किसके कार्यकाल में बने कितने IIT, AIIMS? पीएम मोदी और पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के बीच का ये कंपैरिजन जानिए

Narendra Modi: नरेंद्र मोदी ने बुधवार यानी 10 जून को सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को पीएम पद की शपथ लेने के बाद आज उनके कार्यकाल को 4399 दिन पूरे हो गए।

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 10:29 AM
पीएम मोदी ने तोड़ा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड! ऐसे बदला भारत का शिक्षा मॉडल

Narendra Modi: नरेंद्र मोदी ने बुधवार यानी 10 जून को सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को पीएम पद की शपथ लेने के बाद आज उनके कार्यकाल को 4399 दिन पूरे हो गए। बता दें कि इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू के पास था। वे 4398 दिनों तक इस पद रहे। अब चलिए इस तुलना के जरिए यह समझने की कोशिश करते हैं कि पिछले सात दशकों में भारत कितना बदल गया है। वहीं, अगर इस बदलाव को सबसे अच्छी तरह किसी क्षेत्र में देखा जा सकता है, तो वह है उच्च शिक्षा (हायर एजुकेशन) का क्षेत्र।

बता दें कि आजादी के बाद के शुरुआती वर्षों में पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे संस्थानों का निर्माण करना था, जो भारत को विज्ञान, तकनीक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकें। इसलिए उनके दौर में IIT, AIIMS और अन्य प्रमुख संस्थानों की नींव रखी गई, ताकि एक आधुनिक भारत का निर्माण किया जा सके।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में चुनौती कुछ अलग रही। अब लक्ष्य केवल नए संस्थान बनाना नहीं, बल्कि देश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक उच्च शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसी सोच के तहत IIT, IIM और AIIMS जैसे संस्थानों का विस्तार देश के नए राज्यों और शहरों तक किया गया।


दरअसल, भारत के IIT, IIM और AIIMS की कहानी देश के विकास की बदलती जरूरतों को दर्शाती है। एक दौर संस्थानों की नींव रखने का था, जबकि दूसरा दौर उन्हें देश के हर कोने तक पहुंचाने और उनकी क्षमता बढ़ाने का है।

आधुनिक भारत को आकार देने वाले संस्थान

आजादी के बाद के सालों में, भारत के नेताओं ने देश के निर्माण के लिए उच्च शिक्षा को बहुत अहम माना। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) की स्थापना दुनिया-भर में बेहतरीन इंजीनियरिंग टैलेंट तैयार करने के लिए की गई थी, जो औद्योगिक और तकनीकी विकास को आगे बढ़ा सकें। बता दें कि नेहरू के कार्यकाल में 5 IIT स्थापित किए गए – खड़गपुर, बॉम्बे, मद्रास, कानपुर और दिल्ली। इसी दौरान, AIIMS दिल्ली देश के प्रमुख मेडिकल शिक्षा और रिसर्च संस्थान के रूप में उभरा।

ये संस्थान आगे चलकर भारत के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक ब्रांड बने और इन्होंने इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और इनोवेटर्स की कई पीढ़ियां तैयार कीं, जिन्होंने देश की विकास गाथा को आकार देने में मदद की।

हालांकि, दशकों तक ऐसे संस्थानों तक पहुंच सीमित रही। इनकी प्रतिष्ठा तो बढ़ी, लेकिन साथ ही सीमित सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ती गई।

मोदी-युग में विस्तार

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला, तब भारत की आबादी 120 करोड़ से अधिक थी और देश दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल हो चुका था। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही थी। हर साल लाखों छात्र बेहतरीन संस्थानों में एडमिशन के लिए मुकाबला कर रहे थे। इसलिए ध्यान केवल उत्कृष्ट संस्थान बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

पिछले एक दशक में, भारत के टॉप एजुकेशनल संस्थानों का नेटवर्क काफी बढ़ा है। IITs की संख्या 2014 में 16 से बढ़कर 2026 तक 23 हो गई। IIMs की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई, जबकि पूरे देश में AIIMS संस्थानों की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई।

यह विस्तार केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं था। इसका उद्देश्य उन राज्यों और क्षेत्रों तक भी बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना था, जहां पहले ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद नहीं थे। इसी सोच के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में नए IIT, IIM और AIIMS स्थापित किए गए, जिससे उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा कुछ बड़े शहरों तक सीमित रहने के बजाय पूरे देश में फैलने लगा।

नए भारत को शिक्षित करना

विस्तार का यह पैमाना देश की बदलती हकीकत को दिखाता है। जब पहला IIT बना था, तब भारत की आबादी लगभग 34 करोड़ थी। आज देश में 140 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं। बढ़ती आय, ज्यादा जागरूकता और करियर के बढ़ते मौकों की वजह से प्रोफेशनल शिक्षा पाने की चाहत रखने वाले छात्रों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

इसी सोच के तहत मोदी सरकार ने IIT, IIM और AIIMS के विस्तार को मिशन मोड में आगे बढ़ाया। इसका उद्देश्य एक ओर बढ़ती युवा आबादी की जरूरतों को पूरा करना था, तो दूसरी ओर इंजीनियरिंग, प्रबंधन और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार कर भारत की प्रतिभा क्षमता को और मजबूत बनाना था।

सिर्फ संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं

हालांकि, संस्थानों की संख्या बढ़ाने के साथ कई चुनौतियां भी सामने आती हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नए कैंपस खोलना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी वहां अच्छी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करना, शोध कार्यों को बढ़ावा देना और मजबूत शैक्षणिक माहौल तैयार करना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, नए संस्थानों को अक्सर पुरानी संस्थाओं जैसी प्रतिष्ठा और एकेडमिक माहौल बनाने में कई साल लग जाते हैं।

फिर भी, एक बड़ा बदलाव साफ तौर पर दिखाई देता है। वह है भारत में उच्च शिक्षा का दायरा, जो हाल ही में आजाद हुए देश के कुछ चुनिंदा बेहतरीन संस्थानों से बढ़कर अब एक बहुत बड़े नेटवर्क में बदल गया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी छात्र आबादी में से एक की जरूरतों को पूरा करता है।

नींव और विस्तार

भारत के प्रमुख शिक्षण संस्थानों का विकास दो अलग-अलग दौर की कहानी कहता है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का सबसे बड़ा योगदान उन संस्थानों की स्थापना में था, जो आगे चलकर शैक्षणिक उत्कृष्टता और आधुनिक भारत की पहचान बने। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इन संस्थानों के नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया, ताकि तेजी से बढ़ती आबादी और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके।

साथ मिलकर, 5 IIT से 23 IIT और एक AIIMS से 23 IIMS तक का यह सफर न सिर्फ शैक्षिक बुनियादी ढांचे के विकास को दिखाता है, बल्कि खुद भारत के बदलाव को भी दर्शाता है।

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