Bihar Highway Project: बिहार में ₹3,591 करोड़ से बनेगा फोरलेन हाईवे, 9,450 करोड़ रुपये की 4 रेल प्रोजेक्ट को कैबिनेट की मंजूरी

Bihar Highway Project: पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों में फैले चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इनकी कुल अनुमानित लागत 9,450 करोड़ रुपये है। ये प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर की बढ़ोतरी करेंगे। इनके 2030-31 तक पूरे होने की उम्मीद है

अपडेटेड Aug 19, 2026 पर 4:34 PM
Bihar Highway Project: 9,450 करोड़ की चार रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिली है

Bihar Highway Project: केंद्र सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चार प्रमुख रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट और बिहार की एक बड़ी हाईवे परियोजना को मंजूरी दी है। इन पांचों प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत करीब 13,041 करोड़ रुपये है। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रेल और सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यात्री ट्रेनों के साथ-साथ माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी। इससे महत्वपूर्ण इलाकों में आवागमन आसान होगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जिन चार रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उनकी कुल अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों से होकर गुजरेंगी। इनके तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर का इजाफा होगा। परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

हावड़ा-चेन्नई रेल रूट होगा और मजबूत


रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि स्वीकृत चार रेलवे परियोजनाओं में से तीन हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग से संबंधित हैं। जबकि चौथी परियोजना कटक-पारादीप रेल सेक्शन से जुड़ी है। इन परियोजनाओं में हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेलवे लाइन के महत्वपूर्ण हिस्सों का क्वाड्रपलिंग यानी चार लाइन में विस्तार किया जाएगा। वहीं कटक-पारादीप मार्ग पर तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा।

रेल मंत्री ने हावड़ा-चेन्नई रूट को देश की बेहद महत्वपूर्ण रेलवे लाइनों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस पूरे कॉरिडोर को चार लाइन वाला बनाया जाएगा। इससे इस मार्ग पर एक साथ ज्यादा ट्रेनों का संचालन संभव होगा।

रेल मंत्री ने दी पूरी डिटेल्स

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "बिहार में बहुत इंपॉर्टेंट आज हाईवे का प्रोजेक्ट माननीय प्रधानमंत्री जी ने अप्रूव किया है। यह प्रोजेक्ट एक तरीके से पूरे बिहार के लिए बहुत मेजर लाइफलाइन बन रहा है। यह प्रोजेक्ट नेपाल के बॉर्डर से लेके स्टार्ट होता है।"

रेल मंत्री ने आगे कहा, "कम्प्लीट एक बड़ी आर्टरी बनेगा, ट्रांसपोर्ट की बहुत बड़ी यह मेन लाइन, मेन रोड बनेगी जो कि बिहार के लिए कई वर्षों तक इसका बेनिफिट मिलेगा। 83 किलोमीटर का ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट है। एगजिस्टिंग लाइन को अपग्रेड किया जाएगा 4 लेन हाईवे में और ₹3,591 करोड़ का इन्वेस्टमेंट इसमें होगा। 30 महीने में कंस्ट्रक्शन रहेगा। फ्लैक्सिबल पेवमेंट, यानी ब्लैकटॉप पेवमेंट रहेगा इसमें...।"

अश्विनी वैष्णव ने इस दौरान आगे कहा, "पहले चार प्रोजेक्ट में जो हावड़ा से चेन्नई की रूट है, मेन लाइन है, इस मेन लाइन के क्वाड्रपलिंग के डिसीजंस हैं। और एक है कटक से पारादीप रेलवे लाइन का क्वाड्रपलिंग का, थर्ड एंड फोर्थ लाइन। और पांचवा प्रोजेक्ट है मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा, एकदम नेपाल के बॉर्डर तक। यह फोर लेन हाईवे बनाने का टोटल 13,041 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स आज कैबिनेट में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अप्रूव किए हैं...।"

यात्रियों के साथ माल ढुलाई को भी मिलेगा फायदा

चार लाइन वाला रेल कॉरिडोर बनने से सबसे बड़ा फायदा ट्रेनों के संचालन में होने की उम्मीद है। एक ही मार्ग पर ज्यादा ट्रेनों को चलाने की क्षमता बढ़ेगी और मालगाड़ियों के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। रेलवे के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यस्त रूट पर यात्री और मालगाड़ियों के बीच संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा। इसके अलावा, लाइन के रखरखाव के दौरान भी ट्रेनों के संचालन पर कम असर पड़ने की संभावना है। सरकार का जोर ऐसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने पर है, ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

बिहार में 82.5 किलोमीटर लंबा हाईवे होगा फोरलेन

कैबिनेट ने बिहार के लिए भी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को चार लेन में अपग्रेड किया जाएगा। यह सड़क NH-22 का हिस्सा है और इसकी लंबाई करीब 82.578 किलोमीटर है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 3,590.73 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत आएगी।

इस हाईवे के जरिए मुजफ्फरपुर को सितामढ़ी होते हुए नेपाल सीमा के पास स्थित सोनबरसा से जोड़ा जाएगा। चार लेन बनने के बाद इस मार्ग पर यातायात क्षमता बढ़ने के साथ सफर को भी अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

हाइब्रिड एन्युटी मोड पर होगा काम

बिहार की इस सड़क परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत लागू किया जाएगा। यह परियोजना बिहार के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह उत्तर बिहार को नेपाल सीमा के नजदीकी क्षेत्र से बेहतर सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। बेहतर हाईवे से स्थानीय लोगों के आवागमन के अलावा व्यापार, परिवहन और माल ढुलाई को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

पांच बड़े फैसलों का कुल असर 13,041 करोड़ रुपये

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में देश की इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों से जुड़े पांच बड़े फैसले लिए गए हैं। इनमें पहले चार फैसले रेलवे से संबंधित हैं, जबकि पांचवां फैसला हाईवे सेक्टर से जुड़ा है। चार रेलवे परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये और बिहार हाईवे परियोजना की लागत 3,590.73 करोड़ रुपये है। इस तरह सभी स्वीकृत परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 13,041 करोड़ रुपये बैठती है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल रेल और सड़क नेटवर्क का विस्तार होगा, बल्कि देश के प्रमुख आर्थिक और परिवहन कॉरिडोर की क्षमता भी बढ़ेगी।

2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य

रेलवे की चारों परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोजेक्ट पूरी होने के बाद हावड़ा-चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही कटक-पारादीप सेक्शन में भी रेल नेटवर्क मजबूत होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए इन फैसलों को केंद्र सरकार ने देश की फाउंडेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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