकड़ने के और भी तरीके होते हैं, जैसे कि इसकी हीट सिग्नेचर को ट्रैक करना। उनका कहना है कि इसी तरीके से जेट को निशाना बनाया गया होगा। हालांकि यह साफ नहीं है कि ईरान ने कौन-सी मिसाइल इस्तेमाल की, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि या तो ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ यानी हवा में घूमकर हमला करने वाला हथियार या फिर कम दूरी की ‘सर्फेस-टू-एयर’ मिसाइल का उपयोग किया गया, जिसने इस आधुनिक विमान को टारगेट किया।
358 मिसाइल, जिसे SA-67 भी कहा जाता है, असल में एक तरह का ‘लोइटरिंग ड्रोन’ है, जिसमें इंफ्रारेड सेंसर लगा होता है और यह आमतौर पर धीमी गति से उड़ने वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि F-35 जैसे तेज जेट के लिए यह सामान्य विकल्प नहीं माना जाता, लेकिन इससे पहले ईरान इसी मिसाइल का उपयोग अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को गिराने में कर चुका है और उसने ये मिसाइलें यमन के हूती विद्रोहियों को भी दी हैं। जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका के 12 से ज्यादा MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट किए जा चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि इस तरह के हथियारों का प्रभाव लगातार देखा जा रहा है।