IDFC Bank Scam: 590 करोड़ का घोटाला! पूर्व बैंक मैनेजर ने पत्नी-साले की कंपनी में ऐसे पहुंचाया सरकारी पैसा

IDFC Bank Scam: घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना बैंक अकाउंट बंद कर दूसरी बैंक में पैसा ट्रांसफर करने की मांग की। प्रक्रिया के दौरान बैंक अधिकारियों को रिकॉर्ड में दर्ज रकम और असली बैलेंस में फर्क दिखा

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 6:11 PM
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IDFC Bank Scam: 590 करोड़ का घोटाला! पूर्व बैंक मैनेजर ने पत्नी-साले की कंपनी में ऐसे पहुंचाया सरकारी पैसा

चंडीगढ़ में IDFC फर्स्ट बैंक की एक ब्रांच से जुड़ा 590 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में जो खुलासा हुआ है, उसने सबको हैरान कर दिया। हरियाणा सरकार के विभागों के खातों से पैसे निकालकर एक निजी कंपनी में ट्रांसफर किए गए। यह कंपनी किसी और की नहीं, बल्कि बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर की पत्नी और साले की बताई जा रही है। इस मामले में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

ACB के महानिदेशक एएस चावला ने कहा कि रिभव और अभय इस पूरे घोटाले के मुख्य आरोपी हैं। दोनों करीब छह महीने पहले नौकरी छोड़ चुके थे। इनमें शामिल हैं:

  • पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि
  • पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय
  • रिभव की पत्नी स्वाति सिंगला
  • स्वाति के भाई अभिषेक सिंगला

300 करोड़ एक ही कंपनी में


जांच में सामने आया कि करीब 300 करोड़ रुपए “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स” नाम की कंपनी में ट्रांसफर किए गए। इस कंपनी में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी स्वाति सिंगला की है, जबकि 25 प्रतिशत शेयर अभिषेक सिंगला के पास हैं।

बताया जा रहा है कि इस कंपनी से आगे भी पैसे भेजे गए, जिसकी जांच जारी है।

ऐसे खुला पूरा मामला

घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना बैंक अकाउंट बंद कर दूसरी बैंक में पैसा ट्रांसफर करने की मांग की।

प्रक्रिया के दौरान बैंक अधिकारियों को रिकॉर्ड में दर्ज रकम और असली बैलेंस में फर्क दिखा। इसके बाद दूसरे सरकारी खातों की जांच की गई तो वहां भी गड़बड़ी सामने आई।

बैंक ने रेगुलेटरी फाइलिंग में माना कि यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ ब्रांच में कुछ कर्मचारियों की कथित अनधिकृत और फर्जी गतिविधियों का नतीजा है।

जांच एजेंसियों के सवाल

एएस चावला ने कहा कि चंडीगढ़ में बैंक की ब्रांच, हरियाणा में सरकारी विभाग और मोहाली में दूसरी बैंक- तीन शहर और दो राज्य-एक केंद्र शासित प्रदेश इस पूरे मामले में जुड़े हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकारी विभागों के खाते राज्य की सीमा से बाहर कैसे खोले गए? वरिष्ठ प्रबंधन से भी इस पर जवाब मांगा गया है।

उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। पूरा तरीका (मोडस ऑपरेंडी) समझ में आ गया है, लेकिन सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही पूरी जानकारी साझा की जाएगी।

बैंक का बयान

जांच के बीच बैंक ने बयान जारी कर कहा है कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को 100 प्रतिशत मूलधन और ब्याज लौटा दिया है।

बैंक के मुताबिक, कुल 583 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया है। बैंक ने कहा कि उसने जांच का इंतजार किए बिना पैसा लौटाया, क्योंकि उसके लिए “कस्टमर फर्स्ट” सिद्धांत सबसे ऊपर है।

हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक कैसे इधर-उधर होती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी? जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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