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मानसून का इस बार खेती पर कैसा असर! खरीफ फसलों की बुआई का गैप घटकर 2% पहुंचा पर धान दे रहा टेंशन, समझिए इसके मायने

देश में इस साल मानसूनी बारिश की शुरुआती सुस्ती के बाद अब खेती-किसानी के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आ रही है। जून के महीने में बीते 12 सालों की सबसे कम बारिश (40 फीसदी घाटा) दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में हुई सामान्य बारिश ने खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार को दोबारा पटरी पर ला दिया है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Aug 19, 2026 पर 5:00 PM
मानसून का इस बार खेती पर कैसा असर! खरीफ फसलों की बुआई का गैप घटकर 2% पहुंचा पर धान दे रहा टेंशन, समझिए इसके मायने
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देश में इस साल मानसूनी बारिश की शुरुआती सुस्ती के बाद अब खेती-किसानी के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आ रही है। जून के महीने में बीते 12 सालों की सबसे कम बारिश (40 फीसदी घाटा) दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में हुई सामान्य बारिश ने खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार को दोबारा पटरी पर ला दिया है। Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानसूनी फसलों के रकबे में जून के मुकाबले बड़ा सुधार देखने को मिला है। अगर आने वाले दिनों में बारिश का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है तो इससे देश में खाद्यान्न की महंगाई को कंट्रोल करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

बुआई का अंतर घटकर 2% पर आया, 101.7 मिलियन हेक्टेयर में हुई बुआई

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 14 अगस्त तक देशभर के किसानों ने 101.7 मिलियन हेक्टेयर (लगभग 251 मिलियन एकड़) में मानसूनी फसलों की बुआई पूरी कर ली है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि में हुई बुआई के मुकाबले महज 2 फीसदी कम है। जून के महीने में अल नीनो के असर की वजह से यह अंतर काफी ज्यादा था।

ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने बताया कि जून के बाद से बुआई की गति में काफी सुधार देखने को मिला है। दलहन, तिलहन और कपास जैसी प्रमुख फसलों की बुआई संतोषजनक दिख रही है। हालांकि कुछ फसलों का रकबा पिछले साल से थोड़ा कम है तो कुछ दूसरी फसलों के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी भी देखी गई है।

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