अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद अब दुनिया का ध्यान लड़ाई से हटकर उसके बड़े असर पर केंद्रित हो गया है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आने वाले तेल की सप्लाई को लेकर है। अगर इस अहम समुद्री मार्ग में कोई रुकावट आती है तो इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। इस स्थिति ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि भारत ने पिछले कई दशकों में पश्चिम एशिया के बड़े संकटों से कैसे निपटा है। 1973 के योम किप्पुर युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रवैया और हाल के इज़राइल-ईरान तनाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया, भारत की विदेश नीति के दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को दिखाती है।
