Strait of Hormuz: भारत ने शुक्रवार को साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की आवाजाही एक तय समन्वय व्यवस्था के तहत की जा रही है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इससे जुड़ी जानकारी गोपनीय रखे जा रहे हैं। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा कि सरकार विभिन्न मंत्रालयों और राजनयिक माध्यमों के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब फरवरी के अंत से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण समुद्री यातायात (Maritime Traffic) बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
विदेश, पेट्रोलियम और उर्वरक मंत्रालय मिलकर कर रहे समन्वय
नियमित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बोलते हुए, शर्मा ने कहा कि विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय के समन्वय से जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत यह तय किया जाता है कि किन जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने इस प्रक्रिया से जुड़ी अधिक जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
शर्मा ने आगे कहा, "भारत और ईरान के साथ समन्वय और प्राथमिकता निर्धारण के बारे में, मैं स्पष्ट कारणों से अभी कुछ नहीं बताना चाहूंगा।"
शर्मा ने बताया कि वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट में लगभग 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज कार्यरत हैं। इनमें एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक रसायन टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं।
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि लगभग 270,000 मीट्रिक टन कच्चे तेल से लदा टैंकर निसोस केरोस 25 और 26 मई के बीच सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य को पार कर गया और 3 जून को विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है।
कमर्शियल शिप-ट्रैकिंग सिस्टम से हो रही जहाजों की निगरानी
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले कमर्शियल शिप-ट्रैकिंग सिस्टम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और फिलहाल इनका इस्तेमाल क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "इसका सटीक जवाब देना बहुत मुश्किल है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध किसी भी डेटा का उपयोग व्यक्ति अपनी मंशा के अनुसार कर सकता है।" उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में ऐसा डेटा ट्रैकिंग प्रयासों में सहायक है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील जहाजरानी मार्गों में से एक है, जो प्रमुख तेल और गैस उत्पादकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में समुद्री आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और ऊर्जा की कीमतों में उछाल आया है।
बता दें कि भारत के लिए, कच्चे तेल के आयात का लगभग 30% और LPG के आयात का लगभग 70% होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।